प्रताप-अकबर युद्ध को सत्ता संघर्ष बता घिरे डोटासरा, भाजपा  बोली-  ‘मुगल चले गए और पीछे कांग्रेसी एजेंट छोड़ गए’

Dotasara surrounded Pratap-Akbar war as a power struggle, BJP said - 'The Mughals have gone and left behind the Congress agents'
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जयपुर(कार्यालय संवाददाता)। गोविन्द सिंह डोटासरा के महाराणा प्रताप और अकबर के बीच युद्ध को सत्ता का संघर्ष बताने पर सियासत तेज हो गई है। राजस्थान के पूर्व शिक्षामंत्री और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पर भाजपा ने बड़ा हमला किया है। पार्टी सांसद, प्रदेशाध्यक्ष सहित कई नेताओं ने ट्विट कर उनसे माफी मांगने की बात कही। केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने जहां तंज किया कि ‘मुगल चले गए और अपने पीछे कांग्रेसी एजेंट को छोड़कर।’ तो नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया बोले, प्रताप का युद्ध सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि स्वाभिमान की लड़ाई थी। राज की अगर इच्छा होती तो जयपुर वाले मानसिंह की लाइन में प्रताप चले जाते। मगर प्रताप नहीं गए।

दरअसल, डोटासरा गुरूवार को नागौर जिले के दौरे पर थे। यहां उन्होंने दो दिवसीय जिला स्तरीय कांग्रेस कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर में पहले दिन कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। कहा- भाजपा ने अपने राज के दौरान विद्या भारती की तर्ज पर पाठ्यक्रम बनवाए। उन्होंने महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हुई लड़ाई को धार्मिक लड़ाई बताकर पाठ्यक्रम में शामिल करवा रखा था, जबकि ये सत्ता का संघर्ष था। भाजपा हर चीज को हिन्दू-मुस्लिम के धार्मिक चश्मे से देखती है।

इस बयान के बाद फिर क्या था, भाजपा नेता ट्विटर पर टूट पड़े। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, प्रतिपक्ष नेता गुलाबचंद और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ सहित कई नेताओं ने धड़ाधड़ ट्वीट किए। उपनेता प्रतिपक्ष राठौड़ ने डोटासरा को महाराणा प्रताप के प्रति आदतन कुंठित मानसिकता रखने वाला बता दिया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष पूनिया ने कहा, वोट बैंक पॉलिटिक्स के चलते ऐसे बयान देना उनकी मजबूरी है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कटाक्ष के साथ डोटासरा को चेतावनी तक दे डाली। कहा-मुगल चले गए, लेकिन अपने पीछे कांग्रेसी एजेंट को छोड़कर गए। जो मातृभूमि के सम्मान की लड़ाई को सत्ता से जोड़ देते हैं। राजस्थान कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा किस आधार पर कह रहे हैं कि राजस्थान के माथे के तिलक महाराणा प्रताप ने अकबर से सत्ता के लिए युद्ध किया था? उन्होंने ट्विट किया कि आप माफी मांगे। अगली बार हमारे महाराणा प्रताप का नाम सियासी ज़ुबान पर न लाएं, यही अच्छा होगा।

पूर्व सीएम राजे बोलीं: कांग्रेस माफी मांगे

महाराणा प्रताप-अकबर के युद्ध को लेकर छिड़े सियासी घमासान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी ट्विट कर कांग्रेस को माफी मांगने का कहा है। उन्होंने ट्विट करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप व अकबर के संघर्ष को सिर्फ सत्ता की लड़ाई बताकर कांग्रेस ने मेवाड़ के स्वाभिमानी इतिहास को ललकारा है। महाराणा प्रताप ने आजीवन मातृभूमि की रक्षा का संकल्प जारी रखा। अकबर के साथ महाराणा प्रताप का युद्ध सत्ता संघर्ष नहीं, बल्कि राष्ट्र सुरक्षा का संघर्ष था। उन्होंने मेवाड़ के स्वाभिमान की खातिर जंगलों में घास की रोटियां तक खाई, ऐसे पराक्रमी योद्धा के अपमान पर कांग्रेस को सार्वजनिक रूप से जनता से माफी मांगनी चाहिए।

कटारिया बोले- प्रताप दिखते ही लोगों को अकबर दिख जाता है

नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने कहा कि दुर्भाग्य ये है कि इन लोगों को प्रताप दिखते ही अकबर दिख जाता है। इसलिए इन लोगों ने इतने साल तक यही खेती कमाकर राज किया है। बाकी भारत में आप किसी को भी पूछोगे तो प्रताप और अकबर के बीच अगर तुलना हो तो प्रताप का जीवन राष्ट्र के लिए स्वाभिमान और मूल्यों की लड़ाई के लिए रहा। राज की अगर इच्छा होती तो जयपुर वाले मान सिंह की लाइन में प्रताप चले जाते। मगर प्रताप नहीं गए। कांग्रेस का चश्मा है कि इन्होंने हमेशा मुस्लिम तुष्टीकरण का ही इन्होंने पालन किया है। इसलिए ये अपनी पार्टी का अस्तित्व खो रहे हैं और खुद का भी अस्तित्व खो देंगे। कांग्रेस की जो दुर्गति आज हुई है उसका बड़ा कारण ये ही है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने ट्वीट कर कहा कि महाराणा प्रताप का अकबर के साथ युद्ध सत्ता संघर्ष नहीं बल्कि राष्ट्रवाद की लड़ाई थी। डोटासरा जी आप पहले भी इस मामले पर विवादित बयान दे चुके हैं, आखिर कांग्रेस पार्टी को मुस्लिम वोटों को खोने का इतना डर क्यों है।

उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने ट्वीट कर कहा कि गोविन्द सिंह डोटासरा जी, महाराणा प्रताप व अकबर की लड़ाई ‘संप्रभुता, स्वतंत्रता और स्वाभिमान’ की लड़ाई थी जो भारतीय संविधान के आदर्श हैं ना कि सत्ता की लड़ाई थी। राजस्थान की आन बान शान के प्रतीक महाराणा प्रताप के खिलाफ बार-बार कुंठित मानसिकता का परिचय देना आपकी आदत में शुमार हो गया है।

कटारिया भी दे चुके हैं विवादित बयान

डोटासरा को कटारिया भले ही कठघरे खड़ा कर रहे हों, लेकिन पहले वह खुद महारणा प्रताप पर बेतुका बयान दे चुके हैं। उपचुनाव के दौरान उन्होंने भरे मंच से महाराणा प्रताप को लेकर विवादित बयान दिया था। इसको लेकर मेवाड़ में काफी विरोध भी हुआ। इसके बाद उन्हें माफी मांगनी पड़ी।

डोटासरा का भी दूसरी बार बयान

डोटासरा भी इससे पहले महाराणा प्रताप और अकबर को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। शपथ लेने के दौरान उन्होंने दोनों के महान होने पर बोला था कि यह तो एक्सपर्ट तय करेंगे कि महान कौन है? हालांकि बाद में उन्होंने इस पर अपनी सफाई भी दी थी।


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