महाराष्ट्र में ‘चोट’ खाई कांग्रेस को अब गोवा में सता रहा एनसीपी से डर

महाराष्ट्र में 'चोट' खाई कांग्रेस को अब गोवा में सता रहा एनसीपी से डर
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पणजी (एजेंसी)। गोवा में साल 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने राज्य में अपनी सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है, जिसे लेकर कांग्रेस में चिंता बनी हुई है। यूं तो महाराष्ट्र में दोनों पार्टियां साथ मिलकर शिवसेना नीत सरकार चला रही हैं, लेकिन कांग्रेस ने इस बात को लेकर नाराजगी जाहिर कर रही है कि शरद पवार की पार्टी उनके राजनीतिक आधार में ही सेंध लगा रही है। दरअसल गोवा की सत्ता से वर्षों से दूर रही कांग्रेस के नेता आगामी विधानसभा चुनाव को अपने अस्तित्व की लड़ाई की तरह देख रहे हैं, लेकिन एनसीपी की वजह से उनमें एक डर बना हुआ है।

कांग्रेस आगामी चुनावों में अकेले ही चुनाव लडऩे की तैयारी कर रही है। वहीं, एनसीपी ने गोवा में भी सीएम प्रमोद सावंत की भाजपा सरकार को हराने के लिए महाराष्ट्र की तरह महाअघाड़ी का प्लान पेश कर दिया है। इसके लिए एनसीपी छोटी और क्षेत्रीय पार्टियों को इक_ा कर रही है। इस बात को लेकर कांग्रेस में चिंता बनी हुई है, क्योंकि एनसीपी सीटों का एक बड़ा हिस्सा मांग रही है और ऐसा नहीं होने पर अकेले ही लड़ाई की धमकी दे रही है। खास बात यह है कि एनसीपी ने अपने गोवा प्लान की कमान पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल के हाथों में दी है।

गौरतलब है कि एनसीपी के पास यहां चर्चिल अलेमाओ के रूप में एक ही विधायक हैं। चर्चिल गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। उनके बारे में खास बात है कि वह कांग्रेस, सेव गोवा फ्रंट, तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा रह चुके हैं। इतना ही नहीं जब भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व रक्षामंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में गोवा में तख्तापलट किया था, अलेमाओ भाजपा के समर्थक बन गए थे।

कांग्रेस की चिंता का कारण

कांग्रेस ने बिहार के महागठबंधन जैसी स्थिति होने की आशंका जताई है। कांग्रेस को डर है कि एनसीपी के नेतृत्व वाले गठबंधन की वजह से कांग्रेस समर्थक और सरकार से नाराज वोट कट जाएंगे। चुनाव से पहले गोवा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, महाअघाड़ी का आईडिया राज्य में अपने खुद के तनाव खड़े कर देगा। यहां केवल 40 सीटें हैं और हर क्षेत्र में केवल 30 हजार के आसपास मतदाता हैं। इन्हीं मतदाताओं में बाहुबली और बागी भी शामिल हैं, जो वोट का गणित बिगाड़ सकते हैं। एनसीपी नेता दावा करते हैं कि भाजपा की छोटी पार्टियों को खत्म करने का इस गठबंधन में गोंद का काम करेगा। महाराष्ट्र में मजबूत जड़ें होने के बावजूद गोवा में मौजूदगी दर्ज नहीं करा सकी शिवसेना भी इसका हिस्सा बनना चाहेगी।

जब जीत कर भी हारी कांग्रेस

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के खाते में 13 सीटें आर्ई थीं। वहीं, 40 में से 17 सीटें जीतकर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। हालांकि, एमजीपी (3), निर्दलीय (3), एनसीपी (1) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के तीन विधायकों की मदद से पार्रिकर को सत्ता मिली। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस के खेमे पर अपना कब्जा करना शुरू कर दिया। इसकी शुरूआत विधायक विश्वजीत राणे से हुई। उन्हें स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। इसके बाद सुभाष शिरोड़कर और दयानंद सोप्ते भी अलग हो गए। यह दौर तब भी जारी रहा जब पैन्क्रिएटिक कैंसर से जूझ रहे पर्रिकर का 2019 में निधन हो गया।

उनकी जगह स्पीकर प्रमोद सावंत को मिली। सावंत ने बीते साल जुलाई में कांग्रेस के 15 में से 10 विधायकों को तोड़कर तख्तापलट किया। इन सभी के बावजूद कांग्रेस आने वाले विधानसभा चुनावों में अपना भविष्य देख रही है। गोवा की एक चौथाई आबादी कैथोलिक को कांग्रेस के सबसे बड़ा मतदाता माना जाता है।

भाजपा का 25 साल का राज खत्म हुआ

बीते साल मई में पणजी में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को हराया था। इस हार के बाद भाजपा का गोवा की राजधानी से 25 साल का राज खत्म हो गया था। भाजपा ने गोवा में दो में से एक लोकसभा सीट भी गंवा दी। हालांकि, भाजपा ने अपने अलग ही सोशल इंजीनियरिंग मॉडल की कोशिश की थी। इसमें मराठा को मुख्यमंत्री, दलित और धनगर को उनका सहयोगी बनाया गया था। आर्थिक प्रवासियों के खिलाफ स्थानीय लोगों के एक होने के चलते भंडारी समुदाय में नाराजगी बढ़ी है। इससे भाजपा का समर्थन तैयार हुआ है। खुद को ताकत से अलग-थलग महसूस कर रहे गौड़ सारस्वत ब्राह्मण कांग्रेस की अच्छी शुरूआत दिला सकते हैं।


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