20-25 अप्रैल के बीच पीक पर होगा कोरोना, फिर घटेंगे केस…

केरल-महाराष्ट्र में कोरोना के 70% एक्टिव केस
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नई दिल्ली (एजेंसी)। कोरोना वायरस को लेकर नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने जहां अगले चार हफ्ते बहुत अहम बताए हैं, वहीं आईआईटी कानपुर की टीम ने गणितीय मॉडल के आधार पर कहा है कि देश में कोरोना की लहर 20 से 25 अप्रैल के बीच अपनी ऊंचाई पर होगी। इस टीम के सदस्य आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने कोरोना की दूसरी लहर से जुड़े तमाम सवालों पर बात की।

इस लहर की पीक वैल्यू क्या है? : इस सवाल पर अग्रवाल ने कहा कि हमारे पीक की वैल्यू रोजाना 2 लाख नए संक्रमण थी जो कि 15 अप्रैल को ही आ चुकी है। हमने 20 से 25 अप्रैल के बीच यह आंकड़ा आने की उम्मीद जताई थी। ऐसे में पीक वैल्यू बदलती जा रही है। यह पीक वैल्यू कैसे तय होती है? इस पर उन्होंने बताया कि हम कोरोना की विशेषताओं को ध्यान में रखकर इसे तय करते हैं। इसमें रोजाना के संक्रमण डेटा के अलावा बिना लक्षण वाले मामलों और पाबंदियों की स्थिति को भी ध्यान में रखते हैं।

‘मई के अंत तक बेहतर होगी स्थिति’ : प्रो. अग्रवाल ने बताया कि 25 अप्रैल के बाद देश में ऐक्टिव केस कम होने लगेंगे और मई अंत तक स्थिति बेहतर होने लगेगी। क्या हर राज्य में पीक अलग-अलग होगा, इस पर उन्होंने कहा कि बड़े राज्यों में पीक 20-25 अप्रैल के बीच ही रहेगी। प्रोफेसर अग्रवाल ने कहा कि मौजूदा लहर पिछली लहर से इस मायने में अलग है कि रोजाना दर्ज की जा रही मौतें इस बार संक्रमण की दर के मुकाबले कम हैं। फरवरी के बाद जब लगने लगा कि संक्रमण खत्म हो गया और वैक्सीन भी आ गई तो सब बाहर आ गए। इससे संक्रमण तेजी से बढ़ गया।

संक्रमण के मुकाबले कम है मौतों का आंकड़ा : मॉडल के मुताबिक संक्रमण की पहुंच बीते दो माह में 30 पर्सेंट तक बढ़ी है। इससे मामले तेजी से बढ़े। पिछली लहर में एक हजार मौतें तब हुई थीं, जब देश में एक लाख केस आ रहे थे। वहीं इस बार एक दिन में एक लाख से ऊपर मामले आ रहे हैं मगर संक्रमण से मौतें एक हजार के करीब ही हैं। लॉकडाउन से क्या इस लहर को थामा जा सकता है, इस पर उन्होंने कहा कि इस बार संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ चुका है, इसलिए अब लॉकडाउन का उतना फायदा नहीं होगा, जितना पहली लहर में हुआ था। अब मास्क और उचित दूरी ही बचाव है।


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