जूनियर हॉकी वल्र्ड कप सेमीफाइनल: जर्मनी से हार भारत बाहर

Share

भुवनेश्वर (एजेंसी)। भारतीय जूनियर हॉकी टीम शुक्रवार को जूनियर हॉकी वल्र्ड कप के सेमीफाइनल में जर्मनी से हार गई। जर्मनी ने ओडिशा के भुवनेश्वर में खेले जा रहे वल्र्ड कप के सेमीफाइनल मुकाबले में पिछली बार की चैंपियन भारतीय टीम को 4-2 से हराकर फाइनल का सपना तोड़ दिया।

इसके साथ ही भारतीय टीम लगातार दो जूनियर हॉकी वल्र्ड कप फाइनल में खेलने का कारनामा दो बार करने का इतिहास रचने से भी चूक गई। भारत ने 2016 में लखनऊ में अपनी ही जमीन पर आयोजित जूनियर हॉकी वल्र्ड कप के फाइनल में बेल्जियम को हराकर खिताब जीता था।

पहले क्वार्टर में ही बना ली जर्मनी ने बढ़त : भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में खेले जा रहे सेमीफाइनल में जर्मनी ने शुरुआत से ही भारतीय टीम के ऊपर दबाव बना लिया था। पहले क्वार्टर में ही जर्मनी के लिए एरिक क्लेनलिन ने पेनाल्टी कार्नर को गोल में बदलकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी। यह जर्मनी का मैच में दूसरा पेनाल्टी कार्नर था।

दूसरे क्वार्टर में भारत का खाता खुला : जर्मनी का वर्चस्व मैच के दूसरे क्वार्टर में भी बना रहा। होलमुलर ने दूसरे क्वार्टर में शानदार गोल करते हुए जर्मनी की टीम की बढ़त को 2-0 पर पहुंचा दिया। यह गोल शानदार मैदानी प्रयास से आया। पहले दोनों क्वार्टर में भारतीय हॉकी टीम का डिफेंस बेहद खराब दिखाई दिया।

दूसरे क्वार्टर में ही जर्मनी ने एक गोल और करते हुए बढ़त को 3-0 पर पहुंचाकर मैच को अपने पक्ष में करना तय कर लिया। यह गोल एक बार फिर होलमुलर की ही हॉकी स्टिक से भारतीय गोलपोस्ट में पहुंचा। हालांकि भारतीय टीम को उत्तम सिंह ने क्लोज रेंज शॉट के जरिए स्कोर को 1-3 किया। लेकिन जर्मनी थोड़ा भी ढील देने के मूड में नहीं था। भारतीय खिलाडिय़ों की गलती से जर्मनी को पेनाल्टी स्ट्रोक लेने का मौका मिला। क्रिस्टोफर कुटर ने पेनाल्टी स्ट्रोक पर शानदार गोल करते हुए बढ़त को 4-1 करते हुए मैच एकतरफा कर दिया।

तीसरा क्वार्टर में भारत ने दिखाया दम : भारतीय हॉकी टीम ने तीसरे क्वार्टर में थोड़ा दम दिखाया। हाफटाइम के बाद दोबारा मैच शुरू होने पर भारतीय हॉकी टीम ने जर्मन गोलपोस्ट पर लगातार हमले किए। इस क्वार्टर में दोनों ही टीम गोल नहीं कर सकीं।

चौथे क्वार्टर में भी 14 मिनट तक भारत के हाथ खाली : भारतीय हॉकी टीम ने चौथे क्वार्टर में भी आक्रामक खेल दिखाया। लेकिन गोल करने में सफल नहीं हो सकी। उल्टा जर्मनी को मैच के आखिरी पलों में एक और पेनाल्टी कार्नर का तोहफा दे दिया। हालांकि इस बार गोलकीपर पवन ने शानदार बचाव किया। भारतीय टीम के 14 मिनट तक गोल नहीं कर पाने के बाद आखिरकार बॉबी सिंह धामी ने मैच के आखिरी मिनट में शानदार गोल किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। भारतीय टीम को 2-4 से हार के साथ ही मैदान से बाहर आना पड़ा।


Share