इलाहाबाद हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी- ‘गाय को धर्म से ना जोड़ें, घोषित किया जाए राष्ट्रीय पशु’

गाय के नाम पर टैक्स से दो साल में 1250 करोड़ की वसूली
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प्रयागराज (एजेंसी)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान गाय को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि गौरक्षा को किसी भी धर्म से जोडऩे की जरूरत नहीं है। गाय को अब एक राष्ट्रीय पशु घोषित कर देना चाहिए। केंद्र को इस पर विचार करने की जरूरत है।

‘गौरक्षा सिर्फ किसी एक धर्म की जिम्मेदारी नहीं’

बता दें कि बुधवार को जावेद नाम के शख्स की याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने ये टिप्पणी की थी। जावेद पर गोहत्या रोकथाम अधिनियम के तहत आरोप लगे हुए हैं। ऐसे में कोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि गोरक्षा सिर्फ किसी एक धर्म की जिम्मेदारी नहीं है। गाय इस देश की संस्कृति है और इसकी सुरक्षा हर किसी की जिम्मेदारी है। फिर चाहे आप किसी भी धर्म से ताल्लुक क्यों ना रखते हों।

‘गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित  किया जाना चाहिए’

जस्टिस शेखर कुमार यादव ने ये फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकार को अब सदन में एक बिल लाना चाहिए। गाय को भी मूल अधिकार मिलने चाहिए। समय आ गया है कि अब गाय को एक राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया जाए। वहीं जो भी गाय को परेशान करते हैं, उन्हें नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जज ने जोर देकर कहा है कि जब तक देश में गायों को सुरक्षित नहीं किया जाएगा, देश की तरक्की भी अधूरी रह जाएगी।

क्या है पूरा मामला

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि जावेद को बेल देने से समाज की शांति भंग हो सकती है। वैसे भी ये कोई पहली बार नहीं है जब याचिकाकर्ता ने ऐसा अपराध किया हो। पहले भी गौ हत्या को अंजाम दिया गया है जिस वजह से समाज पर इसका गलत प्रभाव पड़ा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती है। याचिकाकर्ता दोबारा उसी अपराध को अंजाम दे सकता है। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की कि देश में कई गौशालाएं अभी काम कर रही हैं लेकिन उनकी वर्तमान स्थिति दयनीय है। कोर्ट ने कहा है कि ये देख दुख होता है कि जो लोग करते हैं, वो खुद ही बाद में गौ भक्षक बन जाते हैं।


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