डेथ ट्रैप क्यों माना जाता है कोझिकोड टेबलटॉप एयरपोर्ट

डेथ ट्रैप क्यों माना जाता है कोझिकोड टेबलटॉप एयरपोर्ट
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कोझिकोड (एजेंसी)। केरल के कोझिकोड में हुए विमान हादसे की वजह की जांच की जा रही है। शुक्रवार की शाम दुबई से केरल आ रहा एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान कोझिकोड एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में पायलट समेत 18 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे का बड़ा कारण इस एयरपोर्ट के टेबलटॉप रनवे को माना जा रहा है। अमूमन ऐसे एयरपोर्ट पर विमानों की लैडिंग को खतरनाक माना गया है।

केरल के 4 एयरपोर्ट्स में से सबसे छोटा रनवे

कोझिकोड एयरपोर्ट पर रनवे चारों तरफ से पहाड़ी से घिरा हुआ है। पहले यहां पर 2860 मीटर लंबा रनवे था। डीजीसीए के ऑर्डर के बाद रनवे इंड सेफ्टी एरिया को 90 मीटर से बढ़ाकर 240 मीटर करने के बाद रनवे 2700 मीटर का हो गया। केरल के चार एयरपोर्ट्स में से इसका रनवे सबसे छोटा है। रनवे पर पानी फैला हुआ था। लैंडिंग के बाद विमान अचानक फिसलकर रनवे के बगल में खाई में जा गिरा।

क्या होता है टेबलटॉप रनवे?

टेबलटॉप रनवे दरअसल किसी पठार या पहाड़ के ऊपरी हिस्से पर बना होता है। यह घाटी से घिरा होता है। कहने का मतलब है कि इस एयरपोर्ट के रनवे के आस-पास घाटी होती है। ऐसे रनवे का एक या दोनों सिरा गहरी खाई की तरफ खुलता है। इस तरह के रनवे पर एयरक्राफ्ट की लैंडिंग को पायलट की क्षमता का परीक्षण माना जाता है। देश में कर्नाटक के मेंगलुरू, केरल के कोझिकोड एयरपोर्ट और मिजोरम में टेबलटॉप रनवे बने हुए हैं।

टेबलटॉप रनवे को क्यों माना जाता है रिस्की?

एयरक्राफ्ट की लैंडिंग को रिस्की माना जाता है क्योंकि यह नीचे के प्लेन के सेम लेवल पर होने का दृष्टि भ्रम पैदा करता है। लैंडिंग करते वक्त विजुअल रेफरेंस में बदलाव होता है। पायलट के सामने विमान को बहुत ऊंचा या फिर नीचे ले जाने का चैलेंज होता है। रात या बारिश के समय ऐसी लैंडिंग काफी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

तीसरे प्रयास में हुई थी लैंडिंग

रीयल टाइम एयर ट्रैफिक दिखाने वाली वेबसाइट से मिली जानकारी से एक बात साफ हो रही है कि जिस लैंडिंग के दौरान हादसा हुआ, वह तीसरी लैंडिंग थी। जानकारी के मुताबिक एयरक्राफ्ट रनवे 28 पर लैंड करने वाला था लेकिन बारिश की वजह से पायलट ने कैंसल कर दिया। दूसरी कोशिश रनवे 10 पर लैंडिंग की हुई। तीसरे प्रयास में लैंडिंग हुई, जब यह हादसा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक विमान हवा की गति की दिशा में ही लैंड हुआ, जो 18 किलोमीटर प्रतिघंटे की थी।


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