श्रीकांत की तरह सूली पर चढ़ाए जाने से बचने विराट ने चुना सचिन वाला रास्ता

Like Srikanth, Virat chose Sachin's path to avoid being crucified
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कोहली का टेस्ट कप्तानी छोडऩा आश्चर्यजनक नहीं, यह तो होना ही था -टी-20 की कप्तानी खुद छोड़ी, कोहली से बीसीसीआई ने छीनी थी वनडे टीम की कमान

नई दिल्ली (एजेंसी)। आखिरकार विराट कोहली ने भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम की कप्तानी छोड़ दी। इस फैसले ने भले ही बहुतों को चौंकाया हो, मगर पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रम से ऐसे ही आसार बन रहे थे। आईसीसी वर्ल्ड टी-20 से शर्मनाक विदाई के बाद विराट का सबसे छोटे फॉर्मेट की कप्तानी छोडऩा पहली कड़ी थी। फिर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने वनडे की कप्तानी से विराट को हटाकर साफ कर दिया कि ‘बॉस’ कौन है। उस वक्त जो बवाल मचा, उस पर तो किताबें लिखी जाएंगी। पॉइंट ये है कि विराट की टेस्ट कप्तानी पर संकट के बादल तो मंडरा ही रहे थे। दक्षिण अफ्रीका में सीरीज हार ने उन बादलों को और घना कर दिया। इससे पहले कि बोर्ड वनडे की तरह टेस्ट टीम की कप्तानी विराट से छीनता, उन्होंने खुद ही कह दिया, ‘अब मेरे लिए रूकने का समय है।‘

विराट और बोर्ड के बीच कुछ भी ठीक नहीं!

विराट और बीसीसीआइ के बीच कई महीनों से खींचतान चल रही है। ताजा उदाहरण से समझिए। विराट कोहली शनिवार शाम 6.44 बजे ट्वीट करके कप्तानी छोडऩे की जानकारी देते हैं। बीसीसीआई के आधिकारिक हैंडल से 6.53 बजे ट्वीट करके विराट को बधाई दी जाती है। बताया जाता है कि कैसे विराट की कप्तानी में भारत ने 68 टेस्ट में से 40 में जीत दर्ज की। शाम 7.07 बजे बीसीसीआई सचिव जय शाह ट्वीट करते हैं। कहते हैं कि विराट ने टीम को एक निर्मम फिट यूनिट में बदल दिया जिसने भारत और विदेश, दोनों जगह परफॉर्म किया। बोर्ड के चीफ सौरभ गांगुली की तरफ से कुछ नहीं कहा गया।

गांगुली और विराट के बीच अनबन की खबरें वनडे टीम की कप्तानी को लेकर मचे बवाल के बीच भी आई थीं। खैर, गांगुली ने तारीख बदल जाने के बाद बयान जारी किया। उन्होंने जो ट्वीट किया, उससे और जाहिर हो गया कि मनमुटाव तो जरूर है। बीसीसीआई अध्यक्ष ने लिखा कि टेस्ट टीम की कप्तानी छोडऩा विराट का ‘निजी फैसला’ था और बीसीसीआई  उसका बहुत सम्मान करता है।

श्रीकांत जैसा हश्र नहीं चाहते होंगे विराट

कोहली को यह अहसास तो हो ही गया होगा कि ज्यादा दिन तक टेस्ट की कप्तानी भी उनके पास रहने वाली नहीं है। जेहन में कुछ-कुछ कृष्णामाचारी श्रीकांत भी होंगे। 1989 में कप्तान बनाए गए श्रीकांत भी विराट की तरह प्रयोगों से कभी नहीं हिचकते थे। पाकिस्तान दौरे पर उनकी कप्तानी में टीम सारे टेस्ट ड्रॉ कराने में सफल रही मगर सिलेक्टर्स का मूड अलग ही था। बैटिंग में फेल बताकर श्रीकांत को ड्रॉप कर दिया गया। यह एपिसोड बीसीसीआई के सबसे विवादित अध्यायों में से एक है।

विराट की बल्लेबाजी भी दुरूस्त नहीं चल रही है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उन्होंने कुछ अच्छे स्कोर जरूर बनाए मगर शतक का इंतजार बहुत लंबा होता जा रहा है। इस बात की आशंका तो थी कि बीसीसीआई खुद विराट को टेस्ट की कप्तानी से हटा सकता है, जैसा वनडे में किया था। इसलिए विराट कोहली ने ‘महाजनों येन गत: स पंथा’ की तर्ज पर आगे बढऩे का फैसला किया।

सचिन की तरह खुद ही छोड़ दी कप्तानी

विराट ने भारत के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज सचिन तेंडुलकर के रास्ते पर चलने का फैसला किया। 2000 में सचिन ने जब कप्तानी छोडऩे का फैसला किया था तो टीम बुरे दौर में थी। सचिन का अपना प्रदर्शन भी डांवाडोल था।

मगर कप्तानी छोडऩे के बाद अगले 13 साल तक सचिन ने धमाकेदार क्रिकेट खेली। विराट भी कमोबेश 2000 के सचिन वाली स्थिति में थे। वह भी अब बल्लेबाजी पर पूरा फोकस करेंगे। पूर्व क्रिकेटर अंशुमन गायकवाड़ ने कहा भी है कि विराट चाहें तो तेंडुलकर से सीख सकते हैं। गायकवाड़ उस वक्त कोच थे जब सचिन ने कप्तानी छोड़ी। उन्होंने स्पोर्ट्सस्टार से बातचीत में कहा कि तेंडुलकर की तरह कोहली भी इस फैसले से ‘राहत’ महसूस कर रहे होंगे।

विराट ने कप्तानी में नए आयाम गढ़े

विराट टेस्ट जीत सफलता के मामले में दुनिया के तीसरे सबसे सफल कप्तान हैं। उनकी अगुआई में टीम ने 40 टेस्ट जीते। कुल जीत के मामले में सिर्फ ग्रीम स्मिथ (53) और रिकी पॉन्टिंग (48) उनसे आगे हैं। उनकी अगुआई में टीम की जीत का प्रतिशत 58.82 रहा है। कम से कम 20 टेस्ट मैचों में कप्तानी करने वाले कप्तानों की लिस्ट में विराट चौथे सबसे सफल कप्तान हैं। 71.93 पर्सेंट के साथ ऑस्ट्रेलिया के स्टीव वॉ सबसे सफल कप्तान हैं। फिर डॉन ब्रैडमैन (62.50) और रिकी पॉन्टिंग (62.34) का नंबर आता है।

विराट कोहली ने कप्तान रहते हुए 20 टेस्ट शतक लगाए हैं। कप्तान के तौर पर शतक के मामले में सिर्फ ग्रीम स्मिथ (25) उनसे आगे हैं। भारत ने कोहली की कप्तानी में 16 टेस्ट मैच ऐसे जीते जिनमें जीत का अंतर 200 से ज्यादा रनों का रहा। इतनी बार इतने बड़े अंतर से दूसरा कोई कप्तान मुकाबले नहीं जीता।


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