गहलोत बोले-केंद्र सरकार लंपी नियंत्रण में करे मदद : कहा-आर्थिक सहायता की है जरूरत, 5807 से ज्यादा गायों की मौत रिकॉर्ड

गहलोत बोले-केंद्र सरकार लंपी नियंत्रण में करे मदद : कहा-आर्थिक सहायता की है जरूरत, 5807 से ज्यादा गायों की मौत रिकॉर्ड
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जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मांग रखी है कि गोवंश में फैल रही स्किन डिजीज लंपी की कंट्रोलिंग के लिए केंद्र सरकार राज्य की आर्थिक मदद करे। राजस्थान के 17 जिलों में अब लंपी वायरस गाय-भैंसों में फैल गया है। 5807 से ज्यादा गौवंश की मौत हो चुकी हैं। पश्चिमी राजस्थान के 10 जिलों से बढ़कर 7 और जिलों में यह वायरस अब फैल गया है। इनमें राजधानी जयपुर जिले के साथ ही अजमेर, उदयपुर, कुचामन सिटी (पशुपालन जिला), सीकर, झुंझुनूं, चूरू शामिल हैं। पशुपालन मंत्री लालचन्द कटारिया ने पशुओं के ट्रांसपोर्टेशन पर अगले 1 महीने के लिए रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रभावित जिलों में पशु मेलों पर रोक लगाने पर विचार करते हुए सभी जिला कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी गई है। माना जा रहा है जल्द ही आदेश जारी हो सकते हैं।

इधर, यह संक्रमित बीमारी जयपुर की हिंगोनिया गौशाला तक फैल चुकी हैं। जयपुर की हिंगोनिया गौशाला में 164 गायें लंपी वायरस डिजीज से संक्रमित हैं। जबकि सरकारी रिकॉर्ड में जयपुर जिले में कुल 282 गाय और गौवंश इंफेक्टेड बताए गए हैं। इनमें से 9 की मौत हो गई है। 236 का इलाज किया जा रहा है, इनमें 108 गौवंश रिकवर हो गए हैं।

राजस्थान के गौवंश में लंपी डिजीज से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 5807 हो गया है। सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक 1 लाख 20 हज़ार 782 पशु इससे अभी प्रभावित हैं। 94 हज़ार 222 का इलाज चल रहा है और 42 हज़ार 232 पशु रिकवर हो चुके हैं। बाड़मेर में सबसे ज्यादा पशु संक्रमित बताया जा रहे हैं। जहां 1307 गोवंश की मौत रिकॉर्ड की गई है। गंगानगर में 840, जोधपुर में 822 , जालौर में 708, बीकानेर में 646, नागौर में 558, कुचामन सिटी में 205 और जैसलमेर में 250 संक्रमित गौवंश की मौत हो चुकी है।

गंगानगर में 22393 पशु संक्रमित, 840 की मौत

राजस्थान में सरकारी सर्वे रिकॉर्ड के मुताबिक अब तक लंपी स्किन डिजीज से प्रभावित 94 हजार 358 पशु (गाय-भैंस) ट्रेस हुए हैं। इनमें कैटल में 90 प्रतिशत गौवंश हैं। 74 हजार 118 पशुओं का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। अब तक 36 हजार 553 गौवंश रिकवर हो चुके हैं। गंगानगर जिला लंपी डिजीज से सबसे ज्यादा प्रभावित है।

जहां 22 हजार 393 पशु संक्रमित पाए गए हैं। 840 की मौत हो गई है। बाड़मेर में 11 हजार 785 पशु संक्रमित मिले हैं और 830 की मौत हो गई है। जोधपुर में 10 हजार 212 संक्रमित पशु मिले हैं,जबकि 730 की मौत रिकॉर्ड की गई है। जालोर में भी 10 हजार 663 पशु संक्रमित मिले हैं। इनमें से 580 ने दम तोड़ दिया है। बीकानेर में 10 हजार 12 इंफेक्टेड गौवंश में से 727 की मौत हुई है।

जैसलमेर में 7107 गौवंश इंफेक्टेड मिले हैं, 231 की मौत हो चुकी है। पाली में 2470 संक्रमित पशुओं में से 60 की मौत हुई है। कुचामन सिटी में 4607 संक्रमितों में से 187 की मौत रिकॉर्ड हुई है। जबकि नागौर में 2388 में से 90 संक्रमित गौवंश दम तोड़ चुके हैं। सिरोही में 1037 में से 36, चूरू में 4590 में से 33, हनुमानगढ़ में 2806 में से 53, अजमेर में 903 में से 41, नागौर में 2388 में से 90, सीकर में 76 में से 1, झुंझुनूं में 23 में से 1, उदयपुर में 3004 में से 47 और जयपुर में 282 में से 9 गौवंश की मौत रिकॉर्ड की गई है।

जयपुर में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ वेटेरिनरी एजुकेशन एंड रिसर्च के पशु मेडिसिन डिपार्टमेंट ॥ह्रष्ठ और प्रोफेसर डॉ धर्मसिंह मीना ने पशुपालकों से अपील जारी करते हुए कहा- अगर किसी गाय-भैंस की लंपी से मौत हो जाती है, तो उसे खुले में बिल्कुल नहीं छोड़ें। गहरा गड्ढा खोदकर उसमें गाड़ दें। जो भी चीजें और जगह उस इंफेक्टेड पशु के सम्पर्क में आई हैं, उन्हें डिसइंफेक्टेड करें। जिन पशुओं में फोड़े हो रहे हैं। 90 रूरु ग्लीसरीन, 10 रूरु पोविडीन और थोड़ी हल्दी मिलाकर उसे फोड़ों पर लगाएं। तो वो जल्दी ठीक हो जाएंगे। पशु फार्म की साफ-सफाई रखें। बीमार जानवर को अलग कर दें। वहां दूसरे पशुओं और बाहरी लोगों का मूवमेंट नहीं होने दें।

डॉ. धर्मसिंह मीना ने आम जनता के लिए कहा-बहुत सारे लोग बीमार पशु का दूध इस्तेमाल में लेने को लेकर चिन्ता में हैं। दूध को उबालकर ही इस्तेमाल करें। ये वायरस 37 डिग्री सेंटीग्रेड पर भी मर जाता है। इसलिए पशु उत्पादों, मिल्क प्रोडक्ट्स से बिल्कुल नहीं डरें। पाश्च्युराइज और डेयरी का दूध सेफ है। किसानों या पशुपालकों से लिए गए दूध को गर्म करके इस्तेमाल करें।


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