भीलवाड़ा में अवैध खदान ढही- 3 महिलाओं सहित 7 मजदूर दबे: 5 के शव निकाले

4 मृत- जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में बादल फटने से 36 लापता
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भीलवाड़ा (प्रात:काल संवाददाता)। आसींद थाने के लाछूड़ा इलाके में क्वार्ट्ज पत्थर की एक अवैध खदान बुधवार दोपहर ढह गई। खदान में तीन महिलाओं सहित सात मजदूरों दब गए।  जिनमें से पांच के शव रात दस बजे तक निकाल लिए गए। मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से मदद का भरोसा दिलाया गया है। इस हृदय विदारक घटना की खबर से लाछूड़ा के साथ आस-पास के गांवों के बाशिंदों में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में लोग खदान पर जमा हो गये।

पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारियों ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया है। रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा। खदान काफी गहरी होने से रेस्क्यू शुरू होने के करीब तीन से चार घंटे बाद महिला सहित 4 मजदूरों के शवों को निकाल लिया गया। शेष 3 मजदूरों की तलाश की जा रही है। सभी चार मृतक केमरी गांव के बताये गये हैं। वहीं मृतक आश्रितों को 11-11 लाख रूपये की आर्थिक सहायता राशि दिलाने की भील समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की है। आसींद पुलिस व ग्रामीणों के अनुसार, लाछूड़ा में एक खेत में अवैध रूप से क्वार्ट्ज पत्थरों की अवैध खदान पिछले चल रही थी। रोजमर्रा की तरह बुधवार सुबह भी मजदूरी के लिए मजदूर खदान पर पहुंचे। इनमें तीन महिलायें और चार पुरूष थे, जो खदान में कार्य कर रहे थे। दोपहर में अचानक यह खदान भरभराकर ढह गई। खदान ढहने की सूचना लाछूड़ा गांव पहुंची तो वहां से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गये और इसकी सूचना पुलिस, प्रशासन और चिकित्सा विभाग को दी। इसके बाद सबसे पहले आसींद पुलिस मौके पर पहुंची और आस-पास मौजूद लोगों को वहां से दूर किया। साथ ही मलबे में दबे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने चार जेसीबी और आधा दर्जन ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मौके पर बुलाई गई। खदान 50 फीट लंबी, 60 फीट चौड़ी और करीब 70 से 80 फीट गहरी है।  उधर, जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल के साथ ही बदनौर, शंभुगढ़ सहित आस-पास के थानों से जाब्ता बुलवा लिया गया। मांडल विधायक रामलाल जाट, जिला कलेक्टर शिवप्रसाद एम नकाते, पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा, आसींद व बदनौर एसडीएम, माइनिंग टीम भी मौके पर पहुंची हैं और घटनास्थल का जायजा और घटना की जानकारी ली। अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी कलेक्टर-एसपी ने दिये हैं।  यह खदान अवैध बताई जा रही है। उधर, रेस्क्यू शुरू होने के करीब तीन से चार घंटे बाद 4 शवों को बाहर निकाल लिया गया। इनमें एक महिला व तीन पुरूषों के शव शामिल हैं। शेष 3 लोगों की तलाश की जा रही है, जिनमें दो महिलायें शामिल हैं। मीना व प्रहलाद के शवों का करेड़ा अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाया गया है।

इनके मिले शव

प्रारंभिक तौर पर मलबे से निकाले गये शवों की पहचान कर ली गई।  इनमें मीना पुत्री हजारी भील, प्रहलाद पुत्र कैलाश भाट, धर्मा पुत्र तेजू भाट व कन्हैया उर्फ  टका पुत्र रामा भील निवासी केमरी बताये गये हैं। शेष तीन मजदूरों की तलाश जारी है।

लॉकडाउन में सीज हो चुकी खदान, फिर कैसे चली ?

जिस खदान में आज सात मजदूर दबे यह खदान अवैध है। बीते माह लॉकडाउन के दौरान माइनिंग विभाग की टीम ने इस खदान पर कार्रवाई करते हुये एक फोकलेन मशीन जब्त करते हुये खदान को भी सीज कर दिया था। ऐसे में सवाल  यह उठता है कि इस कार्रवाई के बाद अवैध खदान किसके आदेश से दुबारा चली। एक बार कार्रवाई के बाद माइनिंग विभाग ने इस खदान पर नजर क्यूं नहीं रखी। मौके पर मौजूद लोग मिलीभगती से खदान चलने के आरोप लगाते नजर आये। पुलिस की माने तो जहां खदान संचालित हो रही थी, वह खेत मुस्लिम समाज के एक व्यक्ति का है, जिसे सल्यावड़ी क्षेत्र के किसी व्यक्ति ने खनन कार्य के लिए ठेके पर ले रखा था। ऐसी प्रारंभिक तौर पर जानकारी सामने आई है। सच्चाई का पता पुलिस जांच से ही चल पायेगा।


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