भाला खरीदने पिता ने लिया डेढ़ लाख का कर्ज, अब बेटी ने बर्मिंघम में जीता ब्रॉन्ज

भाला खरीदने पिता ने लिया डेढ़ लाख का कर्ज, अब बेटी ने बर्मिंघम में जीता ब्रॉन्ज
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बर्मिंघम (एजेंसी)। कॉमनवेल्थ खेलों में भारतीय एथलीटों ने अपना जलवा दिखाया। मेरठ की अन्नू रानी ने जेवलिन थ्रो में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रचा। फाइनल मुकाबले में अन्नू ने 60 मीटर दूर भाला फेंका इसके साथ ही वो कॉमनवेल्थ खेलों में पदक जीतने वालीं पहली भारतीय महिला जैवलिन थ्रोअर बनीं। वल्र्ड चैम्पियन ऑस्ट्रेलिया की केलसे ली बार्बर ने 64.43 मीटर के थ्रो से गोल्ड मेडल जीता। उन्हीं की हमवतन मैकेंजी लिटिल 64.27 मीटर के थ्रो से दूसरे स्थान पर रहीं।
कॉमनवेल्थ में पदक जीतने वाली अन्नू पहली महिला जेवलिन थ्रोअर
भारत ने पहली बार 1934 में कॉमनवेल्थ खेलों में हिस्सा लिया था। 88 सालों के इतिहास में अन्नू रानी पहली महिला जेवलिन थ्रोअर बनीं जिन्होंने मेडल जीता है। इससे पहले काशीनाथ नाइक 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ खेलों में ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसके बाद साल 2018 ऑस्ट्रेलिया गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ खेल में नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल जीता था। इससे पहले मेरठ की प्रियंका गोस्वामी ने पैदल रेस में रजत पदक हासिल किया था और अब मेरठ की दूसरी बेटी अन्नू रानी ने कांस्य पदक हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। अनु के गांव में खुशी का माहौल है और साथ ही सब ने मिठाई बांटकर खुशियां मनाई। अन्नू मेरठ के बहदुरपुर की रहने वाली हैं। अन्नू ने इससे पहले 2014 के इंडियन एशियन गेम्स में भी ब्रॉन्ज मेडल जीता था। साल 2022 टोक्यो ओलंपिक में खराब स्वास्थ्य की वजह से अन्नू पदक अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी थीं।
2022 टोक्यो ओलंपिक में अन्नू ने लिया था हिस्सा
बर्मिंघम कॉमलनेल्थ खेलों में अन्नू ने अपने होने का एहसास दुनिया को कराया। शुरूआत में जेवलिन थ्रो के साथ शॉट पुट और डिस्कस थ्रो का भी अभ्यास करती थीं। लेकिन उन्होंने जेवलिन थ्रो में अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। अन्नू के पिता अमरपाल सिंह किसान है, उन्होंने बेटी के सपने को पूरा करने के लिए डेढ़ लाख रूपये का कर्ज लेकर भाला दिलाया था। जेवलिन क्वीन के नाम से पहचानी जाने वाली अन्नू के संघर्ष की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। गांव की गलियों में गन्ने को भाला बनाकर प्रैक्टिस करने वाली अन्नू एक दिन विदेश में देश का नाम रोशन करेंगी, यह शायद ही किसी ने सोचा होगा।
अन्नू गन्ने का भाला बनाकर करती थीं प्रैक्टिस
28 अगस्त 1992 को जन्मीं अन्नू रानी तीन बहन व दो भाइयों में सबसे छोटी हैं। उनके सबसे बड़े भाई उपेंद्र कुमार भी 5,000 मीटर के धावक थे और यूनिवर्सिटी स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा भी ले चुके हैं। बड़े भाई के साथ अन्नू रानी ने भी खेल में रूचि दिखाई और प्रैक्टिस की।


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