10 लाख किमी यात्रा करने वाले ‘आईएनएस विराट के लोहे से बनेंगी मोटरबाइक्स

10 लाख किमी यात्रा करने वाले 'आईएनएस विराट के लोहे से बनेंगी मोटरबाइक्स
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नई दिल्ली (एजेंसी)। दुनिया के सबसे पुराने सेवारत विमान वाहक और 1982 में फॉकलैंड युद्ध के दौरान ब्रिटेन के प्रमुख ध्वज-पोत के लोहे का उपयोग मोटरबाइक्स बनाने के लिए किया जा सकता है। नीलामी में इस विमान वाहक को खरीदने वाली कंपनी ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी है।

श्रीराम ग्रुप ने कहा कि उसने इस विशाल विमान वाहक को नीलामी में खरीद लिया और इसे पूरी तरह तोड़कर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदलने में एक साल का वक्त लगेगा। श्रीराम ग्रुप के पास एशिया का सबसे बड़ा स्क्रैपयार्ड है, जो गुजरात के अलंग में स्थित है।

इस विमान वाहक ने ब्रिटेन की रॉयल नेवी में साल 1959 में दस्तक दी और उसे ‘एचएमएस हरमीज का नाम दिया गया। इस विमान वाहक की नींव 1944 में रखी गई। इसे 1986 में भारतीय नौसेना को बेच दिया गया और इसे ‘आईएनएस विराटÓ का नाम दिया गया। इसने नौसेना को 29 साल तक अपनी सेवा दी।

विराट का संस्कृत में अर्थ होता है ‘विशालÓ। आईएनएस विराट को 2017 में सेवानिवृत्त कर दिया गया। 29 साल की अपनी सेवा के दौरान इसने 10 लाख किलोमीटर (7,00,000 मील) से अधिक की दूरी को कवर किया, जो पृथ्वी के 28 बार चक्कर लगाने के बराबर है।

1987 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अपने परिवार और दोस्तों के साथ इस जहाज का प्रयोग अरब सागर में एक दूरस्थ उष्णकटिबंधीय द्वीप पर छुट्टी मनाने के लिए किया था।

2017 में इस जहाज को विदाई समारोह दिया गया और फैसला किया गया कि जहाज को अस्थायी संग्रहालय और होटल में बदला जाएगा, लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली। वहीं, अब इसके लोहे का प्रयोग दूसरे कार्यों में किया जाएगा।

श्रीराम ग्रुप के चैयरमेन मुकेश पटेल ने कहा, एक बार जहाज जब अलंग पहुंच जाएगा, तो हमें इसे तोड़कर टुकड़े करने में 9-12 महीने लगेंगे और फिर हम इससे लागत वसूलने के लिए इसे लोहे के रूप में बेच देंगे। उन्होंने कहा, युद्धपोत के लोहे का उपयोग करके बाइक बनाने के लिए हमसे दो मोटरसाइकिल निर्माताओं ने संपर्क किया है, लेकिन अभी तक कुछ भी तय नहीं किया गया है।


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