पूर्व केंद्रीय मंत्री शौरी को भी मिली राहत, नहीं होगी गिरफ्तारी

पूर्व केंद्रीय मंत्री शौरी को भी मिली राहत, नहीं होगी गिरफ्तारी
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जोधपुर/उदयपुर (प्रासं)। उदयपुर की लक्ष्मी विलास पैलेस होटल के विनिवेश के मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी व कांतिलाल कर्मसे को भी बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। जस्टिस दिनेश मेहता ने सीबीआई कोर्ट की ओर से इनके विरूद्ध जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगा दी है। लेकिन इन्हें सीबीआई कोर्ट जोधपुर के समक्ष पेश होने और जमानत मुचलके पेश करने को कहा है। उनकी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से उन्हें 15 अक्टूबर तक कभी भी सीबीआई कोर्ट में पेश होने की छूट दी गई है।

सीबीआई कोर्ट ने 18 साल पूर्व हुए लक्ष्मी विलास पैलेस होटल के विनिवेश में सरकार को 244 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने के मामले में गत 15 सितंबर को प्रसंज्ञान लेते हुए शौरी के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज करने तथा गिरफ्तारी वारंट से तलब किया था। शौरी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण व अधिवक्ता प्रदीप शाह व कर्मसे की ओर से हाईकोर्ट की अधिवक्ता वंदना भंसाली व मुक्तेश माहेश्वरी ने सीबीआई कोर्ट के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। भूषण ने कहा, कि याचिकाकर्ता पूर्व केंद्रीय मंत्री व प्रतिष्ठित वरिष्ठ नागरिक है।

सीबीआई पूर्व में दो बार इस मामले में तथ्य नहीं होना बताकर केस बंद करने के लिए क्लोजर रिपोर्ट पेश कर चुकी थी, फिर भी अधीनस्थ कोर्ट ने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर प्रसंज्ञान ले लिया। गिरफ्तारी वारंट न्यायोचित नहीं है। इंदर मोहन गोस्वामी बनाम उत्तराखंड मामले में वर्ष 2007 में दिए गए निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित किया था, कि पहले समन जारी किया जाएगा तथा उसके बाद जमानती वारंट जारी होगा। बहुत ही असाधारण मामलों में कोर्ट गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकता है। ऐसी कोई परिस्थितियां नहीं थी, कि कोर्ट को सख्त तरीका अपनाने की जरूरत थी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री शौरी ने भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा और कोर्ट से आग्रह किया, कि उनकी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं है। इसलिए उन्हें निर्धारित तारीख 8 अक्टूबर की बजाय 15 अक्टूबर तक कभी भी सीबीआई कोर्ट के समक्ष पेश होने की छूट दी जाए, जिसे कोर्ट ने मान लिया। शौरी ने भरोसा दिलाया है, कि वे न्यायिक कार्यवाही में पूरा सहयोग करेंगे।

कोर्ट ने शौरी व कर्मसे के विरूद्ध सीबीआई कोर्ट द्वारा जारी किए गए गैर जमानती वारंट पर रोक लगाते हुए उसे जमानती वारंट में तब्दील करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने शौरी व कर्मसे को निजी मुचलका तथा दो गवाहों के मुचलके पेश करने के आदेश दिए हैं। शौरी व कर्मसे को कोर्ट की अनुमति के बिना देश को छोड़कर नहीं जाने के भी निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब तलब किया है। शौरी व कर्मसे के स्थगन प्रार्थना पत्र पर अब ज्योत्सना सूरी, प्रदीप बैजल व आशीष गुहा की याचिकाओं के साथ ही 15 अक्टूबर को सुनवाई होगी।


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