आरएसएस के इतिहास में पहली बार – 11 जोन में होगी कार्यकारिणी मंडल की बैठक

आरएसएस के इतिहास में पहली बार
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11 जोन में होगी कार्यकारिणनई दिल्ली (एजेंसी)। कोरोना वायरस महामारी के चलते इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कार्यकारिणी मंडल/अखिल भारतीय कार्यकारी परिषद की बैठक 11 जोन में होगी। इस बैठक में आजीविका, अर्थव्यवस्था, कारोबार पर कोरोना वायरस का असर और कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। मार्च महीने में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक को रद्द करने के बाद आरएसएस एक जगह की बजाए 11 जगहों पर अखिल भारतीय कार्यकारी परिषद की बैठक करने जा रहा है। बैठक के लिए आरएसएस ने राज्यों का 11 जोन/क्षेत्र में बंटवारा किया है।

संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि इतिहास में यह पहली बार है, जब दिवाली के आस-पास आयोजित होने वाली कार्यकारिणी मंडल की बैठक को कई जगह आयोजित किया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के प्रोटोकॉल का पालन किया जा सके। संघ प्रमुख मोहन भागवत और महासचिव सुरेश भैयाजी जोशी सभी 11 बैठकों में मौजूद रहेंगे, जहां 40 से ज्यादा पदाधिकारियों की उपस्थिति नहीं होगी। हैदराबाद, अहमदाबाद, जयपुर, प्रयाग, पटना, पलक्कड़, गुवाहाटी, गुरूग्राम, गाजियाबाद और भुवनेश्वर में यह बैठक 27 अक्टूबर से 6 दिसंबर तक आयोजित की जाएगी। चूंकि, बैठक में उन मुद्दों को उठाया जाता है, जो खबरों में हैं या फिर वैचारिक रूप से संघ के लिए प्रासंगिक हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि हाथरस में 19 वर्षीय युवती से कथित गैंग रेप की घटना के बाद दलितों की स्थिति पर भी चर्चा हो सकती है।

मालूम हो कि संघ जातिवाद को मिटाने के लिए समाजिक समरसता जैसे अभियान चलाता आया है। इससे अवगत दूसरे पदाधिकारी ने कहा कि संघ के पदाधिकारियों का मानना है कि इस मुद्दे को ‘ठीक से और संवेदनशीलता के साथ’ नहीं संभाला गया था। उन्होंने कहा, हमारा मानना है कि प्रशासन ने हालात को खराब तरीके से संभाला। कृषि कानूनों पर चल रहे विरोध प्रदर्शन पर दूसरे पदाधिकारी ने कहा कि कानून में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) जैसों को शामिल नहीं किए जाने पर भारतीय किसान यूनियन पहले ही चिंता व्यक्त कर चुकी है।


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