अंतरिक्ष को उपग्रहों से पाटने में जुटे मस्क, अब तक छोड़े 2000 सैटेलाइट

Musk engaged in bridging the space with satellites, left 2000 satellites so far
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वॉशिंगटन (एजेंसी)। मंगल ग्रह पर शहर बसाने का सपना देख रहे स्पेसएक्स कंपनी के मालिक एलन मस्क पूरे अंतरिक्ष को अपने स्टारलिंक उपग्रहों से पाटने में जुट गए हैं। मस्क की कंपनी ने अब तक 2000 उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़े हैं। एलन मस्क की योजना कुल 42 हजार उपग्रहों को अंतरिक्ष में छोडऩे की है। मंगलवार को फाल्कन 9 रॉकेट की मदद से स्पेसएक्स ने 49 स्टारलिंक उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़े हैं। इन उपग्रहों की मदद से एलन मस्क पूरी दुनिया में इंटरनेट सेवा शुरू करने जा रहे हैं।

स्पेसएक्स ने 49 सैटलाइट के सफलतापूर्व लॉन्च किए जाने ट्विटर पर ऐलान किया। बताया जा रहा है कि प्रत्येक स्टारलिंक सैटलाइट आकार में एक टेबल की तरह से है। फवरी 2018 में शुरूआत होने के बाद अब तक 2,042 सैटलाइट अंतरिक्ष में लॉन्च किए जा चुके हैं। इनमें से कई खराब भी हो गए हैं। स्टारलिंक उपग्रहों का एक समूह है जिसका उद्देश्य दुनिया के ज्यादातर हिस्से में इंटरनेट की आपूर्ति करना है। इसमें खासतौर पर ग्रामीण इलाके हैं जहां पर अभी तक तेज गति वाला इंटरनेट नहीं पहुंचा है।

42 हजार तक हो सकता है स्टारलिंक उपग्रहों का समूह

दुनिया के 23 देशों में अबतक एलन मस्क ने प्रायोगिक तौर पर इंटरनेट सेवा शुरू कर दी है। एलन मस्क का अनुमान है कि अगली पीढ़ी स्टारलिंक उपग्रहों का समूह 42 हजार तक हो सकता है जो धरती की निचली कक्षा में रहेंगे। स्पेस एक्स के पास अगले कुछ साल में 12000 स्टारलिंक सैटलाइट भेजने की इजाजत है। वहीं, 42 हजार सैटलाइट का सिस्टम तैयार करने के लिए उसे संयुक्त राष्ट्र के इंटरनैशनल टेलिकम्यूनिकेशन यूनियन से इजाजत की उम्मीद है। माना जा रहा है कि जिस स्पीड से कंपनी मिशन लॉन्च कर रही है, उससे इस साल तक कंपनी की कुल सैटलाइट 50′ तक पहुंच सकती हैं। यही नहीं, फिजिसिस्ट और पूर्व ऐस्ट्रोनॉमर अलेस्टर आइजक के मुताबिक दुनियाभर में होने वाले रॉकेट लॉन्च का 20′ स्पेस एक्स में होता है। इसमें से सबसे ज्यादा स्टारलिंक के लिए होते हैं जबकि कुछ दूसरे ग्राहकों और इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन पर क्रू या कार्गो भेजने के लिए।

भारत समेत दुनिया के एक ट्रिल्यन बाजार पर मस्क की नजर

एलन मस्क की नजर अब भारत समेत पूरी दुनिया की टेलिकॉम इंडस्ट्री पर है। स्पेस एक्स ने निवेशकों से कहा है कि स्टारलिंक की नजर इन-फ्लाइट इंटरनेट, मैरिटाइम सर्विसेज, भारत और चीन में डिमांड और रूरल कस्टमर्स पर है। यह पूरा बाजार एक ट्रिलियन डॉलर का है। स्पेसएक्स स्टारलिंक प्रॉजेक्ट के जरिए पूरी दुनिया में इंटरनेट सेवा देने की योजना बना रही है। अब एलन मस्क 100 एमबीपीएस सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सेवा के जरिए तेजी से बढ़ रही भारतीय टेलीकम्युनिकेशन इंडस्ट्री में अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं। एलन मस्क ने भारत सरकार को देश में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट देने की अनुमति देने का अनुरोध भी किया है। ट्राई ने भारत में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल अगस्त में एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया था। इसके जवाब में स्पेसएक्स की सैटेलाइट गवर्नमेंट अफेयर्स पैट्रीशिया कूपर ने कहा कि स्टारलिंक के हाई स्पीड सैटेलाइट नेटवर्क से भारत के सभी लोगों को ब्रॉडबैंक कनेक्टिविटी से जोडऩे के लक्ष्य में मदद मिलेगी।


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