पहलवानों के बाद मुक्केबाजों का जलवा, निखत-नीतू-अमित ने लगाया ‘गोल्डन पंच’

पहलवानों के बाद मुक्केबाजों का जलवा, निखत-नीतू-अमित ने लगाया 'गोल्डन पंच'
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बर्मिंघम (एजेंसी)। विश्व चैम्पियन निखत जरीन ने रविवार को राष्ट्रमंडल खेलों की लाइट फ्लाईवेट (48-50 किग्रा) स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। भारत की निखत जरीन ने उत्तरी आयरलैंड की कार्ली एमसी नौल को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारत का दिन का ये चौथा और बर्मिंघम में कुल मिलाकर 17वां गोल्ड मेडल है।

निखत : देश को मिली अगली मैरीकॉम!

निखत जरीन अपने ताकतवर मुक्कों से जीत की कहानी लिखती रहीं हैं। इस साल वल्र्ड चैंपियन बनने के बाद अब कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड मेडल जीतना 26 साल की इस युवा बॉक्सर के करियर का बड़ा माइल स्टोनमाना जाएगा। उनका प्रदर्शन इस बात की गवाही देता है कि देश को अगली मैरीकॉम मिल गई है। अब देश को पेरिस 2024 ओलिंपिक में उनसे गोल्ड की उम्मीद होगी। निखत ने अपने ताबड़तोड़ मुक्कों से प्रतिद्वंद्वी कार्ली मैकनॉल को टिकने नहीं दिया और 50 किलोग्राम फाइनल का गोल्ड जीता।

निखत जरीन ने इस साल मई में तुर्की के इस्तांबुल में हुई विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप की फ्लाईवेट (52 किलाग्राम) स्पर्धा में गोल्ड जीता था। मगर कॉमनवेल्थ गेम्स में 52 किलोग्राम की बजाय 50 किलोग्राम वर्ग होता है इसलिए उन्हें दो किलाग्राम वजन कम करना था। यह मानसिक रूप से भी उनके लिए एक चुनौती थी।

अमित ने पिछले हार का बदला चुकता किया

भारतीय स्टार मुक्केबाज अमित पंघाल ने पिछले राष्ट्रमंडल खेलों के फाइनल में मिली हार का बदला चुकता करते हुए पुरूष फ्लाईवेट वर्ग में जबकि नीतू गंघास ने पदार्पण में ही दबदबा बनाते हुए रविवार को स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाले। पंघाल (48-51 किग्रा) को चार साल पहले गोल्ड कोस्ट में इंग्लैंड के ही एक प्रतिद्वंद्वी से इसी चरण में हार मिली थी, लेकिन इस बार 26 साल के मुक्केबाज ने अपनी आक्रामकता के बूते घरेलू प्रबल दावेदार मैकडोनल्ड कियारान को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। पंघाल काफी तेजी से मुक्के जड़ रहे थे जिससे इस दौरान मैकडोनल्ड के आंख के ऊपर एक कट भी लग गया जिसके लिये उन्हें टांके लगवाने पड़े और खेल रोकना पड़ा। अपनी लंबाई का इस्तेमाल करते हुए मैकडोनल्ड ने तीसरे राउंड में वापसी की कोशिश की लेकिन एशियाई खेलों के चैम्पियन ने उनके सभी प्रयास नाकाम कर दिये। पंघाल ने सेमीफाइनल में जाम्बिया के तोक्यो ओलंपियन पैट्रिक चिनयेम्बा के खिलाफ वापसी करते हुए जीत दर्ज की थी जो उनके लिये ‘टर्र्निंग प्वाइंट’ रही।

नीतू ने बॉक्सिंग में जीता पहला गोल्ड

वहीं सबसे पहले रिंग में उतरी नीतू ने महिलाओं के मिनिममवेट (45-48 किग्रा) वर्ग के फाइनल में विश्व चैम्पियनशिप 2019 की कांस्य पदक विजेता रेस्जटान डेमी जेड को सर्वसम्मत फैसले में 5-0 से पराजित किया। राष्ट्रमंडल खेलों में पदार्पण में ही नीतू ने गजब का आत्मविश्वास दिखाया और फाइनल में भी वह इसी अंदाज में खेली जैसे पिछले मुकाबलों में खेली थीं। मेजबान देश की प्रबल दावेदार के खिलाफ मुकाबले का माहौल 21 साल की भारतीय मुक्केबाज को भयभीत कर सकता था लेकिन वह इससे परेशान नहीं हुईं।

नीतू अपनी प्रतिद्वंद्वी से थोड़ी लंबी थीं जिसका उन्हें फायदा मिला, उन्होंने विपक्षी के मुक्कों से बचने के लिये पैरों का अच्छा इस्तेमाल किया। उन्होंने पूरे नौ मिनट तक मुकाबले के तीनों राउंड में नियंत्रण बनाये रखा और विपक्षी मुक्केबाज के मुंह पर दमदार मुक्के जडऩा जारी रखते हुए उसे कहीं भी कोई मौका नहीं दिया।


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