‘कश्मीर के समाधान से पहले शांति नहीं’, शाहबाज ने प्र.म. बनने से पहले दिखाया असली रंग

'No peace before Kashmir's resolution', Shahbaz told PM True colors shown before being made
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इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान की सत्ता से इमरान खान की बेदखली हो चुकी है और पूर्व पीएम नवाज शरीफ के भाई शहबाज शरीफ नए वजीर-ए-आजम बनने की राह पर हैं। सोमवार को पाकिस्तान संसद में नए पीएम का ऐलान होगा। शहबाज शरीफ ने पीएम बनने से पहले ही अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है। शहबाज शरीफ ने कहा है कि जब तक कश्मीर का मुद्दा हल नहीं निकल जाता तब तक भारत से बातचीत नहीं होगी।

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान की राजनीति की शुरूआत भारत से होती है और अंत भी भारत पर बयान देकर होता है। अपनी सत्ता खोने के डर से बार-बार जनता को संबोधित करते हुए इमरान खान ने भारत की तारीफ की तो दूसरी ओर नए पीएम बनने की ओर बढ़ रहे शहबाज शरीफ ने भारत के खिलाफ बयान दिया है। पीएम पद का नामांकन करने के बाद मीडिया से बातचीत में शहबाज शरीफ ने कहा कि जब तक कश्मीर मुद्दे का समाधान नहीं हो जाता, भारत से बातचीत नहीं होगी।

शहबाज शरीफ और लश्कर-ए-तैयबा सरगना हाफिज सईद के साथ संबंध काफी दोस्ताना हैं। जून 2013 में पंजाब सूबे के मुख्यमंत्री रहने के दौरान शहबाज शरीफ ने हाफिज सईद के आतंकी संगठन जमात उल दावा को सरकारी खजाने से 6.1 करोड़ रूपये दिए थे। यह पैसा जमात-उल-दावा के सबसे बड़े केंद्र मरकज-ए-तैयबा के लिए दिया गया था। इसके अलावा राज्य सरकार ने मरकज़-ए-तैयबा में नॉलेज पार्क की स्थापना और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए 350 मिलियन रूपये आवंटित किए थे। बड़ी बात यह है कि तब हाफिज सईद के खिलाफ मुंबई आतंकी हमले की साजिश रचने के पुख्ता सबूत भी थे। शहबाज शरीफ ने प्रधानमंत्री बनने से पहले एक इंटरव्यू में कहा कि वे भारत के साथ शांति चाहते हैं जो कश्मीर विवाद के समाधान तक संभव नहीं है। ऐसे में तय है कि शहबाज शरीफ भी अपने पूर्ववर्ती इमरान खान की तरह कश्मीर राग गाना जारी रखेंगे। पाकिस्तान में सेना के डर से हर राजनीतिक दल की मजबूरी है कि वे कश्मीर मुद्दे को हमेशा उठाते रहे। पाकिस्तानी सेना भी इसी मुद्दे के दम पर अपने गरीब मुल्क के बजट से भारी-भरकम पैसा ऐंठती है। इमरान खान भी अपने हर भाषण में कश्मीर का नाम लेते रहे हैं।

बताते चलें कि इस वक्त पाकिस्तान राजनीतिक संकट के अलावा महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी और खरबों के विदेशी कर्ज से जूझ रहा है। इमरान खान की विदाई के बाद शहबाज शरीफ के सामने पाकिस्तान को मजबूती से खड़ा करना नई चुनौती है लेकिन अपनी आवाम को नौकरी देने, महंगाई पर काबू पाने और देश को आर्थिक मजबूती पर बात करने के बजाय वो कश्मीर का राग अलाप रहे हैं।


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