ब्रिटेन के स्ट्रेन को भी खत्म कर देती है कोवैक्सिन, सभी वैरिएंट पर कारगर

Bharat Biotech Vaccine क्यों है सवालों के घेरे में?
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न्यूयार्क (एजेंसी)।  अमेरिका की स्वतंत्र जर्नल क्लीनिकल इंफेक्शियस डिसीस ने रविवार को कोरोना की स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सिन के बारे में अच्छी खबर दी। उनकी स्टडी में दावा किया गया कि कोवैक्सिन भारत में पाए गए डबल म्यूटेंट कोरोना वैरिएंट के खिलाफ काफी हद तक प्रोटेक्शन देती है। साथ ही यह ब्रिटेन में मिले वैरिएंट समेत कई दूसरे स्ट्रेन को भी खत्म कर देती है।

इससे पहले इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने भी कोवैक्सिन को लगभग सभी प्रमुख वैरिएंट पर असरदार बताया था।

थर्ड फेज के क्लिनिकल ट्रायल में कोवैक्सिन 78′ तक प्रभावी

कोरोना वैक्सीन बनाने वाली हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ( आईसीएमआर) ने हाल ही में कोवैक्सिन के तीसरे फेज की अंतरिम क्लिनिकल ट्रायल रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट में भारत में निर्मित कोवैक्सिन को क्लिनिकली 78′ और कोरोना से गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों पर 100′ तक प्रभावी बताया गया है। कंपनी ने अपने दूसरे विश्लेषण में कोरोना के 87 सिंप्टम्स पर रिसर्च किया था।

बाद में बढ़ते संक्रमण के बाद कंपनी ने तीसरे फेज के लिए 127 लक्षणों पर विश्लेषण किया। इसमें कोवैक्सिन की एफिकेसी 78′ तक पाई गई। कंपनी वैक्सीन के अंतिम रिपोर्ट जून में जारी करेगी। तीसरे फेज की स्टडी में 18-98 साल के बीच के 25,800 लोगों को शामिल किया गया, जिसमें 10′ 60 साल से अधिक उम्र के लोग शामिल हुए।

कोरोना के सभी वैरिएंट्स के खिलाफ कोवैक्सिन कारगर

भारत बायोटेक के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. कृष्णा एल्ला का कहना है कि क्लिनिकल ट्रायल्स के तीनों फेज में 27 हजार वॉलंटियर्स पर वैक्सीन का प्रयोग किया है। फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल्स के नतीजों के साथ यह साबित हो गया है कि कोवैक्सिन कोरोनावायरस के खिलाफ असरदार है। यह वैक्सीन तेजी से सामने आ रहे कोरोनावायरस के अन्य वैरिएंट्स के खिलाफ भी कारगर है। भारत बायोटेक ने कोवैक्सिन को ट्रेडिशनल प्लेटफॉर्म पर बनाया है। इसमें इनएक्टिवेटेड वायरस को शरीर में इंजेक्ट किया जाता है, जो शरीर में बढ़ता नहीं है पर लडऩे के लिए एंटीबॉडी जरूर तैयार कर देता है।

कोवैक्सिन का वेस्टेज भी कम

कोवैक्सिन या बीबीवी152 एक व्होल वायरॉन इनएक्टिवेटेड वैक्सीन है। इसे वेरो सेल्स से बनाया गया है। यह 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर स्टेबल रहती है और रेडी-टु-यूज लिक्विड फॉर्मेशन में ट्रांसपोर्ट की जा रही है। मौजूदा वैक्सीन सप्लाई चेन चैनल्स के लिए यह उपयुक्त है। बीबीवी152 के साथ 28 दिन की ओपन वायल पॉलिसी भी है, जो वैक्सीन के वेस्टेज को 10-30′ तक कम करती है।


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