‘कांग्रेस मुक्त भारत’ विजन के साथ जयपुर आएंगे नड्डा-शाह, 20-21 मई को राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक रखी

Nadda-Shah will come to Jaipur with the vision of 'Congress Mukt Bharat', held a meeting of national office bearers on May 20-21
Share

जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। भाजपा ने 20 और 21 मई को राजस्थान की राजधानी जयपुर में राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक रखी है। राजस्थान में राजनीतिक चिंतन का यह फैसला पार्टी ने बहुत सोच-समझकर लिया है। 13 से 15 मई तक उदयपुर में होने वाले कांग्रेस चिंतन शिविर को देखकर भाजपा ने अपनी राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक नहीं रखी है। बल्कि ‘कांग्रेस मुक्त’ भारत बनाने की रणनीति के तहत बीजेपी तेजी से काम कर रही है। सुनने में भले ही यह बीजेपी का नारा या चुनावी जुमलेबाजी लगी, लेकिन इससे कांग्रेस के लिए गंभीरता कम नहीं होती है। हाल ही पंजाब में ‘आप’ के हाथों हार के बाद देश के केवल 2 ही राज्यों राजस्थान और छत्तीसगढ़ में अब कांग्रेस पार्टी की सरकारें बची हैं। इन दोनों राज्यों में अगले साल 2023 में विधानसभा चुनाव हैं।

नड्डा-शाह समेत 150 पदाधिकारी आएंगे जयपुर

सूत्रों की माने तो जयपुर में बीजेपी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में केवल सीमित संख्या में वरिष्ठ नेताओं को बुलाया गया है। इनकी संख्या 150 रहेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेशों के प्रभारी, सह-प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और प्रदेश संगठन महासचिव व्यक्तिगत रूप से जयपुर आएंगे। जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वर्चुअल वीडियो कांफ्रेंस का प्रोग्राम बन रहा है। 20 और 21 मई को एक 5 सितारा होटल में सुबह 10 से देर शाम तक बैठकों का दौर चलेगा।

सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक के बाद 21 मई को प्रदेश प्रभारियों, प्रदेश अध्यक्षों और प्रदेश संगठन महासचिवों की भी बैठक होगी। चुनावी राज्यों से संगठन की गतिविधियों और विधानसभा सीटों की एनालिसिस रिपोर्ट मांगी गई है। राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक की तैयारी के लिए प्रदेश बीजेपी मुख्यालय पर 15 मई को बीजेपी कोर कमेटी की बैठक भी बुलाई गई है।

राजस्थान विधानसभा चुनाव तैयारी पर पूरा फोकस

इस साल गुजरात और हिमाचल में विधानसभा चुनाव हैं। 2023 में 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। इनमें राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम शामिल हैं। सभी राज्यों में अभी से प्रवासी वोट बैंक साधने के तहत अलग-अलग प्रदेशों के नेताओं के प्रवास और दौरे शुरु हो गए हैं। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया हाल ही में गुजरात, कर्नाटक में प्रवासी सम्मेलन करके लौटे हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार होने के कारण इन पर पार्टी का ज्यादा फोकस है। राजस्थान में विधानसभा चुनाव की तैयारी की गम्भीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले दो महीने में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का प्रदेश में तीसरा दौरा होगा। अप्रैल में सवाई माधोपुर दौरे के बाद 10 और 11 मई को जेपी नड्डा हनुमानगढ़, सूरतगढ़ और गंगानगर प्रवास और संगठनात्मक दौरे पर आ रहे हैं। इसके बाद जयपुर में राष्ट्रीयपदाधिकारियों की बैठक का तीसरा मौका होगा। जयपुर की बैठक में राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्यों में दलित और आदिवासी बाहुल्य सीटों का वोट बैंक साधने के लिए बीजेपी अबकी बार खास रणनीति तैयार करेगी। इसके तहत दलित और आदिवासी मुद्दों और इस कैटेगरी के नेताओं को पार्टी में पूरी तवज्जो दी जाएगी।

राजस्थान में चुनावी चेहरा बैठक से होगा साफ

राजस्थान बीजेपी में जिस तरह अलग-अलग सीएम फेस की दौड़ चल रही है। उसे देखते हुए भाजपा आलाकमान भी कई बार साफ कर चुका है कि पार्टी सर्वोपरि है व्यक्तित्व नहीं। पीएम नरेन्द्र मोदी के फेस और चुनाव चिन्ह ‘कमल के फूल’ पर विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा। पार्टी संगठन ही प्रत्याशियों के टिकट तय करेगी। राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक के बाद राजस्थान के नेताओं को पार्टी की चुनावी तस्वीर और चेहरा साफ हो जाएगा।

साम्प्रदायिक तनाव, हिन्दुत्व, तुष्टीकरण, दलित, आदिवासी, महिला अत्याचार मुद्दे

राजस्थान में पिछले कुछ दिनों में हुई साम्प्रदायिक घटनाओं, हिंसा, उपद्रव, हिन्दुत्व और बहुसंख्यकों से जुड़े मुद्दे, तुष्टीकरण, दलित, आदिवासी और महिला अत्याचार, अपराध जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भी बैठक में चर्चा होगी। इन मुद्दों को बीजेपी राष्ट्रीयस्तर पर चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ मुद्दा बनाएगी। बैठक के आखिर में एक राजनीतिक प्रस्ताव पारित किया जा सकता है। साथ ही प्रेसवार्ता कर बैठक की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

‘गुजरात मॉडल’ पर पन्ना प्रमुख करेंगे वोट का माइक्रो मैनेजमेंट

राजस्थान विधानसभा चुनाव-2023 बीजेपी गुजरात मॉडल की तर्ज पर लड़ेगी। इसमें बिना किसी चेहरे के माइक्रो मैनेजमेंट से चुनाव जीतने की स्ट्रेटेजी अपनाई जाएगी। यह प्रयोग गुजरात के अलावा हाल ही में हुए उत्तरप्रदेश चुनाव में भी कामयाब रहा है। इसमें वोटों के माइक्रो मैनेजमेंट की सबसे बड़ी जिम्मेदारी पार्टी के ‘पन्ना प्रमुख’ पर रहेगी। यह पन्ना प्रमुख केन्द्रीय मंत्री,पार्टी प्रदेशाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, उप नेता प्रतिपक्ष, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य से लेकर विधायक, मोर्चों, प्रकोष्ठों, प्रकल्पों के पदाधिकारियों से लेकर बूथ लेवल कार्यकर्ताओं तक सभी रहेंगे।

राजस्थान में बीजेपी के 52 हजार बूथों पर लगभग 11 लाख पन्ना प्रमुख चुनाव कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज पार्टी को वोट दिलाएगी। हर पन्ना प्रमुख को 60 वोटर्स की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। दिलचस्प बात यह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बूथों की संख्या के लिहाज से केवल औसत 3.42 वोट से कांग्रेस से पिछड़कर सत्ता खोनी पड़ी थी।


Share