खाड़ी देशों पर ऊर्जा निर्भरता घटाने की कवायद में जुटी सरकार

Government trying to reduce energy dependence on Gulf countries
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-अमेरिका व रूस समेत दूसरे देशों से तेल व गैस खरीद पर ज्यादा जोर
-गैस आधारित इकोनॉमी को तेजी से बढ़ावा देना सरकार की वरीयता

नई दिल्ली (एजेंसी)। अपनी ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति के लिए इस वक्त मुख्य रूप से खाड़ी देशों पर निर्भर भारत अब अमेरिका के बाद रूस और अन्य देशों का रूख करेगा। पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस सचिव तरूण कपूर ने बताया कि ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल के बीच भारतीय कंपनियां कई देशों में तेल व गैस ब्लॉक खरीदने की तैयारी में हैं।
कोविड-19 ने वैश्विक कूटनीति व इकोनॉमी में कई तरह के बदलाव की शुरूआत कर दी है। नए माहौल में भारत भी अपनी ऊर्जा नीति में एक अहम बदलाव यह कर रहा है कि वह अब तेल व गैस के लिए सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहता है। कपूर के मुताबिक अमेरिका के साथ दो वर्षों में ऊर्जा खरीद काफी बढ़ गई है और वह भारत को तेल व गैस आपूर्ति करने वाला विश्वसनीय साझेदार देश बनने की राह पर है। उन्होंने कहा, भारत का अपना रणनीतिक भंडार भर चुका है। हम अमेरिका के विशाल रणनीतिक भंडार में तेल खरीदकर रखना चाहते हैं, ताकि भविष्य में आपातकाल में या क्रूड के महंगा होने की स्थिति में उसका इस्तेमाल कर सकें।

इस वर्ष फरवरी में क्रूड की अंतरराष्ट्रीय कीमत में भारी गिरावट होने के बाद भारत ने अपने रणनीतिक भंडार भर लिए हैं। कुछ दिन पहले ही भारत व अमेरिका के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हुआ है, जिसके मुताबिक अमेरिकी रणनीतिक भंडार के इस्तेमाल का रास्ता आगे खुल सकता है।

कपूर ने बताया कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है कि जहां भी तेल व गैस ब्लॉक उपलब्ध हों, हम उन्हें खरीदें। अभी भी सरकारी क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी की सहायक शाखा ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) ने विदेश में तकरीबन 30 ऐसे ब्लॉक खरीदकर रखे हैं। भारत की नजर प्राकृतिक गैस ब्लॉक्स पर है और इसके लिए सरकारों के बीच बातचीत हो रही है। लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) की ढुलाई बेहद आसान हो गई है। इसलिए भी गैस ब्लॉक्स में निवेश पर भारत की खास रूचि है।

पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा के दौरान दोनों देशों में गैस सेक्टर में दो अहम समझौते हुए थे। रूस के शहर व्लादिवोस्तोक से चेन्नई पोर्ट के तक समुद्री मार्ग विकसित करने पर बात हो रही है। इस मार्ग का इस्तेमाल कच्चे तेल के साथ एलएनजी आयात के लिए भी हो सकता है।

कपूर बताते हैं कि भारत अभी अपनी खपत का 47 फीसद गैस घरेलू स्नोतों से पूरी करता है। लेकिन पिछले कुछ समय के दौरान जिस तरह से गैस खपत को बढ़ावा देने की नीति लागू की जा रही है, उसे देखते हुए तीन से पांच वर्षों में बड़ी मात्र में गैस की जरूरत होगी। घरेलू केजी बेसिन से अगले दो वर्षों में उत्पादन काफी बढ़ेगा, इसके बावजूद काफी मात्र में गैस का आयात करना होगा।


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