ऑस्कर से चूकी भारत की ‘राइटिंग विद फायर’

India's 'Writing with Fire' missed the Oscars
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लॉस एंजेलिस (एजेंसी)। भारत की डॉक्यूमेंट्री ‘राइटिंग विद फायर’ के ऑस्कर जीतने का सपना टूट गया है। बेस्ट डॉक्यूमेंट्री कैटेगरी में भारत के नॉमिनेशन को पछाड़ ये पुरस्कार ‘समर ऑफ सोल’ ने अपने नाम किया है। इतने बड़े अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट होना भी बड़ी बात है, पर लास्ट में इस तरह से रेस से बाहर होना देशवासियों को मायूस कर गया। 94वें एकेडमी अवॉर्ड्स/ऑस्कर का आयोजन इस साल कैलिफोर्निया स्थित लॉस एंजेलिस के डॉल्बी थिएटर में में ऑस्कर पुरस्कार का आयोजन किया गया।

ऑस्कर अवॉर्ड के नॉमिनेशन में जब राइटिंग विद फायर के नाम का ऐलान हुआ था, तो भारत के लोग खुशी से झूम उठे थे। बता दें कि राइटिंग विद फायर एक ऐसी डॉक्यूमेंट्री है जो पत्रकारिता पर आधारित है। ये फिल्म ऑस्कर्स में तो नॉमिनेट हुई ही है लेकिन इससे पहले इसे सनडांस फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड मिल चुका है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस फिल्म को अभी तक करीब 20 इंटरनेशनल अवॉर्ड्स मिल चुके हैं। राइटिंग विद फायर का निर्देशन रिंटू थॉमस और सुष्मित घोष ने मिलकर किया है। वहीं खास बात ये है कि दोनों के करियर की ये पहली डॉक्यूमेंट्री है, जिसे इंटरनेश्नल लेवल पर पसंद किया गया है। ‘राइटिंग विद फायर’ में दिखाया गया है कि एक महिला पत्रकारों को कैसी-कैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसे इसलिए भी सराहा जा रहा है क्योंकि राइटिंग विद फायर में खबर लहरिया के उत्थान की कहानी को बहुत ही सलीके से दिखाया गया है, जो दलित महिलाओं द्वारा निकाला जा रहा भारत का एकमात्र न्यूज पेपर है।

ऑस्कर से पहले एक लंबे ब्लॉग पोस्ट में खबर लहरिया ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री – जिसे टीम ने हाल ही में देखा – उनकी कहानी का सिर्फ एक हिस्सा है, और आंशिक कहानियों में कभी-कभी पूरी तरह से विकृत करने का एक तरीका होता है। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म काफी गतिशील और शक्तिशाली है, लेकिन इसमें खबर लहरिया का एक संगठन के रूप में रिपोर्टिंग पर फोकस करना गलत दिखाया गया है। हालांकि सोशल मीडिया पर इसके रेस से बाहर होने पर काफी मायूसी है।


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