डूंगरपुर के के.के. गुप्ता निगम को सिखाएंगे- कैसे होती है सफाई ?

डूंगरपुर के के.के. गुप्ता निगम को सिखाएंगे
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उदयपुर. नगर संवाददाता & नगर निगम की पाताल मेें जा चुकी सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने डूंगरपुर के पूर्व सभापति केके गुप्ता को उदयपुर नगर निगम और यूआईटी की जिम्मेदारी सौंपी है। केके गुप्ता अब उदयपुर की सफाई व्यवस्था की कमान संभालेंगे और नगर निगम के नेताओं और अधिकारियों को सिखाएंगे की कैसे काम होता है और उन्होंने डूंगरपुर को कैसे चमकाया था। हालांकि गुप्ता ने भी यह माना है कि उदयपुर स्मार्ट सिटी होने और करोड़ों का बजट होने के बाद भी सफाई व्यवस्था सही नहीं है।

जानकारी के अनुसार स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के राजस्थान के ब्रांड एम्बेसेडर डूंगरपुर के पूर्व सभापति केके गुप्ता बनाया है। अब राज्य सरकार ने गुप्ता को नगर निगम उदयपुर और नगर विकास प्रन्यास उदयपुर की बिगड़ती सफाई व्यवस्था को सुधारने की जिम्मेदारी दी है। इसके लिए स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव भवानीसिंह देथा ने उदयपुर जिला कलेक्टर के नाम से एक आदेश भी जारी किया है।

उदयपुर शहर की कमान नगर निगम के हाथ में है और शहर की हालत यह है कि यहां की सफाई व्यवस्था रसातल में चली गई है। हैरत की बात यह है कि नगर निगम में वर्तमान में 1800 से अधिक नियमित सफाई कर्मचारी है। इनमें से एक हजार की भर्ती तो पिछले बोर्ड ने ही की थी, इसके बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था धूल चाट रही है। शहर में हालत यह है कि कचरा समय पर नहीं उठ पा रहा है, नालियां कचरे से अटी पड़ी है, जिससे पैदा हो रहे मक्खी और मच्छरों से बीमारियां फैल रही है, लेकिन नगर निगम इस व्यवस्था को सुधार नहीं पा रही है, जिससे लोगों में आक्रोश व्याप्त है और नगर निगम अपने आप को राजस्थान में नम्बर वन पर बता रहा है।

इधर शहर में हाल में हुई तेज बारिश ने शहर की ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खोल दी थी और शहर में चारों तरफ पानी ही पानी फैल गया था, जिसकी निकासी में घंटों का समय लगा था। बारिश में स्मार्ट सिटी की बदहाल देखकर जनप्रतिनिधि भी केवल देखने का ही काम कर रहे थे, क्योंकि उनके हाथ में कुछ था ही नहीं। ऐसे में राज्य सरकार ने इस व्यवस्था को संभालने का जिम्मा केके गुप्ता को दिया है, हालांकि केके गुप्ता पूरे राज्य के स्वच्छता मिशन के ब्रांड ऐम्बेसेडर है, लेकिन विशेष रूप से उदयपुर नगर निगम और नगर विकास प्रन्यास की जिम्मेदारी दी गई है, ताकी यहां की सफाई व्यवस्था सुधर सके। हैरत की बात यह है कि यहां उदयपुर में स्मार्ट सिटी भी है और इसके लिए केन्द्र सरकार की ओर से करोड़ों का बजट भी जारी किया गया है। केके गुप्ता ने बताया कि वह शीघ्र ही उदयपुर आकर इस संदर्भ में एक बैठक लेेंगे।

वार्डों से नदारद रहते है सफाई कर्मचारी

यहां पर यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि उदयपुर नगर निगम के सफाई कर्मचारी अपना काम नहीं कर रहे है। सफाई कर्मचारियों की हालत यह है कि वे अपने वार्डों से नदारद रहते है और केवल हस्ताक्षर करने की फार्मेल्टी ही कर रहे है। मिलीभगत के इस खेल में जनता को भुगतना पड़ रहा है। मिलीभगत के इस खेल को गत दिनों एक पार्षद ने पकड़ा भी था।


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