बन गया नया इतिहास- बेजोस की टीम अंतरिक्ष से सुरक्षित लौटी

बन गया नया इतिहास- बेजोस की टीम अंतरिक्ष से सुरक्षित लौटी
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वेस्ट टेक्सास (एजेंसी)। अंतरिक्ष यात्रा का नया इतिहास रच दिया गया है। जेफ बेजोस की स्पेस कंपनी ब्लू ओरिजिन का रॉकेट न्यू शेफर्ड 4 यात्रियों के साथ अंतरिक्ष की यात्रा पर निकला। इसकी लॉन्चिंग शाम 6.45 बजे वेस्ट टेक्सास के ब्लू ओरिजिन लॉन्च साइट वन से की गई। कैप्सूल ने चारों अंतरिक्षयात्रियों को जीरो ग्रैविटी का आनंद करीब 4 मिनट तक दिलाया। उसके बाद वह अब नीचे की ओर उतरने लगा। टीम सुरक्षित शाम 6.52 मिनट पर लौट आई। कैप्सूल से निकलने के बाद जेफ बेजोस ने वैली फंक को जोर से गले लगाया। इसके बाद जेफ ने कहा कि ये मेरे जीवन का सबसे बेहतरीन दिन था।

जेफ ने यह यात्रा न्यू शेफर्ड कैप्सूल में बैठकर 11 मिनट में पूरी की। उनके साथ तीन और यात्री भी थे। इस लॉन्च को जानबूझकर 20 जुलाई को रखा गया क्योंकि इसी दिन अपोलो 11 ने चांद पर लैंडिंग की थी। अपोलो 11 की लैंडिंग की यह 52वीं वर्षगांठ है।

न्यू शेफर्ड कैप्सूल में जेफ के साथ उनके भाई मार्क बेजोस, 82 वर्षीय पूर्व नासा एस्ट्रोनॉट वैली फंक और 18 साल के ओलिवर भी साथ थे। न्यू शेफर्ड कैप्सूल पूरी तरह से ऑटौमैटिक है। इसने अपने अंदर 6 पैसेंजर को बिठाकर अंतरिक्ष की यात्रा कराई। इसे मंगलवार की शाम करीब 6।30 बजे वेस्ट टेक्सास से लॉन्च किया गया। लॉन्च होने के बाद यह 110 किलोमीटर की ऊंचाई तक गया। कैप्सूल से रॉकेट पहले ही अलग हो गया और सुरक्षित तरीके से वापस लैंड हो गया। जबकि, कैप्सूल कुछ मिनटों तक अंतरिक्ष की सीमा तक जाकर वापस पैराशूट के सहारे नीचे लैंड हुआ।

न्यू शेफर्ड रॉकेट और कैप्सूल का नाम 1961 के एस्ट्रोनॉट एलन शेफर्ड के नाम पर रखा गया है। एलन शेफर्ड अंतरिक्ष में पहुंचने वाले पहले अमेरिकी नागरिक थे। न्यू शेफर्ड कैप्सूल में पायलट नहीं था, क्योंकि यह यान पूरी तरह से ऑटोमैटिक है। इसका कंट्रोल जमीन पर बनाए गए मास्टर कंट्रोल सेंटर से था। लेकिन लॉन्च के बाद इसमें किसी भी तरह का कमांड देने की जरूरत नहीं थी। कैप्सूल 6 एस्ट्रोनॉट्स के लिए बनाया गया था लेकिन फिलहाल इसमें 4 ही लोग अंतरिक्ष में गए।

लॉन्च होने के 2 मिनट में न्यू शेफर्ड रॉकेट आवाज से 3 गुना रफ्तार से अंतरिक्ष की ओर बढ़ा। यानी यह रॉकेट 1029 मीटर प्रति सेकेंड की गति से ऊपर बढ़ा। मतलब 3704 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से स्पेस की ओर गया। इसके एक मिनट बाद बूस्टर यानी रॉकेट अपने कैप्सूल से अलग हो गया। कैप्सूल उस ऊंचाई पर पहुंच गया, जहां ग्रैविटी नहीं थी। यहां चारों एस्ट्रोनॉट्स ने जीरो ग्रैविटी फील की।

कुछ मिनट अंतरिक्ष में बिताने के बाद न्यू शेफर्ड  कैप्सूल करीब 9 मिनट बाद धरती पर लौटा। उस समय उसकी रफ्तार तेजी से कम करने के लिए पैराशूट खोले गए। उस समय 26 किलोमीटर प्रति घंटे की गति थी। लेकिन पैराशूट खुलने के बाद यह स्पीड कम होकर 1।6 किलोमीटर हो गई। इसी धीमी रफ्तार में कैप्सूल ने जमीन पर लैंड किया। इस लैंडिंग और टेकऑफ को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे क्योंकि यह पहली बार हो रहा था कि अंतरिक्ष का कोई मिशन पूरी तरह से ऑटोमैटिक हो रहा था। (शेष पेज 8 पर)


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