हरियाली अमावस्या आज : उदयपुर में टूटेगी 121 साल पुरानी मेले की परंपरा

Share

मेले के दिन सुनी पड़ी पाल और सहेलियों की बाड़ी
हरियाली अमावस्या आज : उदयपुर में टूटेगी 121 साल पुरानी मेले की परंपरा
फतहसागर-सहेलियों की बाड़ी पर आज ‘यादों’ का मेला

उदयपुर (कार्यालय संवाददाता)। हरियाली अमावस्या सोमवार को मनाई जाएगी। कलेक्टर ने इस अवसर पर हर वर्ष की भाति इस वर्ष भी स्थानीय अवकाश घोषित किया है, लेकिन 121 सालों में पहली बार उदयपुर शहर में ना सखियों की हंसी ठिठोली और पुंगियों की शरारत भरी आवाजें होंगी और ना ही फतहसागर पाल पर गरमागरम मालपुओं और जलेबियों की महक। सवा सौ साल में पहली बार उदयपुर का प्रसिद्ध हरियाली अमावस्या का मेला इस बार नहीं लगेगा। कोरोना महामारी के चलते फतहसागर और सहेलियों की बाड़ी क्षेत्र में लगने वाले मेले को लेकर लोगों में खासा उत्साह रहता है। हर साल हरियाली अमावस्या मेले में हजारों की संख्या में आदिवासी अंचल के साथ ही संभागभर से लोग पहुंचते हैं, वहीं शाम को शहरवासियों का हुजूम उमड़ता है। अमावस्या के दूसरे दिन सखियों का मेला लगता है, जिसमें केवल महिलाओं का प्रवेश होता है। हालांकि कलक्टर ने हरियाली अमावस्या का अवकाश घोषित किया है।

दो दिवसीय मेले में खान पान के साथ ही महिलाओं के शृंगार, गृह सज्जा, उपयोगी सामान, खिलौने, कपड़े, आदि की करीब साढ़े चार सौ से अधिक दुकानें लगती है, जिन पर जमकर खरीदारी होती है। मेलार्थी चकरी-झूले और मनोरंजन की स्टॉल्स का भी आनंद लेते हैं।

सन्नाटे में रहा फतहसागर व सहेलियों की

बाड़ी मार्ग : हर बार अमावस्या के एक दिन पूर्व दुकानों की सजावट के चलते गुलज़ार रहने वाला फतहसागर से सहेलियों की बाड़ी तक के क्षेत्र इस बार सन्नाटा पसरा रहा। ना चकरी झूले बांधने की तैयारी थी, ना दुकानों के लिए अपनी जगह निश्चित करने वालों का तांता।  रातभर रास्तों पर चलकर अलसुबह तक अपनी जगह पर जमने वाले दुकानदार भी नदारद रहे। क्षेत्रवासियों का भी इस बार मेला नहीं होने से दिल टूट गया।

उदयपुर नगर निगम लगाएगा सांकेतिक मेला

नगर निगम की ओर से अमावस्या पर सांकेतिक मेले का आयोजन किया जाएगा।  डिप्टी मेयर पारस सिंघवी ने बताया कि मेले में सांकेतिक रूप से महिला पार्षदों के लिए लहरिया प्रतियोगिता का आयोजन होगा।

निगम की भी मारी गई आय

हरियाली अमावस्या के इस मेले से हर साल उदयपुर नगर निगम को लाखों में आय प्राप्त होती है, जो इस बार नहीं हुई। मेले में पिछली बार दुकानों और झूला स्थलों के आवंटन से नगर निगम को 12 लाख 95 हजार की आय हुई थी।


Share