उपद्रव व हिंसा के खिलाफ डूंगरपुर बंद

उपद्रव व हिंसा के खिलाफ डूंगरपुर बंद
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डूंगरपुर (प्रात:काल संवाददाता)। जिले में रीट लेवल 2018 भर्ती परीक्षा में अनारक्षित वर्ग के लिए रिक्त पड़ी 1167 पदों पर जनजाति अभ्यार्थियों द्वारा उनसे भरने की मंाग को लेकर कांकरी डूंगरी पर धरने के बाद 24 सितम्बर को राष्ट्रीय राज मार्ग नम्बर-8 जाम कर देने के पश्चात विगत तीन दिनों तक राष्ट्रीय राज मार्ग पर स्थित व्यसायिक प्रतिष्ठानों, होटलों, किराणा दूकानो, तथा ख्ेारवाडा क्षेत्र की एक कॉलोनी में घुस कर प्रजातंत्रिक व्यवस्थाओं को प्रशासन की ऑखों के सामने तार-तार कर जिस तरह तीन दिनो तक न केवल उपद्रव मचाया अपितु हिंसा का नंगा नाच रचा गया। और राज्य की अशोक गहलोत सरकार के नुमाईदे मुकदर्शक होकर क्षेत्र की जनता को दो दो हाथ लूटते हुए सहजता से देखते गये।

आखिरकार राज्यपाल के हस्तक्षेप के बाद चेती राज्य सरकार को मजबुरी में सख्त आला अधिकारियों को डूंगरपुर भेजना पडा और उसके बाद शुरू हुए घटनाक्रम के आधार पर रविवार को धरना प्रदर्शन हाईवे से समाप्त होकर मार्ग खुला। लेकिन इस दौरान कोई हाईवे व खेरवाडा व डूंगरपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 200 करोड की सम्पत्ति जल कर नष्ट व लूट ली गई। इसी के विरोध में मूल अधिकार रक्षा मंच के संयोजक शार्दुलसिंह राठौड के आव्हान पर ेिजले भर का व्यापारिक संगठन, सर्व समाज ने एक स्वर में डंूगरपुर बंद का आव्हान किया। और बडी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंच कर विरोध प्रदर्शन किया।

इस दौरान सभी ने एक ही मांग रखी कि रा’य सरकार हिंसा के इस ताण्डव के लिए जिम्मेदार लोगो के खिलाफ प्राथमिकता से कार्यवाही करे। साथ ही उपद्रवियों द्वारा जो आगजनी, लूटपाट व तोडफोड की उसके नुकसान की सम्पूर्ण भरपाई करे। साथ ही अनारक्षित वर्ग के लिए जो पद अधिशेष बचे हुए उसमे किसी प्रकार की छेड़छाड़ न करे। साथ ही जिले भर में कानून व्यवस्था का सख्ती से पालना हो और उपद्रवियों व समाज कंटको के खिलाफ कड़ी कार्यवाही हो। ऐसी व्यवस्था स्थापित करे। संयोजक शार्दुलसिहं राठोड ने प्रशासनिक व्यवस्थाओ पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जिले का खुफिया तंत्र या तो पूरी तरह नकारा साबित हुआ या उनके द्वारा प्रदेश मुख्यालय को भेजी गई गोपनीय रिपोर्टाे पर राज्य सरकार ने उचित कदम उठाया नहीं। जबकि 18 दिन से प्रतिदिन राज्य व अन्य राज्यों के समाज कंटक कांकरी डूंगरी पहुंच कर धरना स्थल पर युवाओ को लगातार भडकाने का कार्य कर रहे थे। यहीं नहीं जिले भर से धरना स्थल पर सभी सुविधाएं भी मुहैया करवाई जा रही थी।

और 24 सितम्बर को सवेरे से ही इस बात का अंदेशा जिले के वाशिंदो को हो गया था कि शाम तक एनएच -8 को जाम किया जायेगा लेकिन इसके बावजूद जिला प्रशासन पूरी तरह बेखबर रहा। उन्होंने महामहिम राज्यपाल से आग्रह किया कि किसी भी दवाब में राज्य सरकार इन पदों के साथ छेडछाड न करे और नुकसान की भरपाई के लिए शीघ्र कार्यवाही करे। धरने को सम्बोधित करते हुए पूर्व उप सभापति पूरणमल दावडा, एडवोकेट ऋषि दवे, चेम्बर ऑफ कॉमर्स के राजेश डेन्डू, सिद्धार्थ मेहता, मोहन पण्डया, आलोक शाह, सहित वक्ताओ ने हाईवे व जिले भर में जो उपद्रव मचाया उसकी निष्पक्ष जांच हो।

सवेरे से ही बाजारों में पसारा रहा सन्नाटा : मूल अधिकार रक्षा मंच के आव्हान पर राष्ट्रीय राज मार्ग तथा जिले भर में उपद्रवियों द्वारा जो आगजनी, लूटपाट तथा मारपीट की घटनाएं राहगिरो के साथ की गई थी, उसको लेकर बंद का असर सवेरे से ही देखने को मिला। जिसके तहत शहर भर में किसी भी व्यवसायी ने अपने प्रतिष्ठान नहीं खोले।
इस दौरान आवश्यक सेवाओ के रूप में पेट्रोल पम्प व मेडिकल स्टोर भी बंद के समर्थन में रहे। 11 बजे के पहले ही बडी संख्या में व्यापारियो के ग्रामीण क्षेत्रो व शहर के विभिन्न इलाको से आने का क्रम शुरू हो गया और देखते ही देखते कलेक्ट्रेट पर सैकडों व्यापारी एकत्रित हो गये। जिसे देखते हुए प्रशासन ने कई वरिष्ठ पुलिस आलाधिकारियों को कलैक्ट्रेट पर पूरे लवाजमें के साथ तैनात कर दिये।

हालांकि व्यापारिक संगठनो द्वारा इस घटनाक्रम के प्रति जो प्रशासनिक मुकदर्शता थी उसके खिलाफ आक्रोश व्यक्त करना था और उसी के चलते अरबों रूपयों का नुकसान आम जन को झेलना पड़ा है। धरने पर हर सम्बोधन के दौरान जमकर नारेबाजी हुई। और प्रशासनिक व्यवस्थाओ पर सवालियां निशान उठे। इसके पश्चात मंच का एक प्रतिनिधि मण्डल ज्ञापन के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचा जहां महामहिम रा’यपाल व मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौपा गया।


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