पुरूषों और डायबिटीज मरीजों को ब्लैक फंगस का खतरा सबसे ज्यादा – डॉक्टरों की स्टडी में खुलासा

ब्लैक फंगस vs व्हाइट फंगस
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नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत में कोरोना संकट के बीच ब्लैक फंगस यानी म्यूकोर्मिकोसिस के बढ़ते मामले ने केंद्र और राज्य सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। चार भारतीयों द्वारा जल्द ही प्रकाशित होने वाले एक अध्ययन के अनुसार, पुरूषों में म्यूकोर्मिकोसिस से संक्रमित होने की संभावना अधिक होती है।

डॉक्टरों ने एक दुर्लभ लेकिन गंभीर फंगल संक्रमण, म्यूकोर्मिकोसिस से संक्रमित कोरोना रोगियों के 101 मामलों का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि संक्रमितों में 79 पुरूष थे। डायबिटीज को सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक के रूप में पाया गया। जिसमें 101 में से 83 डायबिटीज से पीडि़त थे।

कोलकाता में जीडी अस्पताल और डायबिटीज संस्थान से डॉ. अवधेश कुमार सिंह और डॉ रितु सिंह, मुंबई में लीलावती अस्पताल से डॉ. शशांक जोशी और नई दिल्ली में राष्ट्रीय डायबिटीज, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल फाउंडेशन से डॉ. अनूप मिश्रा ने एक साथ 101 रोगियों का अध्ययन किया, जिसमें 82 भारत से थे, 9 अमेरिका से और 3 ईरान से।

बता दें कि कोविड-19 से संबंधित म्यूकोर्मिकोसिस एक गंभीर बीमारी बन गई है, जिसमें अब तक सबसे अधिक मौतें (90) महाराष्ट्र से हुई हैं।

अध्ययन में 101 में से 31 लोगों की मौत फंगल संक्रमण के कारण हुई। डेटा से पता चला है कि म्यूकोर्मिकोसिस विकसित करने वाले 101 व्यक्तियों में से 60 में सक्रिय कोविड -19 संक्रमण था और 41 ठीक हो गए थे। साथ ही, 101 में से 83 लोगों को डायबिटीज था, वहीं 3 को कैंसर था।

शशांक जोशी, जो एक एंडोक्रिनोलॉजिस्ट भी हैं, ने कहा कि उन्होंने अध्ययन किया कि कोरोना के लिए म्यूकोर्मिकोसिस के रोगियों का क्या उपचार किया गया। कुल 76 रोगियों में एक इम्यूनोसप्रेसेन्ट के रूप में उपयोग किए जाने वाले कॉर्टिकोस्टेरॉइड का इतिहास था। 21 को रेमेडिसविर और 4 टोसीलिजुमैब दिए किए गए थे।

एक मामले में, डायबिटीज से पीडि़त मुंबई के एक 60 वर्षीय व्यक्ति को स्टेरॉयड और टोसीलिजुमैब दोनों दिए गए। फंगल इंफेक्शन के कारण उनकी मौत हो गई। लेकिन मुंबई में एक 38 वर्षीय व्यक्ति बिना डायबिटीज के बच गया। अध्ययन में कोविड -19 के साथ डायबिटीज रोगियों में मृत्यु और गंभीरता का संबंध अधिक पाया गया।

म्यूकोर्मिकोसिस नाक, साइनस, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, फेफड़े, जठरांत्र संबंधी मार्ग, त्वचा, जबड़े की हड्डियों, जोड़ों, हृदय और गुर्दे को प्रभावित कर सकता है। अध्ययन से पता चला है कि ज्यादातर मामलों में, 89 से अधिक, नाक और साइनस में फंगल का संक्रमण पाया गया था। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि कोविड-19 श्वसन तंत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि कम ऑक्सीजन (हाइपोक्सिया), उच्च ग्लूकोज, अम्लीय माध्यम और इम्यूनोसप्रेसेन्ट्स के उपयोग के कारण सफेद रक्त कोशिकाओं की गतिविधि में कमी के आदर्श वातावरण में कोविड -19 वाले लोगों में फगस म्यूकोरालेस बीजाणु फैल रहे हैं। इसमें कहा गया है कि जहां इस फंगल संक्रमण का वैश्विक प्रसार प्रति मिलियन जनसंख्या पर 0.005 से 1.7 है, वहीं भारत में डायबिटीज की आबादी अधिक होने के कारण यह 80 गुना अधिक है।


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