पार्टी छोड़कर बोले अश्विनी कुमार, ‘दर्द समझकर भी समझने को तैयार नहीं कांग्रेस हाईकमान’

Leaving the party, Ashwini Kumar said, 'Congress high command is not ready to understand even after understanding the pain'
Share

अश्विनी कुमार ने 46 साल बाद कांग्रेस छोड़ी -मनमोहन सरकार में कानून मंत्री रहे, गांधी परिवार के करीबी थे

नई दिल्ली (एजेंसी)।  कांग्रेस के सीनियर नेता अश्विनी कुमार ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। करीब 46 साल कांग्रेस में रहे अश्विनी कुमार ने इस्तीफे के बाद कहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव में नतीजे चौंकाने वाले होंगे, क्योंकि वहां कांग्रेस चुनाव हार रही है और आम आदमी पार्टी की सरकार आ रही है।

अश्विनी ने कहा कि देश और समाज की सेवा अगर पार्टी में रहकर नहीं की जा सकती तो पार्टी में रहना बेहतर नहीं है। क्या अश्विनी जितिन प्रसाद, ज्योतिरादित्य सिंधियाऔर आरपीएन सिंह की तरह भाजपा में जाएंगे? इस सवाल पर अश्विनी ने कहा कि उन्होंने अभी कोई फैसला नहीं लिया है, ना ही भाजपा में जाने की बात की है। ना वह किसी नेता के संपर्क में हैं। लेकिन वह क्या फैसला लेंगे, इस पर आने वाले कुछ दिनों में फैसला लेंगे।

जवाब में आगे अश्विनी ने कहा कि भाजपा उनको लिए अछूत पार्टी नहीं है और वह मानते हैं कि देश की हर कमी के लिए प्र.म. मोदी को जिम्मेदार ठहराना भी ठीक नहीं है। अश्विनी कुमार ने कहा कि मेरा हमेशा से मानना है कि विचारों की लड़ाई होनी चाहिए, व्यक्तिगत नहीं। वह बोले कि अब और दम से राजनीति करूंगा और अपनी तकदीर खुद लिखूंगा क्योंकि आज देश को लोगों को जोडऩे वाली राजनीति की जरूरत है।

कांग्रेस पर साधा निशाना

अश्विनी कुमार गांधी परिवार के करीबी थे, तो क्या उन्होंने पार्टी छोडऩे से पहले राहुल, सोनिया से बात की? इस पर उन्होंने कहा कि मैंने किसी से बात नहीं की, क्योंकि मुझे यह ठीक नहीं लगा। वह बोले कि अगर किसी की आहत को कोई समझ नहीं पाता तो उसे कुछ बताने का फायदा नहीं होता।

आगे एक शेर पढ़ते हुए कुमार ने कहा कि इक हिज्र जो हम को लाहक है ता-देर उसे दोहराएं क्या, वो जहर जो दिल में उतार लिया फिर उस के नाज़ उठाएं क्या। वह बोले कि जब फैसला ले ही लिया था तो चर्चा का क्या ही मतलब बनता।

कुमार ने आगे कहा कि सोनिया गांधी के प्रति उनके मन में इज्जत है जो आगे भी रहेगी। लेकिन जब हमारी चिंताएं देखकर जब उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया तो उनको अपना दर्द बताने का क्या फायदा।

‘अंधकार में है नई कांग्रेस का भविष्य’

सोनिया ब्रिगेड, मनमोहन ब्रिगेड, राहुल ब्रिगेड में क्या कुछ फर्क नजर आया? इसपर अश्विनी कुमार ने कहा कि नई कांग्रेस जिसको खड़ा करने की कोशिश हो रही है, उसका भविष्य अंधकार में दिखता है। उसमें कोई सीनियर या जूनियर आए उससे फर्क नहीं पड़ता। कुमार ने कहा कि आने वाले 10-12 सालों में मुझे इस पार्टी का भविष्य अंधकार में ही दिखाई पड़ता है।

क्या राहुल गांधी को अध्यक्ष पद को लेकर जल्द फैसला लेना चाहिए? इसपर अश्विनी कुमार ने कहा कि किसी अकेले शख्स से ना पार्टी चढ़ती है, ना डूबती है। जब ढांचा ही खराब हो जाए तो कोई क्या करे।

पंजाब की रार का किया जिक्र

आगे पंजाब चुनाव का जिक्र करते हुए अश्विनी कुमार ने कहा कि पंजाब में कमियां साफ दिख रही हैं। कभी ऐसा नहीं सुना था कि बीच चुनाव में सीएम पद की कुर्सी के लिए लड़ाई हो, जबकि गद्दी अभी मिली नहीं है।

वह बोले कि पंजाब में कांग्रेस का मजाक बनाया जा रहा है। वहां ऐसा दिखाया जा रहा जैसे दो-तीन नेताओं के अलावा किसी ने पार्टी के लिए कुछ किया ही नहीं है। ऐसे हालातों में इतनी पुरानी पार्टी आगे कैसे बढ़ेगी यह मेरी समझ के बाहर है।

उन्होंने कहा कि मुझे जितना समझ आ रहा है कि पंजाब में कांग्रेस चुनाव हार रही है, आपचुनाव जीत रही है। आप के उम्मीदवार का नाम नहीं सुना था वहां लोग झाड़ू की बात कर रहे हैं। देहाती इलाकों में जहां कभी अकाली दल, कांग्रेस का वर्चस्व था वहां नए उम्मीदवारों को समर्थन मिलता दिख रहा है। वह बोले कि 10 तारीख के नतीजों पर तो वह बात नहीं कर सकते, लेकिन उन्होंने जो पंजाब में देखा, सुना उसपर अनुमान लगा सकते हैं।


Share