मोदी जैसी एनर्जी कहां से लाएगा विपक्ष ?, शाम को मिशन पूरा, सुबह नया टारगेट

From where will the opposition bring energy like Modi?, mission accomplished in the evening, new target in the morning
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नई दिल्ली (एजेंसी)। काउंटिंग शुरू होने के दो घंटे बाद ही नतीजों का ट्रेंड सेट हो गया और दिन चढऩे के साथ ही पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की पूरी पिक्चर साफ हो गई थी। चार राज्यों में बंपर जीत के साथ भाजपा ने फिर से ‘कमल’ खिलाया और पंजाब में आम आदमी पार्टी ने एकतरफा रेकॉर्ड जीत हासिल की। भाजपा और जनता का फैसला दोनों स्पष्ट थे। कहीं से कोई शंका या आशंका की गुंजाइश नहीं। शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्यकर्ताओं का हौंसला बढ़ाने पार्टी मुख्यालय पहुंचे। फूलों की बारिश हुई, केंद्र के मंत्री लाइन में खड़े होकर तालियां बजा रहे थे। संबोधन शुरू हुआ तो मोदी ने मतदाताओं का आभार जताते हुए उनके लिए तालियां बजवाईं और अपने चिर-परिचित अंदाज में विपक्ष को घेरा। तड़के से चल रही सियासी गहमागहमी शांत हो रही थी। कांग्रेस, सपा और दूसरे विपक्षी दलों के खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ था। काफी तैयारी के साथ जनमत के स्वीकार करने वाले ट्वीट आए और कार्यकर्ताओं का हौंसला बनाए रखने की बातें की गईं। रात होते-होते चुनावी राजनीति भी जैसे थकान में डूब गई। लेकिन कोई था जिसके लिए अगली सुबह का प्लान तैयार रखा था। जी हां, हम बात कर रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की। रात के जश्न के बाद शुक्रवार को मोदी की आई तस्वीरें अखिलेश यादव और राहुल गांधी जैसे विपक्षी नेताओं के लिए काफी कुछ संदेश दे रही हैं।

इतनी एनर्जी कहां से लाएंगे?

शुक्रवार सुबह जब लोग मोबाइल पर अपने चुनाव क्षेत्र के उम्मीदवार की जीत का अंतर पता कर रहे थे। मोदी गुजरात के लिए उड़ चुके थे। टीवी पर लाइव प्रसारण शुरू हो गया और मोदी भगवा रंग की खास टोपी में सफेद आधी बाजू का कुर्ता पहने सड़क किनारे खड़े लोगों का अभिवादन करते दिखाई दिए। फूलों की मालाओं से सजी खुली जीप में सवार मोदी ने रोड शो के दौरान सड़क किनारे जमा संैकड़ों समर्थकों और प्रशंसकों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। भगवा गुब्बारे लहराए गए, मोदी-मोदी की गूंज सुनाई दे रही थी। भारत माता की जय… जय श्री राम के नारे लग रहे थे। चार राज्यों में भाजपा की प्रचंड जीत का यह जनता के जश्न का तरीका था। सड़क के किनारे भारी संख्या में जनसैलाब उमड़ा हुआ था। एक हाथ से मोदी हाथ हिलाते, फिर दूसरे हाथ से विक्ट्री साइन दिखाते। ऐसे समय में जब समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती, राष्ट्रीय लोकदल के जयंत चौधरी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे विपक्षी नेता चुनाव परिणामों पर हक्के-बक्के हो रहे हैं, प्र.म. मोदी नए मिशन पर आगे बढ़ चुके हैं। क्या विपक्ष में कोई नेता इतनी एनर्जी वाला दिखाई देता है?

जी हां, 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रचंड जीत के बाद कुछ ऐसी ही सियासत देश में देखी जा रही है। भाजपा एक चुनाव परिणाम आने के फौरन बाद अगले चुनाव की तैयारियों में जुट जाती है। महाविजय के बाद शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी अहमदाबाद एयरपोर्ट से गांधीनगर तक 10 किमी लंबा रोड शो कर चुके थे। बताया जा रहा है कि इस दौरान 4 लाख लोग उनके स्वागत में खड़े रहे।

मिशन गुजरात पर अब भाजपा

वह भाजपा दफ्तर में कार्यकर्ताओं और नेताओं से मिले। पंचायत सम्मेलन में शामिल होने के साथ ही उन्होंने कई कार्यक्रमों में शिरकत की। गुजरात में भी भाजपा की सरकार है और 2024 लोकसभा चुनाव से पहले गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में साफ समझा जा सकता है कि भाजपा ने गुजरात चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। गुजरात में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होंगे। इस बात को विपक्ष को भी समझना होगा। कांग्रेस ने शर्मनाक हार के बाद सीडब्ल्यूसी की बैठक बुलाई, मायावती ने हिम्मत न हारने की बात की पर भाजपा की रणनीति का तोड़ निकाले बिना चुनौती कैसे दे पाएंगे?

2024 पर मोदी का बड़ा इशारा

एक दिन पहले चार राज्यों में जीत पर बोलते हुए मोदी ने कई बड़ी बातें कहीं। उन्होंने 2024 के चुनावों को लेकर एक बड़ी ही दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद कुछ राजनीतिक पंडितों ने दावा किया था कि 2017 के नतीजों ने ही 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजे तय किए थे। उन्होंने कहा कि इस बार भी उन्हें यह कहने का साहस दिखाना चाहिए कि 2022 के नतीजों ने 2024 के नतीजे तय कर दिए हैं। साफ है भाजपा के इस करिश्माई नेता के पास 2024 का विजन क्लियर है। उनकी योजनाएं और नीतियां उसी को ध्यान में रखकर तैयार हो रही हैं। वैसे, भी जिस प्रचंड जीत के साथ भगवा पार्टी यूपी-उत्तराखंड में लौट रही है उसने सारी आशंकाओं और संशय को खत्म कर दिया है। ऐंटी-इनकंबेसी जैसी चीजें अब अप्रासंगिक हो गई हैं। केंद्रीय राजनीति में प्र.म. मोदी के आने से पहले तक चुनाव व्यापक रूप से जाति, क्षेत्र और धर्म के आधार पर जीते जाते थे। प्र.म. ने अब अपने 8 साल के कार्यकाल में विपक्षी दलों के आगे एक ऐसी बड़ी और मजबूत लकीर खींच दी है, जिसे छोटी साबित कर पाना अखिलेश-राहुल-ममता बनर्जी-उद्धव ठाकरे-शरद पवार जैसे नेताओं के लिए बड़ी चुनौती है। कभी दक्षिण से, कभी पूर्व से और पिछले दिनों ममता-अखिलेश को देख यूपी में विपक्षी एकजुटता की कोशिश होती दिखी लेकिन इसे मूर्त रूप देने से पहले ही समीकरण भरभरा गए। ऐसे में मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए विपक्ष को क्या-क्या चीजों की जरूरत होगी, उसे मोदी की कार्यशैली और ऊर्जा से ही समझा जा सकता है। वह एक टारगेट सेट करते हैं और उस पर आगे बढ़ते हैं और अगली ही सुबह आगे का टारगेट तैयार रहता है। क्या विपक्ष में ऐसी कार्यशैली दिखाई देती है?

आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि चुनाव की घोषणा होने से पहले विपक्षी नेता ट्विटर पर और रैलियों में सक्रियता दिखाते हैं। जबकि विपक्ष में रहते हुए भी वे जनता के करीब पहुंच सकते हैं और अपने लिए जमीन तैयार कर सकते हैं लेकिन उसके लिए सीजनल पॉलिटिक्स खत्म करनी होगी। ऐसे में जब मोदी जनता से मुखातिब होते हैं तो वे जनता के सामने विपक्ष की खामियों को चुन-चुनकर उजागर करते हैं।

वैसे भी, अब ध्रुवीकरण जैसी चीजें किसी काम की नहीं रहीं। मोदी ने कल ही कहा कि हर योजना, हर कार्य को क्षेत्रवाद, प्रदेशवाद और सम्प्रदायवाद का रंग देने का प्रयास भारत के उज्जवल भविष्य के लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय है। प्रधानमंत्री ने परिवारवाद की राजनीति को अपनी सबसे बड़ी चिंता बताया। साफ है कि वह आगे भी इस तरह की चीजों को स्वीकार नहीं करेंगे।

ऐसे समय में जब यूपी की प्रचंड जीत को देखकर योगी आदित्यनाथ को 2024 या 2029 में प्र.म. मोदी के बाद अगले प्रधानमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट करने की चर्चा जनता में होने लगी है। कांग्रेस, सपा, बसपा, लोकदल, आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस समेत लगभग सभी विपक्षी पार्टियों में नेताओं की दूसरी कतार गायब दिखती है। ये पार्टियां या तो एक नाम के सहारे चल रही हैं या एक परिवार के सहारे… अगर इन्हें भाजपा को चुनौती देनी है तो आमूलचूल बदलाव करने होंगे वरना यूपी चुनाव में कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी को मिला वोट शेयर (2.33’) विपक्ष के लिए एक डरावनी तस्वीर पेश कर ही रहा है।


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