अंतिम सफर तक हमसफर के साथ रहीं मधुलिका रावत

Madhulika Rawat stayed with Humsafar till the last journey
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नई दिल्ली (एजेंसी)। देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत की बुधवार को एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई। संयोग या दुर्योग कहें, लेकिन इस विमान यात्रा में उनकी पत्नी मधुलिका रावत भी उनके साथ थीं। वो भी पति के साथ ही अपनी अंतिम यात्रा पर विदा हो गई। मौत ने भले मधुलिका के साथ धोखा किया और कम उम्र में ही उन्हें अपनी आगोश में ले लिया, लेकिन जिंदगी ने अंतिम समय में भी उनका साथ दिया। जीवन के हर कदम पर अपने पति का साथ देने वाली मधुलिका अपनी अंतिम यात्रा में भी अपने हमसफर के साथ रहीं।

जनरल विपिन रावत की पत्नी मधुलिका मध्य प्रदेश में शहडोल जिले के सोहागपुर में पैदा हुई थीं। उनके पिता कुंवर मृगेंद्र सिंह राजनीति में सक्रिय थे और दो बार विधायक भी रहे थे। मृगेंद्र सिंह रीवा घराने से ताल्लुक रखते हैं। शहडोल में अब भी उनका महलनुमा घर है जहां उनका परिवार रहता है।

मधुलिका की शुरूआती पढ़ाई शहडोल में ही हुई। जब वे चौथी क्लास में थीं, तब उन्हें पढ़ाई के लिए ग्वालियर के मशहूर सिंधिया गर्ल्स स्कूल भेज दिया गया। उन्होंने यहीं से बरहवीं तक की शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन की डिग्री ली।

साल 1986 में मधुलिका की शादी बिपिन रावत से हुई थी। उस समय वे सेना में कैप्टन के पद पर थे। शादी के बाद शुरूआती दिनों में वे पति से अलग रहीं। इसका कारण बिपिन रावत का सैनिक मन था। जनरल रावत की पोस्टिंग उन दिनों बॉर्डर पर थी। उन्हें लगता था कि परिवार को साथ रखने से वे अपनी जिम्मेदारियां निभाने में कमजोर पड़ जाएंगे। इसलिए उन्होंने बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी मधुलिका पर छोड़ दी और खुद देश सेवा में लगे रहे।

जनरल रावत और मधुलिका की दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी कृतिका रावत है, जिनकी शादी मुंबई में हुई है। छोटी बेटी तारिणी अभी पढ़ाई कर रही हैं। वे दिल्ली में अपने माता-पिता के साथ ही रहती थीं।

सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय

पति की तमाम व्यस्तताओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद मधुलिका सामाजिक गतिविधियों में काफी सक्रिय रहती थीं। वे कई सामाजिक संगठनों से जुड़ी थीं। पारिवारिक आयोजनों में भी वह बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। मधुलिका के भाई यशवर्धन सिंह ने बताया कि जनरल विपिन रावत सेना प्रमुख बनने के बाद एक बार इंदौर आए थे। इसकी वजह मधुलिका का एक बच्ची से किया वादा था। यशवर्धन सिंह की बेटी इंदौर के डेली कॉलेज में पढ़ती थीं और शूटिंग में एक्टिव थीं। मधुलिका ने उससे वादा किया था कि गोल्ड मेडल मिलने पर वह उससे मिलने स्कूल में आएंगी। बच्ची को जब स्कूल में गोल्ड मेडल मिला, तो मधुलिका जिद कर पति को भी अपने साथ लेकर आईं।

सैनिक परिवारों के कल्याण से जुड़ी थीं मधुलिका

मधुलिका आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की प्रेसिडेंट थीं। इस पद पर रहते हुए उन्होंने सैनिकों की विधवाओं के बेहतर जीवन के लिए काफी काम किया। वे उन्हें टेलरिंग, ब्यूटीशियन, चॉकलेट बनाने जैसे कामों की ट्रेनिंग के लिए प्रोत्साहित करती थीं जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो सकें।


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