मोदी सरकार ने किसानों को दिया बड़ा तोहफा

मोदी सरकार ने किसानों को दिया बड़ा तोहफा
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नई दिल्ली (एजेंसी)। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों को मानते हुए मोदी सरकार ने रबी की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि करने का फैसला कर लिया है।  बता दें कि सोमवार सुबह ही प्रधानमंत्री ने ये साफ कर दिया था कि एमएसपी पहले की ही तरह चलने वाली है। किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर चल रही मोदी सरकार ने कृषक उत्पादों की बिक्री के लिए राज्यों के कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) कानून के तहत संचालित मंडियों के अलावा एक वैकल्पिक चैनल मुहैया करने के लिए नया कानून बनाया है। न
ये कानून में गेहूं, चावल या अन्य मोटा अनाज, दालें, तिलहन, खाद्य तेल, शाक-सब्जी, फल, मेवा, मसाले, गन्ना और कुक्कुट, सूअर, बकरी, मछली और डेरी उत्पाद सहित ऐसे खाद्य पदार्थ, जिनका नैसर्गिक या प्रसंस्कृत रूप में मानव उपभोग करता है, उनको कृषक उत्पाद कहा गया है।

समर्थन मूल्य क्यों?

केंद्र सरकार कृषि लागत और मूल्य आयोग की सिफारिश पर कुछ फसलों के बुवाई सत्र से पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करती है। इससे किसानों को यह सुनिश्चित किया जाता है कि बाजार में उनकी फसल की कीमतें गिरने के बावजूद सरकार उन्हें तय मूल्य देगी। इसके जरिए सरकार उनका नुकसान कम करने की कोशिश करती है।

क्यों जरूरी है एमएसपी?

हालांकि, सभी सरकारें किसानों को इसका लाभ नहीं देतीं। इस वक्त बिहार और मध्य प्रदेश में सबसे बुरा हाल है, जहां किसानों को एमएसपी नहीं मिल पा रहा है। वैसे भी शांता कुमार समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि महज 6 फीसदी किसानों को ही एमएसपी का लाभ मिलता है। यानी 94 फीसदी किसान मार्केट पर डिपेंड हैं।


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