भाजपा में चि_ी विवाद थामने की कवायद

वसुंधरा की शाह के साथ घंटेभर की बैठक
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जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। भाजपा में पूर्व मुख्यम़ंत्री वसुंधरा राजे और प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया गुट के बीच जारी कोल्ड वॉर को थामने की कवायद की जा रही है। राजे समर्थक 20 विधायकों की चि_ी से पैदा हुए विवाद के बाद भाजपा कार्यालय में कोर ग्रुप की 3 घंटे तक बैठक हुई। इसमें वसुंधरा राजे भी मौजूद रहीं। राजे का दिल्ली से जयपुर आते वक्त रास्ते में जगह-जगह स्वागत के कारण वे तय वक्त पर जयपुर नहीं पहुंच सकीं, इस वजह से देरी से बैठक में शामिल हुईं। सतीश पूनिया के प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद उनकी अध्यक्षता में किसी बैठक में वसुंधरा राजे पहली बार शामिल हुई हैं। कोर ग्रुप की बैठक में राजे के शामिल होने को भाजपा के भीतर चल रही खींचतान को कम करने से जोड़कर देखा जा रहा है। राजस्थान भाजपा में खेमेबंदी को लेकर पार्टी आलाकमान ने भी नाराजगी जताई थी। राजे और पूनिया खेमे के बीच चल रही खींचतान के बाद इस कोर ग्रुप की बैठक को अहम माना जा रहा है। पार्टी आलाकमान की तरफ से  कोर ग्रुप की बैठक हर महीने करने के निर्देश हैं। जनवरी में गठन के बाद 24 जनवरी को पहली पहली बैठक हुई थी। तब वसुंधरा इसमें शामिल नहीं हुई थी। राजे नवंबर के बाद जयपुर आई हैं। वह करीब 6 महीने बाद भाजपा कार्यालय पहुंचीं हैं।

चिट्ठी विवाद, चार सीटों के उपचुनाव पर भी चर्चा

कोर ग्रुप की बैठक में विधानसभा उपचुनावों में पार्टी की रणनीति पर चर्चा के साथ-साथ विधानसभा के बजट सत्र में सरकार को अलग-अलग मुद्दों पर घेरने को लेकर भी रणनीति बन रही है। हाईकमान की तरफ से गुटबाजी को पूरी तरह से खत्म करने के निर्देश हैं। क्योंकि, 4 उपचुनाव वाले इलाकों में भी पार्टी को गुटबाजी के कारण भितरघात से नुकसान का खतरा है।

भाजपा में गुटबाजी हावी

कोर ग्रुप की बैठक ऐसे समय हो रही है जब भाजपा में गुटबाजी चरम पर है। 4 दिन पहले ही वसुंधरा राजे समर्थक 20 विधायकों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा , प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया को चि_ी लिखकर विधानसभा में मुद्दे उठाने और बोलने का मौका देने में भेदभाव का आरोप लगाया। इससे पहले कोटा में हुई चिंतन बैठक में हाड़ौती के नेताओं ने वसुंधरा राजे की अनदेखी पर सवाल उठाए थे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, रविवार को दिल्ली में राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक के बाद राजस्थान भाजपा को लेकर अलग से बैठक हुई। इसमें खेमेबंदी खत्म कर एकजुटता होने की कहा गया है।

खेमेबंदी और नेताओं की आपसी मतभेद की खबरें सार्वजनिक होने से पार्टी की हो रही किरकिरी पर भी दिल्ली में नाराजगी जताई गई है।

 


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