एमएसपी से कम पर खरीद को अपराध बनाएं

एमएसपी से कम पर खरीद को अपराध बनाएं
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नई दिल्ली (एजेंसी)। संसद में कृषि विधेयकों के पास होने के बावजूद देशभर में किसान और राजनीतिक संगठन इसके विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। केंद्र की एनडीए सरकार में भाजपा के साथ शामिल शिरोमणी अकाली दल पहले ही इस विधेयक पर समर्थन से इनकार कर चुका है। शिअद की ओर से हरसिमरत कौर बादल ने मंत्री पद से इस्तीफा तक दे दिया था। अब बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जदयू ने भी इस विधेयक पर अपना दांव चला है। जदयू नेता केसी त्यागी ने कृषि विधेयकों के संसद में पास होने का स्वागत किया है, लेकिन उन्होंने मांग की है कि केंद्र को किसानों की बात मानते हुए ऐसा कानून बनाना चाहिए, जिससे फसल खरीद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम रकम चुकाने को अपराध करार दिया जाए।

राज्यसभा सांसद और जदयू के प्रमुख महासचिव केसी त्यागी ने कहा, हम संसद में कृषि विधेयकों के पारित होने का स्वागत करते हैं। हमारी पार्टी ने इन विधेयकों का समर्थन किया था। लेकिन हम किसानों की उस मांग का भी समर्थन करते हैं कि सरकार को कानून बनाना चाहिए, जिससे कोई भी उनसे एमएसपी से कम दाम पर फसल न खरीद पाए। इसके उल्लंघन को दंडात्मक अपराध बना देना चाहिए। जब त्यागी से पूछा गया कि क्या नीतीश कुमार के अंतर्गत जदयू ने केंद्र से आधिकारिक तौर पर यह मांग की है, तो उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री ने सुनिश्चित किया है कि एमएसपी आगे भी जारी रहेगी। जब त्यागी से पूछा गया कि नए कानून में एमएसपी का जिक्र क्यों नहीं किया गया, तो उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री ने संसद में इसका भरोसा दिया है, इसका उल्लंघन अवमानना का मामला बन सकता है।

जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी निभा रहे केसी त्यागी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कर दिया है कि पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम के तहत खरीद की व्यवस्था पहले जैसे ही जारी रहेगी। बिहार का बांका जिला एमएसपी पर धान की खरीद शुरू करेगा। त्यागी ने कृषि विधेयकों पर अपनी सरकार के कदमों का समर्थन करते हुए कहा कि बिहार ने 2006 में एपीएमसी ऐक्ट इसलिए वापस ले लिया, क्योंकि इसके चलते बिचौलियों का हस्तक्षेप बढ़ गया था और इससे किसानों को नुकसान हो रहा था।

राज्यसभा में विपक्ष की ओर से हुए हंगामे और आठ सांसदों के निलंबित होने के सवाल पर त्यागी ने कहा, राज्यसभा के उपसभापति (हरिवंश) ने सदन की रूलबुक के आधार पर ही कार्यवाही चलाई, इसमें कहा गया है कि वे चाहे तो वोटिंग कराएं या बिना इसके ही विधेयक को पास करा दें। दूसरी तरफ एनडीए के पास इस मुद्दे पर राज्यसभा में बहुमत भी था।


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