7 साल बाद पांच आरोपियों को उम्रकैद- विक्रम लोट हत्याकांड

7 साल बाद पांच आरोपियों को उम्रकैद- विक्रम लोट हत्याकांड
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उदयपुर. नगर संवाददाता & शहर के अंबामाता थाना क्षेत्र में आपसी कहासुनी के चलते घर में घुसकर दो भाईयों पर तलवार से हमला कर एक की हत्या करने और दूसरे को गंभीर घायल करने के बहुचर्चित मामले में अदालत ने सात साल बाद पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जबकि इस मामले में लिप्त दो अन्य आरोपियों में एक की हत्या हो गई और दूसरे की बीमारी से मौत हो जाने के कारण उनके खिलाफ कार्यवाही ड्रोप कर दी गई।

प्रकरण के अनुसार पुलिस थाना अम्बामाता में 2 नवम्बर, 2015 को मेवाड़ हॉस्पीटल में सुनील लोट ने रिपोर्ट दी कि 1 नवम्बर, 2015 को सायं करीब आठ बजे वह और मेरा भाई विक्रम लोट अपने घर के बाहर खड़े थे तभी प्रकाश, गजेन्द्र, बाबू चनाल, दिलीप, अजय उर्फ बहादुर, राहुल एवं सुरेश चनाल तलवारें लेकर आए और आते ही प्रकाश ने उसके भाई विक्रम पर तलवार से हमला कर दिया। बीच-बचाव करने गया तो गजेन्द्र ने उस पर तलवार से वार किया। ये लोग भागकर घर के अंदर गये छिप गये लेकिन आरोपी घर के अंदर घुस गये और तलवारों से हमला किया। इस दौरान घर की महिलाओं के चिल्लाने पर जीजा दीपक शोर सुनकर बाहर आए, इस दौरान आस-पड़ोस के लोग व अन्य राहगीर भी आ गये जिससे आरोपी मौके से भाग गये। गंभीर घायलावस्था में मेवाड़ हॉस्पीटल ले जाया गया जहां विक्रम की मृत्यु हो गई। इस पर अम्बामाता पुलिस ने सुनील लोट की रिपोर्ट पर आरोपी प्रकाश पुत्र सुंदरलाल छापरवाल (वाल्मिकी), अजय वाल्मिकी उर्फ बहादुर पुत्र सम्पतलाल निवासी गांधीनगर मल्लातलाई अम्बामाता, राहुल पुत्र सुरेश तम्बोली निवासी कोलपोल घंटाघर, बाबूलाल पुत्र रामपाल वाल्मिकी निवासी गांधीनगर कच्ची बस्ती मल्लातलाई, दिलीप पुत्र अशोक नकवाल एवं गजेन्द्र पुत्र प्रकाश छापरवाल (वाल्मिकी) निवासी गांधीनगर के खिलाफ भादसं की धारा 147, 148, 149, 452, 307/302 में रिपोर्ट दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर वारदात में उपयोग में ली हथियार बरामद किये। इनके खिलाफ जांच पूर्ण कर अदालत में आरोप पत्र पेश किया।

मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से विशिष्ठ अपर लोक अभियोजक गोपाल सिंह चौहान ने अपराध सिद्ध करने के लिए अदालत में अभियोजन की ओर से 20 गवाह, 40 दस्तावेज प्रदर्शित किये। साथ ही तर्क दिया कि 1 नवम्बर को 2015 को विक्रम लोट और उसके भाई सनील लोट पर प्रकाश छापरवाल और गजेंद्र छापरवाल सहित 7 लोगों ने हमला कर दिया था।

हमले में विक्रम लोट का हाथ कट गया था। इसके बाद अस्पताल में उसकी मौत भी हो गई थी। अभियोजन पक्ष द्वारा पेश गवाहों ने अभियोजन कहानी का समर्थन किया। वहीं आरोपियों के अधिवक्ताओं द्वारा पेश गवाहों एवं दस्तावेजों के आधार पर भी वे उन्हें निर्दोष सिद्ध नहीं कर सकें। बचाव पक्ष की ओर से इलाज करने वाले चिकित्सक डॉ मनीष छापरवाल को भी पेश किया और उन्होंने बताया कि विक्रम लोट को देरी से अस्पताल लाने की वजह से उसकी मृत्यु हुई है लेकिन अदालत ने इस तर्क को नहीं माना।

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायालय क्रम-4 की पीठासीन अधिकारी ने आरोपी प्रकाश छापरवाल, राहुल तम्बोली, बाबूलाल चनाल, दिलीप नकवाल एवं अजय उर्फ बहादुर को भादसं की धारा 302/149 में उम्रकैद व पचास हजार रुपये, 147 में दो वर्ष कारावास व पांच हजार रुपये, 148 में तीन वर्ष का कारावास व 2 हजार रुपये जुर्माना, 452/149 में पांच वर्ष का कारावास व दो हजार रुपये, धारा 307/149 में दस वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अजय के कब्जे से पुलिस ने हमले में उपयोग में ली तलवार जब्त की इसलिए उसे आम्र्स एक्ट की धारा 4/25 में तीन वर्ष का कारावास और दो हजार रुपये जुर्माने की पृथक से सजा सुनाई गई।

तीन माह बाद ही गजेन्द्र की हत्या

विक्रम लोट की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी गजेन्द्र छापरवाल की तीन माह बाद ही हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड में विक्रम का भाई सुनील लोट व अन्य को आरोपी बनाया गया है जो मामला अदालत में फिलहाल विचाराधीन है।


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