शरीर में जाते ही करने लगेगी कोरोना पर वार – डीआरडीओ की कोरोना मिसाईल ‘2-डीजी’ लॉन्च

मल्टीविटामिन, ओमेगा -3, प्रोबायोटिक्स COVID -19 के लिए असरदार: अध्ययन
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नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत समेत दुनिया के अधिकांश हिस्से में कहर बनकर टूटे सार्स-कोव-2 के लिए दवा आ चुकी है। 2-डोक्सी-डी-ग्लुकोज यानी 2डीजी नाम के इस ऐंटी-कोविड ड्रग को डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने बनाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इस दवा का पहला बैच (10,000 डोज) लॉन्च किया। हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन, रेमडिसिविर, आइवरमेक्टिन जैसी तमाम दवाओं के कोविड-19 पर असर को लेकर पिछले साल से ही रिसर्च चलती रही, मगर 2डीजी वह पहली दवा है जिसे ऐंटी-कोविड ड्रग कहा जा रहा है। आइए इसके बारे में सबकुछ जानते हैं।

2डीजी : किसने बनाया, कौन करेगा उत्पादन?

ठ्ठ    2डीजी को डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) के इंस्टिट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन ऐंड अलाइड साइंसेज (आईएनएमएस) ने विकसित किया है। इसमें हैदराबाद स्थित डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरी (डीआरएल) के रिसर्चर्स का भी योगदान है। डीआरएल ही आम जनता के लिए इस दवा को बनाएगी। यह दवा एक पाउडर के रूप में उपलब्ध होगी।

ठ्ठ    पिछले साल जब भारत में कोविड-19 की पहली लहर की शुरूआत हुई थी, तभी से आईएनएमएस के वैज्ञानिकों ने इस पर काम शुरू कर दिया था। मई 2020 में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने इस दवा के कोविड मरीजों पर फेज 2 ट्रायल की मंजूरी दे दी। यह ट्रायल अक्टूबर तक चले।

ठ्ठ    ट्रायल में सामने आया कि दवा कोविड मरीजों के लिए सेफ है और रिकवरी में भी मदद करती है। नतीजों के बाद डीसीजीआई ने नवंबर 2020 में फेज 3 ट्रायल की मंजूरी दी। आखिरकार ट्रायल डेटा के आधार पर 9 मई 2021 को डीसीजीआई ने इस दवा के आपातकालीन इस्तेमाल को मंजूरी दे दी।

कोविड-19 के खिलाफ कैसे काम करती है 2डीजी?

ठ्ठ    2डीजी असल में 2डीजी अणु का एक परिवर्तित रूप है जिससे ट्यूमर, कैंसर कोशिकाओं का इलाज होता है। ट्रायल में पता चला कि 2डीजी कोविड मरीजों के इलाज में तो कारगर है ही, हॉस्पिटल में एडमिट मरीजों की ऑक्सिजन पर निर्भरता को भी कम करती है।

ठ्ठ    फिलहाल इस दवा को सेकेंडरी मेडिसिन की तरह यूज करने की परमिशन दी गई है। यानी यह प्राइमरी मेडिसिंस के सपोर्ट में यूज की जाएगी। यह दवा काफी हद तक ग्लूकोज जैसी है, मगर ग्लूकोज नहीं है। वायरस शरीर में पहुंचते ही अपनी कॉपीज बनाना शुरू कर देता है, इसके लिए उसे ताकत चाहिए होती है जो ग्लूकोज से मिलती है।

ठ्ठ    जब यह दवा दी जाएगी तो वायरस इस ग्लूकोज एनालॉग को लेगा और उसी में फंस जाएगा। नतीजा ये होगा कि वायरस अपनी कॉपीज नहीं बना पाएगा यानी उसकी ग्रोथ रूक जाएगी।

क्या यह दवा कोविड-19 के हर वेरिएंट को रोकेगी?

आईएनएमएस के डायरेक्टर डॉ. अनिल मिश्रा के अनुसार, 2डीजी अपनी कॉपी बनाने वाले वायरस को कैद कर लेती है। यानी वायरस का कोई भी वेरिएंट हो, उसे खाने की जरूरत तो पड़ेगी ही और जैसे ही वह अपनी भूख मिटाने के लिए आगे बढ़ेगा, यह दवा उसे फंसा लेगी।

डॉ. मिश्रा के मुताबिक, यह दवा लेने के बाद ऑक्सिजन की डिमांड बढ़ जाती है क्योंकि वायरस तेजी से मल्टीप्लाई होने लगता है। एक बार वह प्रक्रिया रूक गई तो ऑक्सिजन का संकट भी खत्म हो जाएगा।

2डीजी : डोज क्या होगी? कीमत क्या रखी गई है?

आईएनएमएस के वैज्ञानिक डॉ. सुधीर चंदना के मुताबिक, यह दवा एक सैशे के रूप में उपलब्ध होगी। जैसे आप ओआरएस को पानी में घोलकर पीते हैं, वैसे ही इसे भी पानी में मिलाकर ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह दवा दिन में दो बार लेनी होगी। कोविड-19 मरीजों को पूरी तरह ठीक होने के लिए 5 से 7 दिन तक यह दवा देनी पड़ सकती है।

कीमत को लेकर अभी कुछ नहीं कहा गया है। डॉ. चंदना के अनुसार, इस बारे में कोई फैसला डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरी ही करेगी। हालांकि उन्होंने यह जरूरी कहा कि दवा किफायती हो, इसका ध्यान रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, एक सैशे की कीमत 500 से 600 रूपये के बीच हो सकती है।

2डीजी दवा कब आएगी? क्या कोई साइड इफेक्ट्स भी हैं?

यह दवा 17 मई को लॉन्च होते ही आम जनता के लिए उपलब्ध हो गई है। इसका उत्पादन तेजी से बढ़ाया जा रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों तक इसकी पहुंच हो सके।

साइड इफेक्ट्स के बारे में पूछने पर डॉ. चंदना ने कहा कि ट्रायल के दौरान, सामान्य और गंभीर मरीजों को यह दवा दी गई। सभी मरीजों को इस दवा से फायदा ही हुआ, किसी पर कोई प्रतिकूल प्रभाव देखने को नहीं मिला। उनके मुताबिक, यह कहा जा सकता है कि इस दवा का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।


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