इमरान ने कैसे पाक को फंसा दिया ? भारत भाव देने को राजी नहीं…अमेरिका भी चिढ़ा, आईएमएफ से नहीं मिलेगी फूटी कौड़ी

How Imran trapped Pakistan? India is not ready to pay... America is also irritated, will not get a penny from IMF
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इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान की सियासत में उथल-पुथल मची हुई है। गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में आ गई है। इसके एक तरफ पीएम इमरान खान हैं तो दूसरी तरफ खड़ा है पूरा विपक्ष। कोर्ट को तय करना है कि वह देश में चुनाव कराने की इमरान की मुराद पूरी करेगा या भंग हो चुके अविश्वास प्रस्ताव के फैसले को गलत ठहराकर विपक्ष के स्टैंड पर मुहर लगाएगा। कोर्ट का फैसला कुछ भी आए, लेकिन कुल मिलाकर इमरान खान ने पाकिस्तान को पूरी तरह फंसा दिया है। देश में अगस्त 2023 तक तो चुनाव होने ही थे। हालांकि, इमरान खान ने जिस तरह रायता फैलाया है, उसे समेटने में पाकिस्तान के लाले लग जाएंगे। भारत तो पहले ही उसे भाव नहीं दे रहा है। अब अमेरिका भी उससे बुरी तरह चिढ़ गया है। यह अमेरिका के प्रभाव वाले हर अंतरराष्ट्रीय संस्थान में पाकिस्तान के लिए मुश्किलें खड़ी करेगा। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से लोन लेने की उसकी चाहत भी अब शायद ही पूरी हो पाए। इमरान खान का ड्रामा पाकिस्तान को भविष्य में मुश्किलों की तरफ धकेल सकता है। विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को रविवार को नेशनल एसेंबली के डिप्टी स्पीकर ने भंग कर दिया था। इमरान खान ने सरकार को गिराने की कोशिश में खुलकर अमेरिकी साजिश होने का आरोप लगाया है। जबकि जो बाइडेन प्रशासन ने ऐसी कोई बात होने से इनकार किया है। अविश्वास प्रस्ताव के भंग होते ही कुछ मिनटों में पीएम इमरान ने देश को संबोधित किया था। उन्होंने विपक्ष की ओर से लाए गए इस प्रस्ताव में विदेशी साजिश होने की बात कही थी। बार-बार यह बात कहकर अमेरिका को इमरान ने बिदका दिया है। ये रिश्ते इस कदर बिगड़ चुके हैं कि ‘मरम्मत’ की गुंजाइश कम ही है।

इमरान ने रखी एंटी-अमेरिका पॉलिसी

इमरान खान ने पिछले कुछ समय में जिस तरह के कदम उठाए हैं, वो लगातार पाकिस्तान को अमेरिका से दूर ले गए हैं। अफगानिस्तान में तालिबान को सत्ता में काबिज करने के लिए जिस तरह पाकिस्तान ने अमेरिका को गुमराह किया, वो जगजाहिर है। फिर चीन से अमेरिका की टेंशन शुरू होने पर पाकिस्तान खुलकर ड्रैगन की गोद में बैठ गया। वह पूरी तरह से चीन की पक्षदारी करने लगा। उसने अमेरिका के साथ अपने दशकों पुराने संबंधों को ताक पर रख दिया।

यह कहना गलत नहीं होगा कि पाकिस्तान की इन बेतुकी करतूतों के चलते भारत के अमेरिका सहित पश्चिमी देशों के साथ रिश्ते और बेहतर हुए। हालांकि, भारत ने अपनी विदेश नीति में वो गलती नहीं की जो पाकिस्तान ने की। जब यूक्रेन पर रूस ने हमला किया तो वह न्यूट्रल हो गया। उसने किसी के लिए अपने पुराने दोस्त का साथ नहीं छोड़ा। संतुलन बनाए रखा।

अर्थव्यवस्था भी बेहाल

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भी कोई मजबूत स्थिति में नहीं है। महंगाई से लोग बेहाल हैं। पेट्रोल-डीजल, बिजली और घरेलू ईंधन की कीमतों पर अंकुश लगाने में सरकार नाकाम साबित हुई है। शेयर बाजार डांवाडोल हैं। देनदारी चुका पाने में डिफॉल्ट का खतरा बढ़ रहा है। डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी मुद्रा (रूपये) हांफ रही है। अमेरिकी मुद्रा की तुलना में पाकिस्तानी रूपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। इमरान की एंटी-अमेरिका पॉलिसी के कारण स्थितियों में सुधार की संभावना भी कम ही है। अब आईएमएफ से लोन लेकर अपने फॉरेन रिजर्व को बढ़ाने के रास्ते भी पाकिस्तान ने करीब-करीब बंद कर लिए हैं। तमाम एशियाई मुल्कों में जहां सबसे तेजी से महंगाई बढ़ रही है, उनमें पाकिस्तान दूसरे नंबर पर है।

अब क्या करेंगे इमरान ?

अगर जजों ने इमरान खान के पक्ष में फैसला सुनाया तो अगले आम चुनाव में वह विपक्ष के खिलाफ मजबूत नैरेटिव के साथ मैदान में उतरेंगे। कारण है कि कोर्ट का फैसला उनकी विदेशी हस्तक्षेप वाले स्टैंड पर मुहर लगा देगा। कोर्ट अगर इमरान के खिलाफ फैसला देगा तो भी उनका नैरेटिव यही रहने वाला है। हालांकि, यह बात अभी साफ नहीं है कि पाकिस्तान की जनता इमरान खान की विदेशी हस्तक्षेप वाली थ्योरी पर कितना यकीन करती है।

बात जहां तक भारत की है तो वह पाकिस्तान को भाव देना बंद कर चुका है। इस मामले में उसकी पॉलिसी साफ है। इसी पॉलिसी से तिलमिलाकर इमरान गलतियों पर गलतियां करते चले गए। वह चीन को मजबूती के साथ थामने में जुट गए। उनके मन में था कि बस रूस को अपने पाले में लाकर वह भारत को चित कर देंगे।


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