कोरोना वायरस वैक्सीन शोध – दुनियाभर के जासूसों के बीच छिड़ी जोरदार जंग

कोरोना वायरस वैक्सीन शोध
Share

वॉशिंगटन (एजेंसी)। कोरोना वायरस महामारी विकराल रूप धारण कर चुकी है और दुनिया को इस महासंकट के खात्मे के लिए रामबाण वैक्सीन की तलाश है। एक तरफ रूस, अमेरिका और चीन कोरोना वायरस वैक्सीन को जल्द से जल्द बाजार में उतारने के दावे कर रहे हैं लेकिन दूसरी ओर इस महामारी के खात्मे के ‘ब्रह्मास्त्र’ पर कब्जे के लिए दुनियाभर में जासूसों के बीच जंग छिड़ी हुई है।

चीनी जासूस कोरोना वायरस वैक्सीन के डेटा को हासिल करने के लिए अमेरिकी विश्वविद्यालयों की खाक छान रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि यह उनके लिए बेहद आसान लक्ष्य होगा। दरअसल, उन्हें लग रहा है कि दवा कंपनियों की जासूसी से आसान अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर नजर रखना है। ये चीनी जासूस यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना और अन्य स्कूलों पर डिजिटल निगरानी रख रहे हैं जहां पर कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर व्यापक रिसर्च चल रहा है।

रूस की नजर अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन पर

इस जंग में जीत के लिए केवल चीनी जासूस ही नहीं बल्कि रूस की प्रमुख खुफिया एजेंसी एसवीआर अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में कोविड वैक्सीन नेटवर्क पर निशाना साध रही है। इस गुप्त निगरानी का सबसे पहले भंडाफोड़ ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी ने किया जो फाइबर ऑप्टिक केबल्स की निगरानी करती है। यही नहीं ईरान ने कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर हो रहे शोध को चुराने में लगा हुआ है।

उधर, अमेरिका ने भी अपने विरोधियों के खिलाफ जासूसी तेज कर दी है और साथ ही अमेरिकी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को बढ़ा दिया है। अगर संक्षेप में कहें तो दुनियाभर की सभी बड़ी खुफिया एजेंसियां एक-दूसरे के यहां हो रहे कोरोना से जुड़े ताजा शोध को चुराने में जुटी हुई हैं। वर्तमान और पूर्व जासूसों के मुताबिक कोरोना महामारी ने हाल के दिनों में शांति के समय सबसे तेजी के साथ खुफिया एजेंसियों को एक-दूसरे के खिलाफ जंग के लिए बाध्य कर दिया है।

अमेरिकी शोध को चुराने के लिए प्रयास तेज

अमेरिका के सभी शत्रुओं ने अमेरिकी शोध को चुराने के लिए प्रयास तेज कर दिया है। इसके जवाब में अमेरिका ने कोरोना से जुड़े अत्याधुनिक शोध कर रहे अपने विश्वविद्यालयों और निगमों की सुरक्षा को बढ़ा दिया है। नाटो के खुफिया अधिकारी जो अब तक रूसी टैंकों और आतंकी नेटवर्क के मूवमेंट पर नजर रखते हैं, उन्हें अब वैक्सीन के शोधों को चुराने के रूसी प्रयासों पर नजर रखने के लिए लगा दिया गया है। खुफिया एजेंसियों के बीच जारी यह जंग कुछ उसी तरह से हो रहा है जैसे कोल्ड वॉर के दिनों में सोवियत संघ और अमेरिका के बीच होता था।


Share