राजस्थान में तेज बारिश : बांसवाड़ा के रास्ते 22 तक आएगा मानसून

Monsoon reached the border of Dungarpur-Banswara, for three days 10 districts will be submerged
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जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। राजस्थान में 22 जून को मानसून बांसवाड़ा के रास्ते प्रवेश कर सकता है। बंगाल की खाड़ी से उठने वाला मानसून बांसवाड़ा के कुशलगढ़ के रास्ते प्रवेश करेगा। इसके कुछ दिनों बाद अरब सागर से आना वाला मानसून भी राजस्थान पहुंच जाएगा। इसके सिरोही और उदयपुर के रास्ते प्रवेश करने का अनुमान है। इधर, बीते 24 घंटे में प्रदेश के 16 जिलों में बारिश हुई है।

राजस्थान में सिर्फ मेवाड़ और वागड़ (उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा और चित्तौडग़ढ़) ही ऐसे क्षेत्र हैं, जहां दोनों मानसून सक्रिय होते हैं। मौसम वैज्ञानिक प्रोफेसर नरपत सिंह राठौड़ बताते हैं कि उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा और चित्तौडग़ढ़ में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों तरफ से उठने वाले मानसून की बरसात होती है।

हाड़ौती (बूंदी, कोटा, बारां और झालावाड़) में जहां बंगाल की खाड़ी से आने वाला मानसून बरसात करता है। वहीं पूर्वी राजस्थान में मारवाड़ के जोधपुर, बाड़मेर, पाली, जालोर, नागौर और शेखावटी के सीकर, झुंझुनूं और प्रदेश के बाकी हिस्सों में अरब सागर से आने वाले मानसून से बरसात होती है।

बंगाल की खाड़ी का मानसून रहता है मजबूत

बंगाल की खाड़ी से आने वाला मानसून अरब सागर से उठने वाले मानसून के मुकाबले ज्यादा मजबूत होता है। वैसे दोनों मानसून सक्रिय होते हैं। यही वजह है कि उदयपुर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा और प्रतापगढ़ में भारी बरसात होती है। वहीं, बंगाल की खाड़ी वाले मानसून के चलते झालावाड़, कोटा में भी अच्छी बरसात होती है। पिछले साल राजस्थान में उदयपुर के झाड़ोल के रास्ते मानसून ने प्रवेश किया था।

इस बार सामान्य रहेगा मानसून

मौसम विभाग और वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार मानसून सामान्य रहेगा। बारिश के बीच अगर बड़ा अंतर नहीं आता है तो जुलाई-अगस्त में अच्छी बरसात होगी। देश में पूर्वी महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ ऐसे प्रदेश हैं जहां बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों मानसून सक्रिय होते हैं।

21 साल में 14 बार सामान्य रहा मानसून

2001 से अब तक 21 सालों में मानसून 14 बार सामान्य रहा है। वहीं 2 बार 2002 और 2009 में सामान्य से कम रहा। 2002 में राजस्थान में महज 233 मिमी और 2009 में 378 मिमी बरसात हुई थी। वहीं पांच बार सामान्य से ज्यादा मानसून रहा। इनमें 2006 में 670 मिमी, 2011 में 736 मिमी, 2013 में 691 मिमी, 2016 में 678 और 2019 में 747 मिमी बरसात हुई है।


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