बस कुछ हफ्ते और…वैज्ञानिकों से हरी झंडी का इंतजार

सीरम इंस्टीट्यूट जल्द ही करेगा केंद्र के साथ समझौता
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नई दिल्ली (एजेंसी)। देश में कोरोना महामारी से निपटने के लिए कोविड-19 वैक्सीन पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बड़ा अपडेट दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को बताया कि एक बार अपने वैज्ञानिकों से हरी झंडी मिलने के बाद हम बड़े पैमाने पर कोविड-19 वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर देंगे। हमने पूरी तैयारी की है। वैक्सीन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक रूपरेखा तैयार की है और कम से कम समय में हर व्यक्ति को वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए हम काम कर रहे हैं। उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी बताया कि वैक्सीन के कुछ कैंडिडेट्स को अगले कुछ हफ्तों में लाइसेंस मिल सकता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने कहा कि तीन वैक्सीन प्री-क्लीनिकल स्टेज में हैं और 6 वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल में हैं। ये 2-3 डोज वाले वैक्सीन हैं, अधिकांश 2 डोज वाले वैक्सीन हैं। हर डोज के बीच की दूरी 3-4 हफ़्ते की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव ने बताया कि वैक्सीन के कुछ कैंडिडेट्स को अगले कुछ हफ्तों में लाइसेंस मिल सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव ने बताया कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक ने इमरजेंसी यूज अप्रूवल के लिए आवेदन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी वैक्सीन निर्माताओं और वैज्ञानिकों से बातचीत की।

कुछ वैक्सीन निर्माताओं को आने वाले हफ्तों में मिल सकता है लाइसेंस

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव ने कहा कि भारत में मौजूदा समय में रोजाना किए जा रहे ट्रायल में 6 वैक्सीन ने प्रभावी नतीजे दिए हैं। वैक्सीन के कुछ कैंडिडेट्स को अगले कुछ हफ्तों में लाइसेंस मिल सकता है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से केंद्र सरकार की ओर वैक्सीन के रोलआउट के लिए रोड मैप तैयार किया जा रहा है।

सितंबर के मध्य से देश में कोरोना के नए मामलों में आई गिरावट

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव ने बताया कि सितंबर के मध्य से भारत में कोरोना के नए मामलों में लगातार गिरावट है। भारत में केस पॉजिटिविटी घट रही है व कुल पॉजिटिविटी रेट 6.5′ है।

विश्व के बड़े देशों के मुकाबले भारत में केस कम

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने बताया कि प्रति दस लाख लोगों पर कोरोना के मामलों में हम विश्व के बड़े देशों से भारत की तुलना करें तो वहां भारत से 7-8 गुना ज़्यादा मामले हैं।


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