आईपीएल दिखा बीसीसीआई कमा रहा 16000 करोड़, टी-शर्ट से कैप तक हर चीज से होती है पैसों की बारिश

IPL is showing BCCI earning 16000 crores, everything from T-shirt to cap makes money rain
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मुंबई (कार्यालय संवाददाता)। शनिवार से आईपीएल 2022 की शुरूआत हो चुकी है। अब अगले दो महीने क्रिकेट का सुपर एक्शन शुरू हो चुका है। चौकों-छक्कों की बरसात के साथ ही आईपीएल, बीसीसीआई से लेकर टीम के मालिकों और खिलाडिय़ों तक के लिए पैसे की बारिश करने वाला टूर्नामेंट भी है। 2008 में पहले सीजन के बाद से ही लगातार आईपीएल की लोकप्रियता और कमाई दोनों बढ़ती ही गई है।

मीडिया या ब्रॉडकास्टिंग राइट्स

  • आईपीएल की शुरूआत से ही कमाई का सबसे अहम जरिया उसके प्रसारण या ब्रॉडकास्टिंग राइट्स से होने वाली कमाई रही है।
  • ब्रॉडकास्टिंग राइट्स का मतलब होता है कि आईपीएल के मैच केवल वही चैनल दिखा पाएगा, जिसके पास इसके राइट्स होंगे।
  • आईपीएल की शुरूआत यानी 2008 से अगले 10 वर्षों यानी 2017 तक इसके ब्रॉडकास्टिंग राइट्स सोनी के पास थे, जिसने इसके लिए बीसीसीआई को 8,200 करोड़ रूपए दिए थे।
  • 2018 में ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की फिर बोली लगी और इस बार बाजी मारी स्टार स्पोर्ट्स ने। स्टार ने 2018 से 2022 तक, यानी 5 सालों के आईपीएल ब्रॉडकास्टिंग राइट्स को 16,347 करोड़ रूपए में खरीदा।
  • मीडिया और स्पोर्ट्स जानकारों का मानना है कि 2023-2028 के लिए आईपीएल मीडिया राइट्स 30 हजार करोड़ रूपए में बिक सकते हैं।

इससे टीमें-बीसीसीआई कितना कमाती हैं

शुरू में ब्रॉडकास्टिंग राइट्स से होने वाली कमाई में 20% बीसीसीआई रखता था और 80% पैसा टीमों को मिलता था, लेकिन धीरे-धीरे ये बढ़कर 50%-50′ हो गया। यानी अब ब्रॉडकास्टिंग राइट्स से मिलने वाले पैसे में बीसीसीआई और टीमों को आधा-आधा हिस्सा मिलता है।

आईपीएल के पहले 10 सीजन में प्रसारण अधिकार से बीसीसीआई और टीमों ने 8,200 करोड़ रूपए कमाए थे, यानी हर साल 820 करोड़। 2018 में स्टार स्पोर्ट्स ने 5 सालों के लिए मीडिया राइट्स 16,347 करोड़ रूपए में खरीदे। यानी हर साल करीब 3,270 करोड़ रूपए।

टाइटल स्पॉन्सरशिप

टाइटल स्पॉन्सरशिप भी आईपीएल की टीमों के लिए कमाई का बहुत बड़ा जरिया है। टाइटल स्पॉन्सरशिप का मतलब होता है, आईपीएल के पहले अपना नाम जुड़वाना-जैसे- डीएलएफ आईपीएल, पेप्सी आईपीएल, वीवो आईपीएल और अब टाटा आईपीएल। 2021 में वीवो ने वापसी की और 439.8 करोड़ में टाइटल स्पॉन्सरशिप खरीदी। 2022 में दो सीजन के लिए टाटा ने टाइटल स्पॉन्सरशिप हासिल कर ली और इसके लिए 600 करोड़ रूपए खर्च किए।

आईपीएल के सेंट्रल रेवेन्यू से यानी ब्रॉडकास्टिंग राइट्स और टाइटल स्पॉन्सरशिप से बीसीसीआई की कमाई आईपीएल 2008 से 2017 तक 8400 करोड़ रूपए थी, यानी सालाना 840 करोड़ रूपए। वहीं, 2018 से 2022 के दौरान बीसीसीआई को इससे करीब 18500 करोड़ रूपए की कमाई का अनुमान है। यानी हर साल करीब 3700 करोड़ रूपए। ये कमाई बीसीसीआई और टीमों में बराबर बांटने पर 8 टीमों को सालाना करीब 1156 करोड़ रूपए रूपए की कमाई हुई, यानी सेंट्रल रेवेन्यू से हर टीम को सालाना 230-240 करोड़ रूपए की कमाई होगी।

विज्ञापन और प्रमोशनल रेवेन्यू

विज्ञापन और प्रमोशन से टीमों की जमकर कमाई होती है। टीमों की कमाई का अपना बिजनेस मॉडल होता है। इसके तहत वे कई कंपनियों से करार करती हैं।

टीमें विज्ञापन और प्रमोशन के तहत खिलाडिय़ों और अंपायर की जर्सी, हेलमेट, विकेट, मैदान और बाउंड्री लाइन पर दिखने वाले कंपनियों के नाम और लोगो आदि के लिए भी कंपनियां टीमों को पैसे देती हैं।

टीमें अपने नाम और लोगो वाले टी-शर्ट, कैप, ग्लब्स आदि मर्चन्डाइज बेचकर भी पैसे कमाती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, विज्ञापन और ब्रैंड प्रमोशन से मुंबई इंडियंस जैसी टीमें हर साल 50 करोड़ रूपए तक कमा लेती हैं।

लोकल रेवेन्यू : आईपीएल टीमों की कमाई का तीसरा जरिया होता है मैदान में बिकने वाले टिकट। एक मैच में बिकने वाली टिकट से करीब 4-5 करोड़ रूपए तक कमाई होती है। इनमें से 80′ पैसा घरेलू टीम को मिलता है। यानी हर मैच से टीमों को करीब 3-4 करोड़ रूपए की कमाई टिकट से होती है।

हालांकि, कोविड-19 के दौरान टीमों की इस कमाई में गिरावट आई है।

टीमों को हर साल होता है कितना फायदा

अब अगर आईपीएल टीमों को हर साल की करीब 300 करोड़ की कमाई में से खर्च यानी करीब 160-165 करोड़ के खर्च को निकाल दें, तो टीमें सालाना करीब 130-140 करोड़ रूपये का फायदा कमाती हैं।

प्राइज मनी: टॉप-4 टीमों की कमाई का एक जरिया आईपीएल प्राइज मनी भी है। 2021 में विजेता टीम को 20 करोड़ रूपए, रनर अप को 12.5 करोड़ रूपए मिले थे। वहीं, तीसरे और चौथे नंबर पर रहने वाली टीमों को क्रमश: 8.75-8.75 करोड़ रूपए मिले। प्राइज मनी का 50′ यानी आधा हिस्सा टीम मालिक को मिलता है, जबकि बाकी का आधा हिस्सा टीम में बांटा जाता है।


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