सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं पर 13 विपक्षी नेताओं का साझा बयान, कहा-‘प्र.म. मोदी की चुप्पी से स्तब्ध हैं’

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नई दिल्ली (एजेंसी)। देश भर में सांप्रदायिक हिंसा की बढ़ती घटनाओं और इन मामलों में केंद्र सरकार की निष्क्रियता के खिलाफ 13 मुख्यमंत्रियों और विपक्षी नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। सोनिया गांधी, शरद पवार, ममता बनर्जी, एमके स्टालिन, हेमंत सोरेन, तेजस्वी यादव सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने और सांप्रदायिक हिंसा के अपराधियों को कड़ी सजा देने की संयुक्त अपील की। संयुक्त बयान में, 13 विपक्षी दलों ने कहा है कि वे ‘क्षुब्ध’ हैं कि भोजन, आस्था जैसे मुद्दों का इस्तेमाल सत्ता प्रतिष्ठान की ओर से समाज का ध्रूवीकरण करने के लिए किया जा रहा है। इसके साथ-साथ विपक्षी पार्टियों ने हालिया सांप्रदायिक हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि कट्टरता फैलाने और समाज को भड़काने वालों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी को लेकर स्तब्ध हैं। नेताओं ने कहा कि हम सभी वर्गों से शांति बनाए रखने की अपील करते हैं, सांप्रदायिक ध्रूवीकरण  बढ़ाने की इच्छा रखने वालों के मंसूबे को विफल करें। रविवार को रामनवमी पर मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक सहित अन्य क्षेत्रों में हिंसा की कई घटनाएं सामने आने के कुछ ही दिनों बाद विपक्षी नेताओं का यह संयुक्त बयान सामने आया है। बयान में कहा गया है कि खरगोन में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है क्योंकि रविवार की सांप्रदायिक झड़प के चार दिनों के बाद 52 घरों और दुकानों में या तो आग लगी दी गई है या फिर उन्हें नुकसान पहुंचाया गया है। वहीं, कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें मुस्लिम होने के कारण निशाना बनाया गया था।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि रिपोर्ट्स से संकेत मिलता है कि जिन इलाकों में ये घटनाएं हुई हैं, वहां एक भयावह पैटर्न है। सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने वाले आक्रामक धार्मिक जुलूसों से पहले भड़काऊ भाषण दिए गए थे। पत्र में, विपक्षी नेताओं ने कर्नाटक में मुस्लिम स्कूली छात्रों की ओर से हिजाब या पारंपरिक हेडस्कार्फ पहनने और नवरात्रि के दौरान मांसाहारी भोजन पर प्रतिबंध लगाने के कदम का भी उल्लेख किया है।

विपक्षी नेताओं ने संयुक्त बयान में आगे कहा कि हम देश में उन लोगों द्वारा अभद्र भाषा की बढ़ती घटनाओं से बेहद चिंतित हैं, जिन्हें आधिकारिक संरक्षण प्राप्त है और जिनके खिलाफ कोई सार्थक और कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही है। नेताओं ने कहा कि जिस तरह से सोशल मीडिया और ऑडियो विजुअल प्लेटफॉर्म का आधिकारिक संरक्षण के साथ नफरत और पूर्वाग्रह फैलाने के लिए दुरूपयोग किया जा रहा है उससे वो बेहत दुखी हैं।


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