‘नो बॉल’ विवाद : दिल्ली टीम पर कार्रवाई & मैदान में जाने पर पर सहायक कोच आमरे पर एक मैच का बैन, पंत पर मैच फीस का 100% ठाकुर पर 50% जुर्माना

'No ball' controversy: Action on Delhi team & one match ban on assistant coach Amre for going on the field, 100% fine on Pant Thakur 50% of match fee
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मुंबई (कार्यालय संवाददाता)। दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ शुक्रवार को हुए मुकाबले में नो-बॉल विवाद पर दिल्ली के कप्तान ऋषभ पंत, शार्दूल ठाकुर और प्रवीण आमरे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हुई है। कप्तान पंत पर मैच फीस का 100% जुर्माना और शार्दूल ठाकुर पर मैच फीस का 50% का जुर्माना लगाया गया है। इसके साथ ही प्रवीण आमरे पर एक मैच का बैन लगा दिया गया है।

ऋषभ ने अपने स्टैंड को सही बताया

वहीं पंत ने अपने स्टैंड को सही बताया। मैच के बाद ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए पंत ने कहा कि स्टेडियम में मौजूद तमाम लोगों ने देखा कि तीसरी गेंद नो बॉल थी। अगर उसे नो बॉल दिया जाता तो मैच का नतीजा बदल सकता था। जब अंपायर उस मामले को थर्ड अंपायर को रेफर करने को तैयार नहीं हुए, तब पंत ने अपने बल्लेबाजों को मैच छोड़कर वापस आने को कहा था।

पंत चाहते थे कि गेंद को थर्ड अंपायर चेक करें

पंत ने कहा, राजस्थान के गेंदबाज हमारी पारी में अच्छी गेंदबाजी कर रहे थे। लेकिन, रोवमैन पॉवेल ने आखिरी ओवर की पहली तीन गेंदों पर छक्का जमाकर मैच में हमारी वापसी करा दी थी। तीसरी गेंद काफी अहम थी। अगर वह नो-बॉल होती तो आगे कुछ भी हो सकता था। हम चाहते थे कि थर्ड अंपायर रीप्ले देखकर फैसला करें।

अंतिम ओवर की तीसरी गेंद पर हुआ था ‘नो बॉल’ का विवाद

आखिरी ओवर में दिल्ली को जीत के लिए 6 गेंदों पर 6 छक्कों की जरूरत थी। रॉवमैन पावेल ने ओबेड मकॉय के इस ओवर की पहली तीन गेंदों पर तीन छक्के जमा दिए।

सारा विवाद तीसरी गेंद को लेकर हुआ। पावेल ने जब गेंद को हिट किया तब वह कमर से ऊपर दिखाई दे रही थी। इस तरह नियम के तहत, उसे नो-बॉल दिया जाना चाहिए था। अंपायर ने ऐसा नहीं किया और न ही मामले को थर्ड अंपायर को रेफर किया।

पंत बल्लेबाजों को वापस बुलाने पर अड़े थे

ग्राउंड अंपायर्स नितिन मेनन और निखिल पटवर्धन का मानना था कि गेंद नो बॉल नहीं थी। दिल्ली के डगआउट में मौजूद कप्तान पंत और कोच प्रवीण आमरे का मानना था कि गेंद कमर से ऊपर थी और उसे नो-बॉल दिया जाना चाहिए। अंपायर के फैसले से नाराज पंत ने अपने बल्लेबाजों को ग्राउंड से वापस आने को कह दिया। बल्लेबाज वापस भी आने लगे थे।

इसके बाद कोच आमरे अंपायर के पास गए, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। वे चाह रहे थे कि अंपायर कम से कम मामले को थर्ड अंपायर के पास रेफर करें।

पंत द्वारा खिलाडिय़ों को वापस बुला लेने पर सहायक कोच शेन वाटसन हुए नाराज, ‘अंपायर का निर्णय सही हो या गलत स्वीकारा जाना चाहिए’

दिल्ली कैपिटल्स के सहायक कोच शेन वॉटसन ने अंतिम ओवर में मैदान में घटित हुए नाटकीय घटनाक्रम पर कहा कि आखरी ओवर में जो कुछ भी हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। अंपायर का निर्णय सही हो या गलत उसे स्वीकारा जाना चाहिए। कोई मैदान पर दौड़ लगा रहा है, निश्चित रूप से यह स्वीकार्य नहीं है। यह सही नहीं है। हालांकि वॉटसन ने इस बात पर भी अपनी सहमति जताई कि खेल में पैदा हुई रूकावट ने राजस्थान को रणनीति तैयार करने का पर्याप्त समय दे दिया। वॉटसन ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि खेल के बीच इतनी बड़ी देर की रूकावट पूरे मोमेंटम को शिफ्ट कर सकता है। इस व्यवधान ने मकॉए को तैयारी का अधिक मौका दे दिया और यह राजस्थान के पक्ष में घूम गया। यह रूकावट दुर्भाग्यपूर्ण थी, लेकिन अंततोगत्वा आपको अंपायर के निर्णय को स्वीकारना होता है और यही हमें शुरू से सिखाया भी गया है। जिसका पालन किया जाना चाहिए।Þ राजस्थान रॉयल्स टीम के निदेशक कुमार संगकारा ने इस नाटकीय घटनाक्रम पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा, अंपायर ही खेल को नियंत्रित करते हैं। आईपीएल में काफी दबाव होता है। ऐसे में कई बार तनाव और निर्णय किसी भी एक पक्ष में जा सकता है। मुझे नहीं लगता कि मैं वास्तव में यह तय कर सकता हूं कि क्या स्वीकार्य है और क्या नहीं।


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