ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में भी हथियारों से लैस हेलिकॉप्टरों से पहुंचाना होगा आसान

It will be easy to reach with armed helicopters even in the inaccessible areas of high altitude.
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स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टरों की पहली स्क्वॉड्रन अगले माह, चीन सीमा पर पहले तैनाती मुमकिन

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय वायुसेना को अगले महीने स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (एलसीएच) की पहली स्क्वॉड्रन मिल जाएगी। 3 अक्टूबर को जोधपुर में एलसीएच की पहली स्क्वॉड्रन बनेगी। 8 अक्टूबर को एयरफोर्स डे है और इससे पहले एयरफोर्स के बेड़े में स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर भी जुड़ जाएंगे। पहली यूनिट में 10 एलसीएच शामिल होंगे।

क्यों है अहम

एयरफोर्स अभी रूस के एमआई -25 और एमआई -35 अटैक हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करती है जो काफी पुराने हैं। वहीं एलसीएच न सिर्फ नया और स्वदेशी है. बल्कि चीन और पाक सीमा के ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अपने हल्के वजन के कारण काफी काम के साबित हो सकते हैं।

अटैक हेलिकॉप्टर किस हाल में

जब एयरफोर्स में अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर शामिल हुए तो रूसी एमआई  हेलिकॉप्टर की एक स्क्वॉड्रन को बाहर कर दिया गया था। एमआई -35 की मौजूदा स्क्वॉड्रन को नवीनीकरण के लिए भेजा जाएगा, जिससे इन पुराने अटैक हेलिकॉप्टर की लाइफ कई साल बढ़ जाएगी। भारतीय सेना ने तीन महीने पहले ही स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर की पहली स्क्वॉड्रन वनाई है। यह अभी बेंगलुरू में है, लेकिन इसे अगले साल लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास शिफ्ट करने की प्लानिंग है। तब यह आर्मी की पूर्वी कमान में होगी। आर्मी की योजना 95 लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर लेने की है। बता दें कि आम तौर पर एक स्क्वॉड्रन में 17 से लेकर 20 हेलिकॉप्टर होते हैं।

डिजाइन से लेकर निर्माण तक देश में

लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (एलसीएच) की डिजाइनिंग से लेकर इसे बनाने का काम हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड (एचएलए) ने किया है। स्वदेशी एलसीएच का वजन करीब 6 टन है, जिसकी वजह से यह बहुत ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों के लिए मुफीद है। हल्के वजन का फायदा यह है कि ये ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में अपनी पूरी क्षमता में मिसाइल और दूसरे हथियारों के साथ आराम से ऑपरेट कर सकते हैं।

खास फीचर से है लैस : एलसीएच में दुश्मन को चकमा देने के लिए इस तरह के फीचर हैं कि ये आसानी से दश्मन के रेडार की पकड़ में नहीं आएगा। इसकी बॉडी और रोटस पर गोली का कोई खास असर नहीं होगा। एलएसीएच में फ्रांस से ली गई मिस्ट्रल मिसाइल लग सकती है। यह मिसाइल हवा से हवा में मार करती है। हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल भी इसमें लग सकती है।


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