गहलोत ने मोदी को लिखी चिट्ठी : बाड़मेर में आरटीआई कार्यकर्ता पर हमले के बाद गहलोत ने व्हिसल ब्लोअर एक्ट के नियम बनाने के लिए प्र.म. से की मांग

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जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। बाड़मेर में आरटीआई कार्यकर्ता पर हुए हमले के बाद सियासत गरमा गई है। घटना की सीआईडी सीबी से जांच करवाने के साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्र.म. नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। गहलोत ने प्र.म. को लिखी चिट्ठी में यूपीए राज के दौरान बनाए गए सूचना प्रदाता संरक्षण अधिनियम (व्हीसल ब्लोअर एक्ट) , 2011 के जल्द नियम बनाने की मांग की है।

गहलोत ने प्र.म. को चिट्ठी में लिखा है कि सूचना प्रदाता संरक्षण कानून लोकसभा में 2011 में पास हो चुका था। 21 फरवरी, 2014 को इसे राज्यसभा ने पारित किया गया। 9 मई, 2014 को राष्ट्रपति से इस बिल पर सहमति दे दी। कानून की धारा 25 में केन्द्र सरकार को नियम बनाने की शक्तियां दी गई हैं, लेकिन 7 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद भारत सरकार ने अभी तक नियमों की अधिसूचना जारी नहीं की है। ऐसे में, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले आरटीआई कार्यकर्ताओं और व्हिसलब्लोअर्स पर हो रहे अत्याचारों को रोकने का मैकेनिज्म विकसित नहीं किया जा सका है। गहलोत ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि केंद्र सरकार देश भर के आरटीआई कार्यकर्ताओं, व्हिसलब्लोअर्स, सामाजिक कार्यकताओं और सिविल सोसाइटी के संरक्षण के लिए जल्द से जल्द इस कानून के तहत नियम बनाए जाएं ताकि उनहें संरक्षण मिल सके और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके। गहलोत ने चिट्ठी में लिखा है कि 2005 में आरटरआई एक्ट लागू हुआ था। इस कानून का रास्ता साफ करने में राजस्थान का भी विशेष योगदान रहा है। राजस्थान देश के उन शुरूआती राज्यों में से है जिसने सूचना का अधिकार अपने नागरिकों को पहले से ही दे रखा था। आरटीआई कानून के माध्यम से देश भर में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के खिलाफ काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं को सशक्त बनाया गया है। देश भर में इस कानून की मदद से आरटीआई कार्यकर्ता और व्हिसलब्लोअर्स तमाम खतरे उठाते हुए व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। पिछले कुछ समय से इनकी आवाज दबाने के लिए हिंसा का सहारा लिया जा रहा है।


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