एचआर्ईवी संक्रमित करना, हत्या की कोशिश नहीं- दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला

'It is better to give to someone than to kill', Delhi High Court said on seeking permission for abortion
Share

नई दिल्ली (एजेंसी)। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति द्वारा दुष्कर्म करने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति विभू बाखरू की पीठ ने कहा कि याची को आईपीसी की धारा 307 (हत्या की कोशिश) के तहत नहीं, बल्कि धारा 270 (संक्रमण फैलाने) के तहत दोषी ठहराया जा सकता है। पीठ ने याची को दुष्कर्म के साथ हत्या की कोशिश के आरोप में निचली अदालत की सुनाई सजा से बरी कर दिया। हालांकि, दुष्कर्म व अन्य अपराध के लिए सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। दोषी को सौतेली बेटी के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में निचली अदालत ने सजा सुनाई थी।

न्यायमूर्ति विभु बाखरू की पीठ ने स्पष्ट किया कि दुष्कर्म करने के समय संक्रमित व्यक्ति का मकसद हत्या करने का नहीं था और उसने हत्या करने के इरादे से पीडि़ता को चोट भी नहीं पहुंचाई है। अदालत ने कहा कि संक्रमित व्यक्ति के दुष्कर्म करने से ऐसा नहीं है कि पीडिता भी संक्रमित हो जाए। अगर, पीडि़ता संक्रमित हो भी जाती है तो जरूरी नहीं है कि उसकी मौत हो जाए। इन सबका कोई वैज्ञानिक प्रमाण भी नहीं है।


Share