Thursday , 16 August 2018
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‘एनआरसी में जिनके नाम नहीं, वे घुसपैठिए’

  • एनआरसी पर हंगामे से सरकार बेपरवाह
  • देश पर पहला अधिकार भारतीयों का, विपक्ष भ्रम फैला रहा : शाह

नई दिल्ली। पिछले दो दिनों से संसद में एनआरसी मामले में चल रहे गतिरोध पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने विपक्ष सहित इसका विरोध कर रहे सभी लोगों पर तीखा हमला बोला। शाह मंगलवार को काफी नाराज नजर आ रहे थे। संवाददाताओं से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मुझे संसद में बोलने नहीं दिया गया। मैं देशवासियों को कहना चाहता हूं कि एनआरसी से किसी भारतीय का नाम नहीं काटा गया है और जिनका नाम लिस्ट में नहीं है वे घुसपैठिए हैं। यही नहीं इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी, ममता बनर्जी से भी कई सवाल पूछे और दोनों को सलाह भी दे डाली।
शाह ने कहा कि एनआरसी मामले पर जिस तरह से देश में माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है मैं साफ कर देना चाहता हूं कि इस देश पर पहला अधिकार भारतीयों का है। उन्होंने कहा भाजपा और केंद्र सरकार की प्राथमिकता देशवासियों को सुरक्षा और देश की सीमा सुरक्षित करना है। और उस ओर हमने कदम बढ़ाया है।
नई दिल्ली। असम में नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) में 40 लाख लोगों को शामिल न किए जाने के मुद्दे पर संसद में मंगलवार को दूसरे दिन भी हंगामा हुआ। तृणमूल कांग्रेस की अगुआई में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वाम दलों ने पहले संसद परिसर और फिर सदन में सरकार पर हमला बोला। एनआरसी के बीच संसद में रोहिंग्या शरणार्थियों का मुद्दा भी उठा। विपक्ष के विरोध से बेपरवाह गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सदन को बताया कि भारत सरकार की इस विषय पर म्यांमार से बातचीत चल रही है। उन्होंने फरवरी 2018 में जारी अडवाइजरी का जिक्र कर राज्य सरकारों से रोहिंग्याओं पर नजर रखने की अपील की। विपक्ष के सांसद एनआरसी पर लोकसभा में चर्चा की मांग कर रहे थे लेकिन, स्पीकर ने यह कहते हुए विपक्ष की मांग ठुकरा दी कि इस पर सोमवार को चर्चा हो चुकी है और गृहमंत्री इस पर बयान दे चुके हैं। इसके बाद लोकसभा में शोर-शराबा होने लगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार रोहिंग्याओं के मुद्दे पर अडवाइजरी जारी कर चुकी है। विपक्षी पार्टियों के सरकार के भेदभाव के आरोप पर राजनाथ सिंह ने कहा, राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे राज्य में रोहिंग्याओं की संख्या आदि के बारे में गृह मंत्रालय को सूचना दें। इसी के आधार पर जानकारी विदेश मंत्रालय को दी जाएगी और विदेश मंत्रालय म्यांमार के साथ इनको डिपोर्ट करने पर बातचीत करेगा।
राजनाथ ने कहा, रोहिंग्याओं की पहचान आवश्यक है और बॉयोमीट्रिक जांच के जरिए रोहिंग्याओं की पहचान की जा सकती है। गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि रोहिंग्या भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौती हैं।राजनाथ बोले- रोहिंग्या वापस भेजे जाएंगे’साबित नहीं कर पाए भारतीय नागरिकÓ
शाह ने कहा कि जो लोग साबित नहीं कर पाए कि वे भारतीय नागरिक हैं, उनके नाम को ही ड्राफ्ट से अलग किया गया है। उन्होंने कहा, सदन में मैंने सभी पार्टियों के लोगों को सुना पर किसी भी पार्टी ने स्पष्ट नहीं किया कि यह अंतिम सूची नहीं है। किसी ने यह नहीं कहा कि एनआरसी कहां से आया। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस की ओर से ऐसा कहा रहा है कि भाजपा जनता के साथ धोखा कर रही है।
कांग्रेस पर सीधा अटैक
उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि घुसपैठ के कारण असम के विद्यार्थियों ने आंदोलन किया था। कई लोगों की जान चली गई और फिर 14 अगस्त 1985 को असम अकॉर्ड साइन किया गया। उस समय देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। अकॉर्ड के मुताबिक यह तय किया गया कि एनआरसी बनाते समय एक-एक घुसपैठिए को चुनकर बाहर किया जाएगा। शाह का आरोप- कांग्रेस के लिए
वोट बैंक अहम
उन्होंने कहा, 2005 में भी कांग्रेस ने एनआरसी बनाने की कोशिश की पर उनके लिए वोट बैंक महत्वपूर्ण था। उनमें साहस नहीं था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और फिर मोदी सरकार ने एनआरसी बनाने का काम शुरू किया। भाजपा अध्यक्ष ने दोहराया कि लोगों को समझने की जरूरत है कि यह प्राथमिक ड्राफ्ट है। सुनवाई, आपत्ति के बाद फाइनल लिस्ट आएगी। राज्यों के बीच विवाद पर कहा, विपक्ष की चाल
शाह ने कहा कि इस मसले पर सभी पार्टियों को देश की जनता के समक्ष अपना रूख साफ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पर निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई गई है और सब कुछ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किया गया है। शाह ने कहा कि भारत के दूसरे राज्यों से आए किसी भी लोगों के नाम काटे नहीं गए हैं और न काटे जा सकते हैं। उन्होंने कहा, जो मैं संसद में नहीं कह सका, अब कह रहा हूं। भ्रांति फैलाई जा रही है कि राज्य-राज्य में विवाद होगा। यह विपक्ष की चाल है। मैं इसकी घोर निंदा करता हूं। ऐसा कर कांग्रेस ने जनता को गुमराह करने का प्रयास किया है।
मानवाधिकार पर भी दिया जवाब
विपक्ष पर हमला बोलते हुए शाह ने कहा कि असम के लोगों के रोजगार छिन रहे हैं, स्वास्थ्य और शिक्षा के अवसर छिन रहे हैं। क्या उनका मानवाधिकार नहीं है? उन्होंने कहा कि भारत के लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ही एनआरसी बना। उन्होंने मांग की कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस को अपना स्टैंड क्लियर करना चाहिए। मौजूदा सरकार के लिए सीमाओं और देशवासियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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