आखिरी दिन ब्याज के 100 करोड़ चुका डिफॉल्टर होने से बचा फ्यूचर ग्रुप

आखिरी दिन ब्याज के 100 करोड़ चुका डिफॉल्टर होने से बचा फ्यूचर ग्रुप
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नई दिल्ली (एजेंसी)। फ्यूचर ग्रुप पर कर्ज का संकट कितना विकट है, इसे इस बात से ही समझा जा सकता है कि कंपनी को फॉरेन बॉन्ड्स पर 100 करोड़ रूपये का ब्याज अदा कर खुद को डिफॉल्टर होने से बचाना पड़ा है। ऐसे में समझा जा सकता है कि जिस समूह को कर्ज पर 100 करोड़ रूपये तक का ब्याज ही अदा करना पड़ रहा है, वह किस तरह के संकट में है। सूत्रों के मुताबिक यदि इस मौके पर कंपनी कर्ज के डिफॉल्टर हो जाती तो फिर रिलायंस के साथ उसकी डील में और देरी हो सकती थी।

फ्यूचर ग्रुप ने सोमवार को ब्याज की यह राशि 30 दिनों के ग्रेस पीरियड के आखिरी दिन अदा की है। बता दें कि 22 जुलाई को तकनीकी तौर पर डिफॉल्ट होने के बाद फ्यूचर ग्रुप ने कहा था कि वह ग्रेस पीरियड के दौरान पेमेंट अदा करेगा। चाहे यह पेमेंट बैंक फंडिंग के जरिए की जाए या फिर अन्य किसी माध्यम से ऐसा किया जाए।

दरअसल फ्यूचर ग्रुप इसके लिए अपनी कुछ हिस्सेदारी दो इंश्योरेंस कंपनियों को बेचना चाहता था, लेकिन समय रहते ऐसा नहीं हो सका। कैश फ्लो के संकट से बुरी तरह जूझ रहे फ्यूचर ग्रुप ने अब रिलायंस को ही अपना कारोबार बेचने का फैसला लिया है। प्लान के मुताबिक फ्यूचर ग्रुप की कंपनियों फ्यूचर लाइफस्टाइल, फ्यूचर सप्लाई चेन सॉल्यूशंस और फ्यूचर रिटेल का फ्यूचर इंटरप्राइजेज में विलय किया जा सकता है। एक बार यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से इस कंपनी में 8,500 करोड़ रूपये का निवेश किया जा सकता है और उसके पास कंपनी की 50 फीसदी हिस्सेदारी होगी।

बता दें कि पहले ही कर्ज के संकट से जूझ रहे फ्यूचर ग्रुप पर कोरोना संकट के चलते और मार पड़ी है। देश भर में स्टोर्स के बंद होने के चलते कंपनी के सामने कैश फ्लो का संकट पैदा हुआ है। ऐसी स्थितियों में कंपनी ने अपने तमाम स्टोर्स को बंद ही कर दिया है। कंपनी के कर्ज के अलावा प्रमोटर्स का कर्ज भी मार्च 2019 में बढ़कर 11,970 करोड़ रूपये हो गया, जो मार्च 2018 में 11,790 करोड़ रूपये था। बता दें कि अप्रैल से दिसंबर 2019 के दौरान फ्यूचर ग्रुप ने कर्ज, इक्विटी और हिस्सेदारी बेचकर 4,620 करोड़ रूपये की रकम जुटाई है। इसके अलावा ब्लैकस्टोन ने 1,750 करोड़ रूपये और अमेजॉन ने 1,430 करोड़ रूपये का बड़ा निवेश किया है।


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