बिहार में निर्दलियों की घटती जा रही अहमियत

बिहार में निर्दलियों की घटती जा रही अहमियत
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पटना (एजेंसी)। बिहार की सियासत में इस बार एनडीए और महागठबंधन सहित 6 राजनीतिक गठबंधन चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं। इसके अलावा छोटी बड़ी तमाम पार्टियां भी रणभूमि में जोर आजमाइश में जुटी हुई हैं। ऐसे में निर्दलीय चुनाव लडऩे वाले नेताओं को बिहार की जनता स्वीकार नहीं कर रही है और उनका ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। हालांकि, बिहार की सियासत में एक दौर में तीन दर्जन विधायक निर्दलीय हुआ करते थे, लेकिन मौजूदा समय में महज चार ही विधायक निर्दलीय हैं।

बिहार में सबसे कम निर्दलीय विधायक

बिहार के इतिहास में निर्दलीय विधायक के जीतने का सबसे खराब रिकार्ड पिछले चुनाव में रहा है। 2015 के विधानसभा चुनाव में कुल 243 सीटों पर तमाम राजनीतिक दलों के अलावा 1150 नेता निर्दलीय के रूप में चुनावी मैदान में उतरे थे। इनमें से से सिर्फ 4 ही निर्दलीय को जनता ने चुनकर विधानसभा भेजा था बाकि 1146 नेताओं को हार का मुंह देखना पड़ा था। कांटी से अशोक कुमार चौधरी, बेचहां से बेबी कुमारी, मोकामा से आनंत कुमार सिंह और वाल्मिकीनगर से धीरेंद्र कुमार सिंह ने जीत दर्ज की थी। इसके अलावा चार निर्दलीय प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे।

2010 में 6 निर्दलीय विधायक

2010 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के 243 सीटों पर 1342 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरे थे, जिनमें से 6 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इनमें बलरामपुर से दुलालचंद गोस्वामी, डेहरी से ज्योति रश्मि, ढाका से पवन कुमार जायसवाल, लौरिया से विनय बिहारी, सिकटा से दिलीप वर्मा और ओबरा से सोम प्रकाश सिंह शामिल हैं।

बिहार की राजनीति में 2005 में दो बार विधानसभा चुनाव हुए हैं। पहली बार फरवरी 2005 में हुए हैं, जिनमें 1493 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरे थे जबकि 17 को जीत मिली थी। इस चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में अक्टूबर में दोबारा से विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें 746 निर्दलीय प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाया और 10 जीतने में सफल रहे थे।

आजादी के बाद पहली बार बिहार में 1951 में चुनाव हुए थे, जिसमें 14 निर्दलीय जीते थे। इसके बाद 1957 के चुनाव में 5 निर्दलीय ही जीत सके थे, 1992 में 12 निर्दलीय जीते और 1967 के चुनाव में 33 निर्दलीय जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। बिहार के इतिहास में सबसे ज्यादा निर्दलीय इसी चुनाव में जीते थे। इसके बाद से निर्दलियों का ग्राफ जो गिरना शुरू हुआ है तो फिर रूक ही नहीं रहा है।

बिहार के 1969 के चुनाव में 24 और 1972 में 17 निर्दलीय विधानसभा पहुंचे थे। आपातकाल के बाद निर्दलीय प्रत्याशियों की भागीदारी में एक बार फिर जबरदस्त उछाल दर्ज की गई। 1977 के चुनाव में 24 और 1980 के चुनाव में 23 निर्दलीय जीते। वहीं, 1985 के चुनाव में 29 और 1990 में 30 निर्दलीय जीतकर विधायक बने। 1995 के विधानसभा चुनाव में 12 और साल 2000 में 20 निर्दलीय विधानसभा पहुंचने में सफल रहे थे।


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