करप्शन के आगे सीएम गहलोत लाचार बोले- मेरे पास जो विभाग, वहां भी भ्रष्टाचार होता है, वो भी अपने ही लोग हैं, बाहर के नहीं

In front of corruption, CM Gehlot said helplessly – The department that I have, corruption happens there too, they are also their own people, not outsiders
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जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लाचारी जताते हुए यहां तक कह दिया कि जो विभाग उनके अंडर में हैं उनमें करप्शन नहीं होने की गारंटी भी वे नहीं ले सकते। नवंबर में शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षक तबादलों में पैसा चलने के बयान पर सफाई में गहलोत ने कहा- मैंने जनरल बात पूछी थी, हर विभाग में होता है। शिक्षा विभाग की बात नहीं थी। जिनके पोर्टफोलियो मेरे पास होते हैं, क्या मैं गारंटी ले सकता हूं कि वहां कोई करप्शन होता ही नहीं होगा? वहां भी करप्शन होता है। वो लोग भी अपने ही लोग हैं। बाहर के लोग तो हैं नहीं कोई, विदेशी लोग थोड़े ही हैं। गहलोत पिंकसिटी प्रेस क्लब में मीडिया से बात कर रहे थे।

भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी नहीं मिलने के सवाल पर गहलोत ने कहा— कई बार हमें भी लगता है कि अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलती। एसीबी में केस दर्ज होने के बाद अभियोजन स्वीकृति देना या नहीं देना संबंधित विभाग पर निर्भर करता है। कई बार परिस्थिति अलग होती है और केस दर्ज हो जाता है। बाद में जांच में मामला अलग निकलता है तो विभाग से स्वीकृति नहीं मिलती। देश में बहुत कम एंटी करप्शन डिपार्टमेंट होंगे जो हमारी एसीबी की तरह काम कर रहे हैं। हम लोग खुद मॉनिटरिंग करते हैं।

आईएएस, आईपीएस के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति राज्य नहीं केंद्र देता है

बड़े अफसरों के खिलाफ एसीबी में भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने के सवाल पर गहलोत ने कहा कि इसका एक पूरा सिस्टम होता है। आईएएस, आईपीएस, आईएफएस ऑल इंडिया सर्विस में आते हैं। ऑल इंडिया सर्विस से जुड़े अफसर भारत सरकार से कंट्रोल होते हैं और उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का फैसला वहीं से होता है। ऑल इंडिया सर्विस के अफसरों के खिलाफ राज्य सरकार अभियोजन स्वीकृति नहीं दे सकती। उनके खिलाफ भारत सरकार से ही मंजूरी मिलती है।


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