न्यूरो साइंस जगत में आईआईअी की पूर्व विज्ञानी का आविष्कार

न्यूरो साइंस जगत में आईआईअी की पूर्व विज्ञानी का आविष्कार
Share

कानपुर (एजेंसी)। ब्रेन हेमरेज और स्ट्रोक के मरीजों को लेकर अक्सर अस्पतालों में एमआरआई और सीटी स्कैन तक ले जाने में असुविधा बनी रहती है। डॉक्टरों को भी डर रहता है कि मरीज को मशीन तक ले जाने में कोई झटका न लगे और किसी अनहोनी का सामना न करना पड़े। आईआईटी की पूर्व विज्ञानी शिल्पा मलिक ने न्यूरो साइंस की दुनिया में बड़ा आविष्कार करके अब इस समस्या का समाधान निकाल लिया है। उन्होंने हेयर ड्रायर के आकार का छोटा, सुविधाजनक और भारी-भरकम मशीनों की तुलना में कहीं सस्ता हेड स्कैनर विकसित किया है। ब्रेन हेमरेज या ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में त्वरित उपचार से पूर्व स्कैनिंग में खप जाने वाले बहुमूल्य समय को बचाने में इसे उपयोगी आंका जा रहा है।

छोटे अस्पतालों में नहीं होती एमआरआई मशीन

ब्रेन हेमरेज आदि मामलों में आवश्यक है कि बिना समय गंवाए पीडि़त को नियत उपचार मिल जाए। अत्याधुनिक दवाएं और इंजेक्शन उपलब्ध हैं, जिन्हें यथाशीघ्र देकर पक्षाघात या कोमा जैसे दुष्प्रभावों से पीडि़त को बचाया जा सकता है। इसमें सबसे पहले सिर की स्कैनिंग आवश्यक होती है, जिसके आधार पर उपचार तय होता है। बड़े अस्पतालों में तो सीटी स्कैनिंग या एमआरआई की सुविधा उपलब्ध होती है, किंतु अधिकांश अस्पतालों में यह नहीं है। ऐसे में सीटी स्कैनिंग या एमआरआइ कराने में समय अपेक्षाकृत अधिक लग जाता है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर के सहयोग से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की पूर्व विज्ञानी शिल्पा मलिक के स्टार्टअप ने इस स्कैनर को विकसित किया है। युक्ति का पेटेंट कराने के बाद व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर दिया गया है। प्रारंभिक चरण में गुजरात के सरकारी अस्पतालों में इसकी आपूॢत की गई है।

सिर पर घुमाते ही दो मिनट में रिपोर्ट

सैरिबो नामक इस स्कैनर को हेयर ड्रायर की तरह सिर पर घुमाते ही दो मिनट में सटीक रिपोर्ट सामने आ जाती है। एनआईटी जमशेदपुर से वर्ष 2004 में कंप्यूटर साइंस मेें बीटेक के बाद शिल्पा ने डीआरडीओ में 2007 तक सेवाएं दीं। इसके बाद निजी कंपनियों में सेवाएं दीं और फिर 2013 में अपना स्टार्टअप ‘बायो स्कैनÓ शुरू कर इस शोध में जुट गईं। शिल्पा बताती हैं कि यह स्कैनर नियर इंफ्रारेड स्पेक्ट्रो स्कोपी तकनीक पर आधारित है।

नियर इंफ्रारेड लाइट दिमाग और तंत्रिकाओं के सूक्ष्मतम परिवर्तनों को चिन्हित करती है और सॉफ्टवेयर पर सारा डाटा दो मिनट में रिपोर्ट के रूप में सामने आ जाता है। इसका उपयोग और परिवहन बहुत आसान है। परिणाम सटीक हैं। तीन मॉडल तैयार किए गए हैं, जिनकी कीमत पांच लाख से आठ लाख रूपये के बीच है। उत्पादन में गति मिलने पर कीमत और भी कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

स्कैनिंग से ही स्पष्ट होती ब्रेन हेमरेज की स्थिति

उत्तर प्रदेश आयुॢवज्ञान विश्वविद्यालय ( इटावा) के वाइस चांसलर और सीनियर न्यूरो सर्जन प्रो. राजकुमार कहते हैं, जहां तक ब्रेन हेमरेज का सवाल है तो यह इस पर निर्भर करता है कि हेमरेज कितना तेज व किस स्थान पर हुआ है, क्योंकि शरीर का पूरा नियंत्रण दिमाग से होता है। स्कैनिंग से यह स्थिति स्पष्ट हो जाती है, जिसके बाद उपचार शुरू किया जाता है। यदि इस प्रकार का स्कैनर सुलभ हो जाता है तो अच्छा है। हालांकि यह कितना कारगर है, निष्कर्ष इसके उपयोग के बाद ही निकाला जा सकता है।


Share