एक बार भर्ती विज्ञापन निकालने के बाद उसमें बार-बार संशोधन न करें

एक बार भर्ती विज्ञापन निकालने के बाद उसमें बार-बार संशोधन न करें
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जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। शनिवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) और राजस्थान राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएसबी) के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से ये समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं, राज्य सेवाओं एवं अधीनस्थ सेवाओं की भर्ती कैलेंडर के अनुसार समय से पूरी करे। संघ लोक सेवा आयोग की तरह ही समय पर भर्ती विज्ञापन निकलें, नियमित परीक्षा हो और साक्षात्कार भी समय पर हों ताकि भर्तियां ज्यादा लंबित नहीं रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी विभाग द्वारा भर्ती की अभ्यर्थना भेजे जाने के बाद परीक्षा आयोजित होने एवं परिणाम जारी होने में ज्यादा समय नहीं लगे। इसके लिए विभाग आरपीएससी एवं राज्य कर्मचारी चयन बोर्ड के साथ समन्वय स्थापित करें।

सेवा नियमों की अड़चनों के कारण कई बार भर्तियां अटकती हैं। ऐसे में आवश्यकता पडऩे पर सेवा नियमों में संशोधन किया जाए। जहां तक संभव हो भर्ती का विज्ञापन निकालने से पहले ही संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करें कि उस परीक्षा की तिथि पर कोई अन्य परीक्षा पहले से ही निर्धारित न हो, जिससे परीक्षा स्थगित करने की नौबत न आए। यह प्रयास हो कि एक बार भर्ती विज्ञापन निकालने के बाद उसमें बार-बार संशोधन न करना पड़े।

न्यायिक प्रक्रिया के कारण रूकी भर्तियों की प्रभावी रूप से पैरवी की जाए

न्यायिक निर्णयों के कारण लंबित भर्तियों के संदर्भ में पिछले चार माह में हुई प्रगति एवं करीब 6 हजार भर्तियों पर स्थगन आदेश हटना एवं भर्तियां पूरी होना संतोषजनक है। शेष जो भर्तियां न्यायिक प्रक्रिया के कारण रूकी हैं। उनमें प्रभावी रूप से पैरवी की जाए और संबंधित विभाग राज्य के महाधिवक्ता एवं अतिरिक्त महाधिवक्ताओं के साथ समन्वय स्थापित कर न्यायालयों में अपना पक्ष मजबूती से रखें। भर्तियों के कोर्ट में अटकने के कारण कई बार अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।

रीट की परीक्षा भी समय से  आयोजित करने के निर्देश

चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन का कार्य तय समय में हो। आरपीएससी एवं अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड विज्ञापन के माध्यम से अभ्यर्थियों को इस संबंध में सूचना दें एवं इसके लिए एक समयावधि तय कर दी जाए। दस्तावेज सत्यापन के लिए अभ्यर्थियों को बार-बार अवसर देने के बजाए कट-ऑफ डेट एक बार ही तय कर दी जाए। चयनित अभ्यर्थियों का परिवीक्षा काल पूरा करने के बाद स्थायीकरण समय पर हो यह सुनिश्चित किया जाए। रीट की परीक्षा भी समय पर आयोजित कराने के निर्देश दिए।


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