अवमानना केस -प्रशांत भूषण पर 1 रू. का जुर्माना

अवमानना केस -प्रशांत भूषण पर 1 रू. का जुर्माना
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नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मामले में प्रशांत भूषण को एक रूपये का जुर्माना रजिस्ट्री में भरना होगा। अदालत ने पिछली सुनवाई में भूषण को माफी मांगने का एक और मौका दिया था मगर वे इसके लिए तैयार नहीं हुए। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि भूषण अगर 15 सितंबर तक 1 रूपया जमा नहीं कर सके तो तीन महीने की जेल और तीन साल के लिए डिबार किया जाएगा। अदालत ने 82 पन्नों में अपना फैसला दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने बताया है कि उसने किस वजह से भूषण को सजा देने का फैसला किया।

‘आज प्रशांत भूषण को सजा नहीं सुनाते तो…

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसने भूषण को माफी मांगने का मौका दिया। अदालत ने कहा, मगर भूषण ने न हमारी बात सुनी, न ही अटॉर्नी जनरल की सलाह मानी। इसलिए हमें उन्हें उचित सजा देने पर विचार करना पड़ा। अदालत ने कहा कि अगर वह भूषण के व्यवहार का संज्ञान न लेती तो इससे वकीलों और याचिकाकर्ताओं में गलत संदेश जाता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हालांकि दरियादिली दिखाते हुए, हम कड़ी सजा देने के बजाय अवमानना करने वाले पर एक रूपये का मामूली जुर्माना लगा रहे हैं।

कोर्ट पर कीचड़ उछालने की कोशिश : सुको

अदालत ने कहा कि उसने भूषण के बयानों का भी संज्ञान लिया है जो उन्होंने 24 अगस्त को अदालत में बयान दाखिल करने से पहले दिए। कोर्ट ने कहा कि भूषण ने अपने सप्लीमेंट्री बयान को खूब हवा दी और अपने ट्वीट पर माफी मांगने से इनकार किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, भूषण ने इस सब-जुडिस मामले पर कई इंटरव्यू भी दिए और कोर्ट की गरिमा को और चोट पहुंचाने की कोशिश की। अगर हम ऐसे व्यवहार का संज्ञान नहीं लेते तो इससे देशभर के वकीलों और याचिकाकर्ताओं के बीच गलत संदेश जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि उसकी नजर में भूषण की गलती बेहद गंभीर है। उन्होंने न्याय प्रशासन के ऐसे संस्थान की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की है जिसके वे खुद भी एक सदस्य हैं।

25 अगस्त को न्यायाधीश अरूण मिश्रा, बी.आर. गवई और कृष्ण मुरारी ने सजा पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। फैसला सुनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि बोलने की आजादी सबके पास है, लेकिन साथ ही दूसरे के अधिकारों का सम्मान भी जरूरी है।

अवमानना केस में प्रशांत भूषण के खिलाफ कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें :

* अदालत की अवमानना अधिनियम के तहत सजा के तौर पर भूषण को छह महीने तक की कैद या दो हजार रूपये का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती थी, पर अदालत ने इस मामले में उनके ऊपर सिर्फ एक रूपये का जुर्माना लगाया है।

* भूषण के लिए सजा का ऐलान करते हुए जस्टिस अरूण मिश्रा ने कहा- जजों को प्रेस में नहीं जाना चाहिए। अदालत के बाहर जजों द्वारा कही गई बातों पर भरोसा करना स्वीकार्य नहीं है। जस्टिस अरूण मिश्रा की अध्यक्षता में जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने कहा कि भूषण ने अपने बयान से पब्लिसिटी पाई, उसके बाद कोर्ट ने इस मामले पर संज्ञान लिया।

* जस्टिस अरूण मिश्रा ने कहा कि कब तक इस प्रणाली को भुगतना होगा। न्यायाधीशों की निंदा की जाती है और उनके परिवारों को अपमानित किया जाता है। उन्होंने कहा, वे तो बोल भी नहीं सकते। शीर्ष अदालत ने प्रशांत भूषण के वकील से कहा कि उनसे उन्हें निष्पक्ष होने की उम्मीद है।

* सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण के लिए सजा सुनाते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता, लेकिन दूसरों के अधिकारों का भी सम्मान किये जाने की आवश्यकता है।


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